100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal March 13, 2026 04:28 44 0

ओमान

अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान संवाद और तनाव कम करने को बढ़ावा देने वाले एक तटस्थ मध्यस्थ देश के रूप में उभरा है।

मध्यस्थता में ओमान की भूमिका

  • ओमान लंबे समय से “सभी का मित्र, किसी का शत्रु नहीं (Friend to all, enemy to none)” की तटस्थता-आधारित नीति का पालन करता है, जिसकी स्थापना सुल्तान काबूस बिन सईद ने की थी।
  •  इसी नीति के कारण ओमान क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के साथ संतुलित और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने में सक्षम रहा है।

ओमान के बारे में

  • ओमान अरब विश्व का सबसे प्राचीन स्वतंत्र राज्य है, जो पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में तटस्थता की नीति और शांति आधारित कूटनीति के लिए जाना जाता है।
  • स्थान: ओमान पश्चिम एशिया में अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पूर्वी भाग में  और फारस की खाड़ी के मुहाने के निकट रणनीतिक रूप से अवस्थित है।
  • सीमाएँ
    • स्थलीय सीमाएँ: संयुक्त अरब अमीरात (उत्तर-पश्चिम), सऊदी अरब (पश्चिम) और यमन (दक्षिण-पश्चिम)।
    • समुद्री सीमाएँ: दक्षिण और पूर्व में अरब सागर तथा उत्तर-पूर्व में ओमान की खाड़ी, साथ ही ईरान और पाकिस्तान के साथ समुद्री सीमाएँ।
  • भूगोल
    • ओमान भौगोलिक रूप से विविधतापूर्ण देश है, जिसमें तटीय मैदान, रुब-अल-खाली मरुस्थल (Rub’ al Khali fringe) का सीमांत क्षेत्र तथा हजर पर्वत शृंखला (Hajar Mountains) जैसे पर्वतीय क्षेत्र शामिल हैं।
    • यहाँ की जलवायु मुख्यतः शुष्क मरुस्थलीय है, हालाँकि सलालाह (Salalah) क्षेत्र में मानसूनी वर्षा होती है, जिससे सीमित वनस्पति, विशेषकर लोबान (Frankincense) के वृक्ष, पाए जाते हैं।
    • ओमान में कोई स्थायी प्राकृतिक नदियाँ या झीलें नहीं हैं, क्योंकि यह एक शुष्क देश है और यहाँ पारंपरिक नदियों के रूप में सतही जल लगभग शून्य है।
      • इसके भू-दृश्य में विस्तृत वाडी (wadis) पाई जाती हैं, जो चट्टानी और मौसमीय नदी घाटियाँ होती हैं तथा वर्षा के दौरान इनमें जल भर जाता है।

कवच 4.0

भारत ने व्यस्त रेलवे मार्गों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए दिल्ली–मुंबई और दिल्ली–हावड़ा हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर (High-density rail corridors) के 1,452 किमी. मार्ग पर कवच 4.0 (Kavach 4.0) प्रणाली लागू की है।

कवच के बारे में

  • कवच भारतीय रेल द्वारा उपयोग की जाने वाली स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली है, जिसका उद्देश्य ट्रेनों की गति को नियंत्रित करना और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर ट्रेनों के टकराव को रोकना है।
  • उत्पत्ति: इस प्रणाली का विकास वर्ष 2015 में किया गया, इसे वर्ष 2018 में पहली बार परिचालन प्रमाणन प्राप्त हुआ और वर्ष 2020 में इसे भारत की राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली (India’s national ATP system) के रूप में अपनाया गया।
  • कवच 4.0: इस उन्नत संसकरण को वर्ष 2024 में अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा स्वीकृत किया गया है और इसे हाई डेंसिटी वाले  रेल मार्गों और 160 किमी/घंटा तक की गति के लिए डिजाइन किया गया है।

विशेषताएँ

  • ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (Automatic Train Protection): यदि लोको पायलट गति को नियंत्रित करने या सिग्नलों का पालन करने में विफल रहता है तो यह प्रणाली स्वतः ब्रेक लगा देती है, जिससे टकराव और डेंजर सिग्नल पार करने की घटनाएँ रोकी जा सकती हैं।
  • सटीक स्थान की पहचान: पटरियों के किनारे लगाए गए RFID टैग ट्रेनों की लगातार और सटीक लोकेशन ट्रैकिंग प्रदान करते हैं, जिससे रियल-टाइम निगरानी संभव होती है।
  • एकीकृत संचार नेटवर्क: दूरसंचार टॉवर और ऑप्टिकल फाइबर केबल लोकोमोटिव, स्टेशन और सिग्नलिंग प्रणालियों के बीच निरंतर संचार सुनिश्चित करते हैं।
  • स्टेशन–लोको एकीकरण: स्टेशन आधारित उपकरण और ऑनबोर्ड कवच डिवाइस सिग्नल संबंधी जानकारी का आदान-प्रदान करते हैं और कोहरे जैसी कम दृश्यता की स्थिति में भी ट्रेन संचालन को नियंत्रित करते हैं।

महत्त्व

  • रेलवे सुरक्षा में वृद्धि: कवच ट्रेनों के टकराव, अत्यधिक गति और सिग्नल उल्लंघन के जोखिम को कम करता है, जिससे परिचालन सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार संभव होता है।
  • आधुनिकीकरण को समर्थन: यह प्रमुख रेलवे कॉरिडोरों में डिजिटल सिग्नलिंग और स्वचालन को सुदृढ़ करता है।
  • स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बढ़ावा: कवच भारत की किफायती स्वदेशी रेलवे सुरक्षा तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है और आत्मनिर्भर भारत पहल को समर्थन देता है।

ब्लैक रेन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि तेल भंडारण सुविधाओं पर हमलों के बाद तेहरान में रिपोर्ट की गई “ब्लैक रेन (Black Rain)” गंभीर श्वसन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न कर सकती है।

ब्लैक रेन के बारे में

ब्लैक रेन वह वर्षा होती है, जो कालिख (soot), हाइड्रोकार्बन और विषैले प्रदूषकों के कारण दूषित हो जाती है। इससे वर्षा का जल सामान्य वर्षा की तुलना में गहरा, तैलीय और रासायनिक रूप से खतरनाक हो जाता है।

ब्लैक रेन के कारण

  • तेल और औद्योगिक संयंत्रों का दहन: तेल रिफाइनरियों या औद्योगिक इकाइयों पर हमलों अथवा आग लगने से धुआँ उत्पन्न होता है, जिसमें कालिख, हाइड्रोकार्बन तथा बेंजीन, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी विषैली गैसें वायुमंडल में प्रसारित हो जाती हैं।
  • वर्षा बादलों के साथ वायुमंडलीय मिश्रण: धुएँ से भरी वायु परतों से होकर गुजरने वाली वर्षा हवा में मौजूद कणों और रासायनिक वाष्पों को अवशोषित कर लेती है, जिससे गहरे रंग की और प्रदूषक-समृद्ध वर्षा होती है।
  • भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियाँ: पर्वतीय अवरोध और स्थिर वायुमंडलीय स्थितियाँ धुएँ तथा प्रदूषकों को शहरी क्षेत्रों के ऊपर संगृहीत कर सकती हैं, जिससे वर्षा के साथ मिलकर गिरने वाले प्रदूषकों की सांद्रता बढ़ जाती है।

ब्लैक रेन के प्रभाव

  • स्वास्थ्य प्रभाव: ब्लैक रेन के संपर्क में आने से श्वसन संबंधी समस्याएँ, सिरदर्द, त्वचा में जलन और आँखों में सूजन उत्पन्न हो सकती है, जबकि बेंजीन जैसे विषैले यौगिकों के लंबे समय तक संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: ब्लैक रेन के माध्यम से जमा होने वाले प्रदूषक मृदा, जल निकायों और फसलों को दूषित कर सकते हैं, जिससे वे खाद्य शृंखला में प्रवेश कर पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
  • अम्लीय वर्षा के प्रभाव: वर्षा जल में घुले सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड अम्लीय वर्षा उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे वनस्पतियों की हानि, इमारतों का क्षरण और अवसंरचना की गुणवत्ता में गिरावट हो सकती है।
  • दीर्घकालिक प्रदूषण जोखिम: PFAS जैसे स्थायी रसायन पर्यावरण में दशकों तक बने रह सकते हैं, जिससे दीर्घकालिक पारिस्थितिकी प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

बग बाउंटी कार्यक्रम 

(Bug Bounty Programme)

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार प्रणाली की सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए अपना पहला संरचित बग बाउंटी कार्यक्रम (Bug Bounty Programme) प्रारंभ किया है।

संबंधित तथ्य

  • यूआईडीएआई (UIDAI) इस कार्यक्रम को साइबर सुरक्षा समाधान प्रदाता एम/एस कॉमओल्हो आईटी प्राइवेट लिमिटेड (M/s ComOlho IT Private Limited) के साथ साझेदारी में संचालित कर रहा है।

बग बाउंटी कार्यक्रम (Bug Bounty Programme) के बारे में

  • उद्देश्य: यह कार्यक्रम साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को यूआईडीएआई (UIDAI) के कुछ प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्मों में संभावित कमजोरियों की पहचान करने की अनुमति देता है।
  • शोधकर्ताओं का पैनल: इस पहल में भाग लेने के लिए 20 अनुभवी सुरक्षा शोधकर्ताओं और एथिकल हैकरों का एक पैनल चुना गया है, जो यूआईडीएआई (UIDAI) की डिजिटल परिसंपत्तियों—जैसे यूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइट, माईआधार पोर्टल (myAadhaar portal) और सिक्योर क्यूआर कोड एप्लिकेशन (Secure QR Code application) की जाँच करेंगे।
  • खामियों का स्तर: शोधकर्ता इन प्रणालियों में मौजूद खामियों को क्रिटिकल, हाई, मीडियम और लो रिस्क (Critical, High, Medium, and Low risk) जैसी श्रेणियों में जाँचेंगे।
    • यदि वे वास्तविक सुरक्षा खामियों की पहचान कर उत्तरदायित्वपूर्वक रिपोर्ट करते हैं, तो उन्हें समस्या की गंभीरता के आधार पर पुरस्कार प्रदान किए जाएँगे।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI)

  • भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) एक वैधानिक प्राधिकरण है, जो भारत के निवासियों को आधार (Aadhaar) नामक 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या जारी करता है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 2009 में भारत के योजना आयोग के अंतर्गत की गई थी और बाद में आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 के तहत इसे वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया। यह वर्तमान में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • उद्देश्य
    • भारत में कहीं भी ऑनलाइन सत्यापित की जा सकने वाली एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करना, जो बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट और आईरिस) तथा जनसांख्यिकीय डेटा पर आधारित होती है।
    • दोहरी पहचान (Duplicate identities) को समाप्त करना तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) तंत्र के माध्यम से सरकारी सब्सिडी, लाभ और सेवाओं की कुशल और पारदर्शी डिलीवरी सुनिश्चित करना।

राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक (NH-GCI)

 

हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वर्ष 2025–26 के लिए पहला राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक (NH-GCI) जारी किया है।

संबंधित तथ्य

  • पहले आकलन चक्र में जुलाई से दिसंबर 2024 की अवधि के लिए 24 राज्यों में लगभग 30,000 किमी. राष्ट्रीय राजमार्गों को शामिल किया गया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक (NH-GCI) के बारे में

  • जीसीआई प्रत्येक 1 किमी खंड के भीतर हरित छत्र से आच्छादित भूमि के प्रतिशत को दर्शाता है।
  • सहयोग: इस सूचकांक को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के सहयोग से तैयार किया गया है।
  • उद्देश्य: उन्नत अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकी का उपयोग करके राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे (RoW) के भीतर हरित आवरण का वैज्ञानिक और मात्रात्मक आकलन करना।
  • कवरेज: पहले आकलन चक्र में जुलाई–दिसंबर 2024 की अवधि के दौरान 24 राज्यों में लगभग 30,000 किमी. राष्ट्रीय राजमार्गों को कवर किया गया है।
  • दृष्टिकोण: यह राजमार्ग गलियारों के साथ क्लोरोफील सामग्री का पता लगाने के लिए उच्च-रिजॉल्यूशन उपग्रह सेंसर का उपयोग करता है। इससे सड़क के दोनों ओर राइट ऑफ वे के भीतर वनस्पतियों का अनुमान लगाया जा सकता है।
    • इसमें ISRO के Resourcesat-2/2A (LISS-IV) उपग्रह से प्राप्त 5 मीटर रिजॉल्यूशन मल्टीस्पेक्ट्रल डेटा का उपयोग किया जाता है।

महत्त्व

  • वानस्पतिक आवरण का मापन: उपग्रह आधारित आकलन के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ वनस्पतियों के आवरण मापने के लिए एक आधार रेखा स्थापित करता है।
  • वार्षिक परिवर्तन की निगरानी: आगामी वार्षिक चक्र समान राजमार्ग खंडों के साथ वर्ष-दर-वर्ष परिवर्तनों को ट्रैक करेंगे, जिससे समय के साथ सड़क किनारे की वनस्पतियों में सुधार की निगरानी संभव होगी।
  • हरित आवरण की तुलना: विभिन्न राजमार्ग खंडों के बीच हरित आवरण के आधार पर तुलना और रैंकिंग संभव होती है।
    • लागत और समय की दक्षता: उपग्रह डेटा का उपयोग बढ़ते राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ वनस्पतियों की निगरानी के लिए लागत-प्रभावी और समय-कुशल तरीका प्रदान करता है।

राइट ऑफ वे (RoW) क्या है?

  • यह वह कानूनी अधिकार या निर्धारित भूमि पट्टी है, जो किसी संस्था को ऐसी भूमि पर—जो किसी अन्य के स्वामित्व में हो—सड़क, पाइपलाइन या उपयोगिता लाइनों जैसे बुनियादी ढाँचे के निर्माण, उपयोग और रखरखाव की अनुमति देती है।

जुगनू

हाल ही में जूटैक्सा (Zootaxa) पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन ने भारत में जुगनुओं की पहली व्यापक सूची प्रस्तुत की है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • हालिया सूची में 27 वंशों (genera) के अंतर्गत 92 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। इनमें से 60% से अधिक प्रजातियाँ भारत में ही स्थानिक (Endemic) हैं।
  • पश्चिमी घाट में जुगनुओं की सर्वाधिक उपस्थिति पाई गई, इसके बाद पूर्वोत्तर भारत, गंगा के मैदानी क्षेत्र, तटीय क्षेत्र और दक्कन प्रायद्वीप का स्थान है।
  • हिमालय और ट्रांस-हिमालय क्षेत्रों में बहुत कम प्रजातियाँ पाई जाती हैं। मरुस्थलीय और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में उपयुक्त आवास की कमी के कारण लगभग कोई उपस्थिति दर्ज नहीं की गई है।

जुगनुओं के बारे में

  • जुगनू कोलियोप्टेरा (Coleoptera) गण के अंतर्गत लैम्पिरिडी (Lampyridae) परिवार के भृंग/बीटल (Beetle) हैं।
  • ये जैवप्रकाशित कीट हैं, जिन्हें आमतौर पर लाइटनिंग बग के नाम से जाना जाता है।  ये अपने पेट के विशेष अंगों में रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से प्रकाश उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • जैवदीप्ति (Bioluminescence): जुगनू ल्यूसिफेरिन, ल्यूसिफरेज एंजाइम, ऑक्सीजन और एटीपी के बीच अभिक्रिया के कारण प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, जिससे एक विशिष्ट चमक उत्पन्न होती है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से संचार और प्रजनन के लिए किया जाता है।
    • कोमल शरीर वाले भृंग: कई भृंगों के विपरीत, जुगनुओं का शरीर कोमल और आकार लंबा होता है, साथ ही उनके पंखों पर विशिष्ट आवरण (एलीट्रा) होते हैं।
    • रात्रिचर व्यवहार: अधिकांश प्रजातियाँ रात में सक्रिय होती हैं और साथी को आकर्षित करने और अन्य जीवों से संवाद करने के लिए चमकीली रोशनी का उपयोग करती हैं।

पारिस्थितिकी भूमिका

  • जुगनू घोंघे, स्लग और अन्य छोटे अकशेरुकी जीवों के शिकारी होते हैं, जिससे कीट संख्या वृद्धि को नियंत्रित करने में सहायता प्राप्त होती है।
  • इनकी उपस्थिति स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेतक मानी जाती है, क्योंकि ये आवास विनाश, प्रदूषण और कृत्रिम प्रकाश के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं।

क्षुद्रग्रह 2024 YR4

नासा ने आधिकारिक रूप से यह संभावना खारिज कर दी है कि क्षुद्रग्रह 2024 YR4, 22 दिसंबर, 2032 को चंद्रमा से टकराएगा।

संबंधित तथ्य

  • नासा ने जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन की सहायता से अवलोकन किया और पाया कि यह क्षुद्रग्रह चंद्रमा के पास से लगभग 21,200 किलोमीटर की सुरक्षित दूरी से गुजर जाएगा।

क्षुद्रग्रह 2024 YR4 के बारे में

  • परिचय: क्षुद्रग्रह 2024 YR4 लगभग 65 मीटर चौड़ा एक नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट है, जिसकी खोज वर्ष 2024 के अंत में की गई थी।

नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट क्या होती हैं?

  • परिभाषा: नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट वे धूमकेतु और क्षुद्रग्रह होते हैं, जिन्हें निकटवर्ती ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण ऐसी कक्षाओं में धकेल दिया जाता है, जिनसे वे पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।
  • निगरानी: नासा का ग्रहीय रक्षा समन्वय कार्यालय इन नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट ओं की खोज और निगरानी करता है।
  • इस कार्य का संचालन मुख्यतः नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला में स्थित नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडी सेंटर के माध्यम से किया जाता है।

जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन के बारे में

  • परिचय: यह नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी का संयुक्त मिशन है तथा यह एक प्रमुख अवरक्त अंतरिक्ष वेधशाला है, जिसे 25 दिसंबर, 2021 को प्रक्षेपित किया गया था।
  • स्थान: यह द्वितीय लैग्रेंज बिंदु (L2) के चारों ओर वृत्ताकार प्रभामंडलीय कक्षा में कार्य करती है।
  • मिशन और उद्देश्य: इसका उद्देश्य प्रारंभिक ब्रह्मांड का अध्ययन, आकाशगंगाओं का निर्माण, तारों का जन्म तथा सौरमंडल के बाहर स्थित ग्रहों के वायुमंडल का अवलोकन करना है।

पक्षी सर्वेक्षण

 

 

साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार किए गए व्यापक पक्षी सर्वेक्षण में 192 पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जिनमें दुर्लभ प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं।

सर्वेक्षण के बारे में

  • आयोजक: यह सर्वेक्षण केरल वन विभाग और मालाबार प्राकृतिक इतिहास सोसायटी (MNHS) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।
  • क्षेत्र कवरेज: सर्वेक्षण में साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र और बफर क्षेत्र दोनों को शामिल किया गया।
  • इसमें पूचिपारा, कूंबन, सिसपारा, मीनभानी और वालक्कड जैसे कठिन उच्च-ऊँचाई वाले क्षेत्रों को भी सम्मिलित किया गया।
  • भागीदारी: इस सर्वेक्षण में केरल और तमिलनाडु से लगभग 85 पक्षी निरीक्षकों ने भाग लिया।

मुख्य निष्कर्ष

  • पक्षी विविधता: सर्वेक्षण में कुल 192 पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध पक्षी विविधता को दर्शाती हैं।
  • दुर्लभ प्रवासी पक्षी: सर्वेक्षण में कुछ दुर्लभ प्रवासी पक्षी भी दर्ज किए गए, जैसे- एशियाई हाउस मार्टिन, पश्चिमी हाउस मार्टिन।
  • पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजातियाँ: अनुसंधान दल ने पश्चिमी घाट में पाई जाने वाली 20 स्थानिक पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया, जिनमें प्रमुख हैं—
    • नीलगिरी लाफिंगथ्रश
    • ब्लैक-एंड-ऑरेंज फ्लाईकैचर
    • व्हाइट-बेलीड ट्रीपाई
    • नीलगिरी पिपिट
    • व्हाइट-बेलीड ब्लू फ्लाईकैचर
    • नीलगिरी शोलाकिली (नीलगिरी ब्लू रॉबिन)।
  • प्रजनन के प्रमाण: शोधकर्ताओं ने लगभग 11 पक्षी प्रजातियों में प्रजनन के प्रमाण भी दर्ज किए। इनमें शामिल हैं—
    • श्रीलंका फ्रॉगमाउथ
    • इंडियन नाइटजार
    • ब्रॉन्जड ड्रोंगो
    • मालाबार ट्रोगन
    • क्रिमसन-बैक्ड सनबर्ड
    • पर्पल-रम्प्ड सनबर्ड
    • मालाबार ग्रे हॉर्नबिल
    • मालाबार इंपीरियल पिजन
  • शिकारी पक्षी: सर्वेक्षण में शिकारी पक्षियों की समृद्ध विविधता दर्ज की गई, जिनमें उल्लू और नाइटजार जैसे पक्षी भी शामिल हैं।
    • महत्त्व: दिन में सक्रिय तथा रात में सक्रिय दोनों प्रकार के शिकारी पक्षियों की उपस्थिति यह संकेत देती है कि वहाँ का वन पारितंत्र उचित तरह संरक्षित है तथा खाद्य शृंखला स्वस्थ और संतुलित है।

साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान के बारे में

  • स्थान: साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान केरल के पलक्कड़ जिले में नीलगिरी पर्वतमाला के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर स्थित है।
  • यह उद्यान नीलगिरी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का मुख्य भाग है, जिसे वर्ष 2012 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई थी।
  • इस उद्यान की प्रमुख पारिस्थितिक जीवनरेखा कुंथिपुझा नदी है, जो यहाँ की जैव विविधता को पोषित करती है।
  • वनस्पतियाँ
    • पश्चिमी तट के उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
    • दक्षिणी उपोष्णकटिबंधीय चौड़ी पत्ती वाले पर्वतीय वन
    • पर्वतीय आर्द्र समशीतोष्ण वन
    • घास के मैदान
  • वनस्पति संपदा: यह उद्यान उच्च औषधीय महत्त्व वाले पौधों तथा ऊँचे क्यूलेनिया वृक्षों की उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध है।
  • जीव-जंतु: लायन-टेल्ड मकॉक, नीलगिरी लंगूर, मालाबार विशाल गिलहरी, भारतीय हाथी, बाघ, तेंदुआ और गौर (भारतीय बाइसन)।

लेबनान 

दक्षिणी लेबनान में ब्लू लाइन के आसपास इजरायल–हिजबुल्लाह के मध्य बढ़ते तनाव के बीच भारत सहित 29 देशों ने UNIFIL शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

  • संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के बारे में: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वर्ष 1978 में UNIFIL की स्थापना की थी। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं- दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेनाओं की वापसी की पुष्टि करना, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बहाल करना तथा लेबनान सरकार को उस क्षेत्र में अपना अधिकार पुनः स्थापित करने में सहायता करना।

लेबनान के बारे में

  • परिचय: लेबनान पश्चिम एशिया का एक छोटा देश है। इसकी राजधानी बेरूत है, जो देश का सबसे बड़ा शहर तथा प्रमुख वाणिज्यिक और बंदरगाह केंद्र भी है।
  • स्थान: यह भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित है और उत्तरी तथा पूर्वी गोलार्द्ध में आता है।
  • सीमाएँ: उत्तर और पूर्व: सीरिया, दक्षिण: इजरायल तथा पश्चिम: भूमध्य सागर।
    • ब्लू लाइन एक सीमांकन रेखा है, जो लेबनान को इजरायल और गोलान हाइट्स से अलग करती है।
  • भौतिक क्षेत्र: लेबनान की भौगोलिक संरचना चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित है-
    • भूमध्यसागरीय तटीय मैदान, लेबनान पर्वतमाला, बेका घाटी तथा एंटी-लेबनान पर्वतमाला।
  • पर्वत: लेबनान पर्वतमाला लगभग 160 किलोमीटर तक विस्तृत है। इसमें कई हिमाच्छादित चोटियाँ हैं। कुर्नत अस-सौदा (3,087 मीटर) देश की सबसे ऊँची चोटी है।
  • घाटी: उपजाऊ बेका घाटी लेबनान और एंटी-लेबनान पर्वतमालाओं के मध्य स्थित है और यह पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट प्रणाली का हिस्सा है।
  • नदियाँ और जल स्रोत: पर्वतों से कई छोटी नदियाँ निकलती हैं। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण लितानी नदी है, जो बेका घाटी की सिंचाई करती है।
  • जलवायु: लेबनान में भूमध्यसागरीय जलवायु पाई जाती है, जिसमें गर्म और शुष्क ग्रीष्म ऋतु तथा मृदु एवं आर्द्र शीत ऋतु भी सम्मिलित है। पर्वतीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान हिमपात भी होता है।
  • वनस्पतियाँ: यह देश ऐतिहासिक रूप से भूमध्यसागरीय वनों के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहाँ पाया जाने वाला लेबनान का देवदार (Cedar of Lebanon) देश का राष्ट्रीय प्रतीक है।

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.