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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal April 02, 2026 03:15 47 0

अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत  (NGOPV)

भारत ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में पहली अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत “शाची” का शुभारंभ किया, जो स्वदेशी नौसैनिक जहाज निर्माण में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

यार्ड 1280 (शाची) के बारे में

  • शाची अगली पीढ़ी की अपतटीय गश्ती पोत श्रेणी का प्रमुख पोत है, जिसे भारत की समुद्री सुरक्षा को बहु-आयामी और बहुउद्देश्यीय क्षमताओं के माध्यम से सुदृढ़ करने के लिए डिजाइन किया गया है।
    • अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत: ये उन्नत स्वदेशी पोत हैं, जिनका उद्देश्य भारत के समुद्री क्षेत्र में निगरानी, सुरक्षा और संचालन क्षमता को मजबूत करना है।
  • निर्माण: गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा।
  • बहुउद्देश्यीय क्षमता: ये पोत निगरानी, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, खोज एवं बचाव कार्य तथा अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा जैसे विभिन्न कार्य कर सकते हैं।
  • प्रतीकात्मक पहचान: इसके चिह्न में सप्तऋषि तारामंडल और एक प्रकाशस्तंभ दर्शाया गया है, जो समुद्र में सतर्कता और मार्गदर्शन का प्रतीक है।

महत्त्व

  • आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: यह परियोजना “आत्मनिर्भर भारत” पहल के अंतर्गत रक्षा निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती है।
  • समुद्री सुरक्षा: यह समुद्री मार्गों, तटीय क्षेत्रों और अपतटीय अवसंरचना की सुरक्षा क्षमता को बढ़ाती है।
  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत: ये पोत प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत और सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं।
  • रणनीतिक क्षमता: यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और परिचालन तत्परता को सुदृढ़ करता है।

न्याय सेतु एआई चैटबॉट 

न्याय सेतु एआई चैटबॉट और इसका शुभंकर “दिशिका” विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा संचालित DISHA कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए, जिनका उद्देश्य न्याय तक पहुँच को सुलभ बनाना है।

न्याय सेतु एआई चैटबॉट के बारे में

  • न्याय सेतु एक वॉइस-आधारित, कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित विधिक चैटबॉट है, जिसका उद्देश्य न्याय तक पहुँच को सरल बनाना है।
  • उद्देश्य: विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित समुदायों के लिए न्याय तक पहुँच का लोकतंत्रीकरण करना।
  • नोडल एजेंसी: न्याय विभाग।
  • बहुभाषीय सुविधा: यह विभिन्न भाषाओं में सहायता प्रदान करता है ताकि नागरिक अपनी भाषा में विधिक अधिकारों और प्रक्रियाओं को समझ सकें।
  • प्रौद्योगिकी: डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग द्वारा विकसित, यह स्वचालित वाणी पहचान, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण तथा संवादात्मक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित है।
  • विधिक समन्वय: यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अनुरूप है, जिससे सटीक और जिम्मेदार विधिक मार्गदर्शन सुनिश्चित होता है।
  • “दिशिका” शुभंकर: यह उपयोगकर्ताओं को उनके विधिक प्रश्नों के समाधान में मार्गदर्शन देकर उपयोग को सरल बनाता है।

भाषिणी (BHASHINI) के बारे में

  • भाषिणी भारत का कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित भाषा प्रौद्योगिकी मंच है, जिसका उद्देश्य नागरिकों के लिए बहुभाषीय डिजिटल पहुँच सुनिश्चित करना है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग।
  • उद्देश्य: डिजिटल सेवाओं में भाषा संबंधी बाधाओं को समाप्त करना और भारतीय भाषाओं में पहुँच को बढ़ावा देना।
  • प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ: यह स्वचालित वाणी पहचान, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुवाद प्रणाली का उपयोग करता है।

समग्र न्याय तक पहुँच हेतु नवाचारी समाधान (DISHA) कार्यक्रम

  • DISHA कार्यक्रम न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय की एक पहल है, जिसका उद्देश्य विधिक जागरूकता और न्याय तक पहुँच को सुदृढ़ करना है।
  • यह डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नवाचारों को प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करता है, ताकि विधिक सेवाएँ अधिक सुलभ और नागरिक-हितैषी बन सकें।
  • प्रमुख पहलें: टेली-लॉ, न्याय बंधु (निःशुल्क विधिक सेवा) तथा विधिक साक्षरता और जागरूकता कार्यक्रम।

अभ्यास द्वीप शक्ति

अभ्यास “द्वीप शक्ति”, जो भारत की सशस्त्र सेनाओं के बीच संयुक्तता और बहु-आयामी संचालन पर बल देता है, अंडमान और निकोबार कमान के अंतर्गत आयोजित किया गया।

अभ्यास द्वीप शक्ति के बारे में

  • अभ्यास का स्वरूप: यह एक त्रि-सेवा सैन्य अभ्यास है, जिसे भारतीय सशस्त्र सेनाओं द्वारा संयुक्त अभियानों को सुदृढ़ करने के लिए आयोजित किया जाता है।
  • स्थान: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह क्षेत्र में आयोजित।
  • उद्देश्य: तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों की सुरक्षा हेतु त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना।
  • प्रतिभागी बल: इसमें भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना द्वारा समन्वित संचालन किया जाता है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: इसमें उभयचर आक्रमण, समुद्री प्रभुत्व संचालन तथा समुद्र तट पर उतरने के अभ्यास शामिल होते हैं, जो वास्तविक युद्ध परिस्थितियों का अनुकरण करते हैं।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह अभ्यास भारत की समुद्री हितों और द्वीपीय क्षेत्रों की सुरक्षा हेतु उसकी परिचालन तत्परता और क्षमता को प्रदर्शित करता है।

सम्राट संप्रति संग्रहालय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महावीर जयंती के अवसर पर कोबा तीर्थ में सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन किया, जो जैन विरासत और दर्शन को प्रदर्शित करता है।

सम्राट संप्रति संग्रहालय के बारे में

  • यह संग्रहालय जैन धर्म की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और दार्शनिक विरासत को संरक्षित और प्रदर्शित करने वाला एक समर्पित सांस्कृतिक केंद्र है।
  • स्थान: यह गुजरात के गांधीनगर स्थित कोबा तीर्थ में महावीर जैन आराधना केंद्र परिसर के भीतर अवस्थित है।
  • विषयगत संरचना: इसमें सात विषयगत दीर्घाएँ हैं, जो जैन दर्शन, परंपराओं और सांस्कृतिक विकास की कालानुक्रमिक यात्रा प्रस्तुत करती हैं।
  • कलाकृतियों का संग्रह: यहाँ 2,000 से अधिक दुर्लभ वस्तुएँ प्रदर्शित हैं, जिनमें पत्थर और धातु की मूर्तियाँ, पांडुलिपियाँ, लघु चित्रकला, यंत्र, सिक्के और रजत रथ शामिल हैं।
  • आधुनिक समेकन: संग्रहालय में पारंपरिक प्रदर्शनों के साथ डिजिटल और श्रव्य-दृश्य तकनीकों का समावेश किया गया है, जिससे आगंतुकों और शोधकर्ताओं को एक सजीव अनुभव प्राप्त होता है।

सम्राट संप्रति के बारे में

  • सम्राट संप्रति मौर्य वंश के शासक और अशोक के पौत्र थे, जिन्हें जैन धर्म के प्रमुख संरक्षक के रूप में जाना जाता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: उन्होंने लगभग 224–215 ईसा पूर्व के मध्य शासन किया और जैन धर्म के प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • जैन धर्म का प्रचार: उन्होंने अहिंसा और जैन नैतिक सिद्धांतों के प्रसार को राजकीय संरक्षण प्रदान किया।
  • प्रमुख योगदान: उन्होंने विशेष रूप से गुजरात और राजस्थान में अनेक जैन मंदिरों और स्तूपों का निर्माण कराया, साधुओं का समर्थन किया तथा सत्य, अस्तेय एवं अपरिग्रह जैसे मूल्यों को बढ़ावा दिया।
  • विरासत: सम्राट संप्रति को ऐसे शासक के रूप में स्मरण किया जाता है, जिन्होंने शासन और आध्यात्मिक दर्शन के बीच सेतु स्थापित कर जैन धर्म को जीवन पद्धति के रूप में आगे बढ़ाया।

INS दुनागिरी

INS दुनागिरी नीलगिरि श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का पाँचवाँ स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे बदलती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने हेतु एक बहु-भूमिका मंच के रूप में विकसित किया गया है।

INS दुनागिरी के बारे में

  • INS दुनागिरी नीलगिरि श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का पाँचवाँ स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे बदलती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने हेतु एक बहु-भूमिका मंच के रूप में विकसित किया गया है।
  • विकास एवं निर्माण: इसका डिजाइन युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है और इसका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा किया गया है, जो स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • उन्नत प्रणोदन प्रणाली: यह संयोजित डीजल या गैस प्रणाली पर आधारित है, जिसमें डीजल इंजन और गैस टरबाइन नियंत्रित पिच प्रोपेलर को संचालित करते हैं, जिससे बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होता है।
    • आधुनिक हथियार प्रणाली: इसमें ब्रह्मोस सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, MRSAM वायु रक्षा प्रणाली, MF-STAR रडार तथा 76 मिमी नौसैनिक तोप शामिल हैं, जो बहुआयामी युद्ध क्षमता प्रदान करते हैं।
    • उन्नत युद्ध क्षमता: इसमें स्टील्थ डिजाइन, स्वचालन, एकीकृत मंच प्रबंधन प्रणाली तथा पनडुब्बी रोधी प्रणाली (टॉरपीडो और रॉकेट सहित) शामिल हैं।
  • महत्त्व
    • आत्मनिर्भर भारत: लगभग 75% स्वदेशी सामग्री के साथ यह परियोजना रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करती है।
    • समुद्री शक्ति में वृद्धि: यह हिंद महासागर क्षेत्र में पारंपरिक और असममित खतरों से निपटने की भारत की क्षमता को बढ़ाती है।
    • आर्थिक प्रभाव: इस परियोजना में 200 से अधिक उद्योगों की भागीदारी है, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा मिलता है तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन होता है।

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