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संक्षिप्त समाचार

Lokesh Pal April 04, 2026 03:00 23 0

अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड

हाल ही में भारत सरकार द्वारा “अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड” कार्यान्वित किया गया है, जिसके तहत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप्स में निवेश वित्तीय वर्ष 2027 से प्रारंभ होने की अपेक्षा है।

अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड के बारे में

  • यह सेबी-पंजीकृत श्रेणी-2 वैकल्पिक निवेश कोष है, जिसे एक सीमित-अवधि कोष के रूप में स्थापित किया गया है, ताकि भारत के उभरते अंतरिक्ष स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन दिया जा सके।
  • उद्देश्य: अंतरिक्ष क्षेत्र की कंपनियों को विभिन्न विकास चरणों में पूँजी उपलब्ध कराना तथा स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण और विस्तार को बढ़ावा देना।
  • वित्तीय प्रावधान: इसका कुल कोष लगभग 1,005 करोड़ रुपये है, जिसका उपयोग निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार और विकास के लिए किया जाएगा।
  • नोडल निकाय: भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) प्रमुख संस्थागत निवेशक के रूप में कार्य करता है, जो अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत आता है।
  • वित्तपोषण तंत्र: इसका प्रबंधन सिडबी वेंचर कैपिटल लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जो तकनीकी तत्परता स्तर (TRL) 4 या उससे अधिक वाले भारतीय अंतरिक्ष स्टार्ट-अप्स में निवेश करता है तथा उचित परीक्षण सहायता प्रदान करता है।
  • महत्त्व: यह कोष निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुदृढ़ करता है, नवाचार को प्रोत्साहित करता है, विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करता है तथा भारत को वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रतिस्पर्द्धी के रूप में स्थापित करता है।

आईएनएस तारागिरी

हाल ही में प्रोजेक्ट 17ए के अंतर्गत निर्मित स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किया गया, जिससे भारत की नौसैनिक क्षमता में बढोतरी हुई है।

आईएनएस तारागिरी के बारे में

  • आईएनएस तारागिरी भारतीय नौसेना की नीलगिरि श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का चौथा स्टेल्थ निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट है।
  • विकास: इसका निर्माण मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है और इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
  • विरासत: यह भारतीय नौसेना की पूर्व लिएंडर श्रेणी की तारागिरी फ्रिगेट का आधुनिक रूप है।

विशेषताएँ

  • श्रेणी एवं भूमिका: यह एक बहु-भूमिका स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो वायु, स्थल और पनडुब्बी विरोधी युद्ध में सक्षम है।
  • स्वदेशीकरण: लगभग 75% स्वदेशी सामग्री के साथ यह रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
  • हथियार एवं सेंसर: इसमें ब्रह्मोस मिसाइल, मध्यम दूरी वायु रक्षा प्रणाली, बहु-कार्यात्मक रडार, सोनार, टॉरपीडो तथा उन्नत रडार प्रणाली शामिल हैं, जो व्यापक युद्ध क्षमता प्रदान करते हैं।
  • प्रणोदन एवं गति: यह संयोजित डीजल या गैस प्रणाली पर आधारित है, जिससे कुशल संचालन और लगभग 30 नॉट तक की गति संभव है।
  • विमानन क्षमता: यह कामोव और एमएच-60आर जैसे हेलीकॉप्टरों का संचालन कर सकता है, जो निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में सहायक हैं।
  • स्टील्थ क्षमता: उन्नत डिजाइन इसके रडार, ध्वनि और तापीय संकेतों को कम करता है, जिससे यह लंबे समय तक तैनाती में सक्षम है।

महत्त्व

  • नौसैनिक शक्ति में वृद्धि: यह उच्च अग्निशक्ति के साथ भारत की गहरे समुद्र में संचालन क्षमता को सुदृढ़ करता है।
  • आत्मनिर्भर भारत: यह स्वदेशी रक्षा निर्माण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
  • रणनीतिक प्रत्यास्थता: यह विमानवाहक समूहों का समर्थन, स्वतंत्र अभियान और मानवीय सहायता कार्यों में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

हेल्थ इनोवेशन एक्सेलेरेशन हैकाथॉन (Health Innovation Acceleration Hackathon)

हाल ही में इंडियाएआई (IndiaAI) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने हेल्थ इनोवेशन एक्सेलेरेशन हैकाथॉन शुरू किया, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में नियामकीय दक्षता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान विकसित करना है।

हेल्थ इनोवेशन एक्सेलेरेशन हैकाथॉन के बारे में

  • परिचय: यह एक राष्ट्रीय स्तर की पहल है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उनकी दक्षता ब ढ़ाने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान विकसित करना है।
  • आयोजक: डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के अंतर्गत एंडियाएआई और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित।
  • उद्देश्य: स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को बढ़ावा देना, स्वचालन को सक्षम बनाना, डेटा गोपनीयता में सुधार करना तथा अनुमोदन प्रक्रियाओं को तीव्र करना।
  • चरण
    • चरण 1: प्रतिभागी डेटा गोपनीयता, दस्तावेज संक्षेपण, त्रुटि पहचान, वर्गीकरण तथा असंरचित डेटा से स्वचालित रिपोर्ट निर्माण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरण विकसित करेंगे।
    • चरण 2: चयनित टीमें केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के आँकड़ों का उपयोग कर अपने मॉडल को परिष्कृत करेंगी तथा समाधान को सुगम और चिकित्सा उपकरण ऑनलाइन पोर्टलों के साथ एकीकृत करेंगी ताकि नियामकीय प्रक्रिया तेज हो सके।

पुरस्कार और प्रोत्साहन

  • मुख्य पुरस्कार: विजेता टीम को 10 लाख रुपये तक का पुरस्कार तथा समाधान के क्रियान्वयन हेतु एक वर्ष का संभावित अनुबंध (50 लाख रुपये तक) दिया जाएगा।
  • अन्य पुरस्कार: द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए क्रमशः 7 लाख और 3 लाख रुपये तक के पुरस्कार।
  • विशेष प्रोत्साहन: सभी महिला टीम के लिए 5 लाख रुपये तक का विशेष पुरस्कार, जिससे समावेशिता को बढ़ावा मिले।
  • अतिरिक्त अवसर: शीर्ष 10 टीमों को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन में 5-दिवसीय कार्य स्थल पर विकास कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

महत्त्व: यह पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नियामकीय दक्षता को बढ़ाती है, डेटा गोपनीयता को सुदृढ़ करती है, दवा अनुमोदन प्रक्रिया को तीव्र करती है तथा डिजिटल इंडिया के तहत भारत के स्वास्थ्य तंत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करती है।

संपन्न (SAMPANN) मंच 

भारत सरकार ने डिजिटल पेंशन प्रबंधन के लिए संपन्न (SAMPANN) मंच को गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट प्राधिकरण तक विस्तारित करने हेतु समझौते किए हैं।

संपन्न के बारे में

  • SAMPANN (पेंशन लेखांकन एवं प्रबंधन प्रणाली) एक समग्र डिजिटल मंच है, जो पेंशन प्रशासन की संपूर्ण प्रक्रिया को एकीकृत रूप से संचालित करता है।
  • विकास: दूरसंचार विभाग के अंतर्गत संचार लेखा महानियंत्रक कार्यालय द्वारा विकसित और संचालित।
  • प्रारंभ: इसे वर्ष 2018 में डिजिटल इंडिया पहल के हिस्से के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया गया था।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • समग्र कार्यप्रणाली: यह पेंशन की स्वीकृति, प्राधिकरण, वितरण और लेखांकन तक की पूरी प्रक्रिया को एक ही मंच पर संचालित करता है।
    • क्लाउड आधारित मंच: यह एक सुरक्षित और विस्तार योग्य डिजिटल अवसंरचना के रूप में कार्य करता है, जिससे कागजरहित और सुगम प्रशासन संभव होता है।
    • वित्तीय स्तर: यह प्रतिमाह लगभग 1,650 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित करता है तथा कुल वितरण 72,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
    • नए उपयोगकर्ता: अब इस मंच का उपयोग गोवा सरकार और कोचीन पोर्ट प्राधिकरण द्वारा भी किया जाएगा।
    • सेवा के रूप में मंच: इसे अन्य संस्थानों के लिए पुनः उपयोग योग्य डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

महत्त्व

  • नागरिक केंद्रित शासन: यह लाभार्थियों को सीधे पेंशन सेवाएँ प्रदान कर पहुँच को सरल बनाता है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: सफल सरकारी मंचों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देकर दक्षता और पारदर्शिता में वृद्धि करता है।
  • प्रशासनिक दक्षता: पेंशन प्रक्रिया में विलंब, कागजी कार्यवाही और मानवीय हस्तक्षेप को कम करता है।

राजा रवि वर्मा की ‘माँ यशोदा और श्री कृष्ण भगवान’ की पेंटिंग

हाल ही में राजा रवि वर्मा की ‘माँ यशोदा और श्री कृष्ण भगवान’ की पेंटिंग ₹167 करोड़ में बिकी, जो किसी भारतीय चित्रकला के लिए अब तक की सबसे अधिक कीमत है।

  • इसने एम.एफ. हुसैन की ‘अनटाइटल्ड (ग्राम यात्रा)’ द्वारा स्थापित ₹118 करोड़ के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

‘माँ यशोदा और श्रीकृष्ण भगवान’ की पेंटिंग के बारे में

  • थीम: यह चित्र माँ यशोदा और बाल कृष्ण के मध्य मातृ प्रेम को दर्शाता है, जिसमें दिव्यता और मानवीय भावनाओं का सुंदर समन्वय है।
  • कथात्मक दृश्य: इसमें एक दैनिक जीवन का दृश्य प्रस्तुत किया गया है, जहाँ माँ यशोदा कार्य में व्यस्त हैं और कृष्ण चंचलतापूर्वक   दूध के पात्र की ओर हाथ बढ़ा रहे हैं।
  • कलात्मक शैली: यह चित्र भारतीय पौराणिक विषयों को यूरोपीय यथार्थवाद के साथ जोड़ता है, जिसमें तेल चित्रण तकनीक, परिप्रेक्ष्य और जीवंत आकृतियों का प्रयोग किया गया है।

राजा रवि वर्मा के बारे में

  • राजा रवि वर्मा 19वीं शताब्दी के केरल के प्रसिद्ध चित्रकार थे, जिन्हें आधुनिक भारतीय कला का अग्रदूत माना जाता है।
  • कलात्मक शैली: उन्होंने भारतीय पौराणिक विषयों को यूरोपीय अकादमिक यथार्थवाद के साथ संयोजित किया।
  • प्रसिद्ध कृतियाँ: उनकी प्रमुख कृतियों में शकुंतला, दमयंती तथा लक्ष्मी और सरस्वती जी जैसे देवी-देवताओं के चित्र शामिल हैं।
  • ओलियोग्राफ प्रेस: उन्होंने अपनी कला को जनसामान्य तक पहुँचाने के लिए मुद्रण प्रेस स्थापित की, जिससे धार्मिक चित्र व्यापक रूप से प्रसारित हुए।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं की लोकप्रिय छवियों को मानकीकृत किया, जो आज भी कैलेंडर और पोस्टरों में दिखाई देती हैं।
  • सम्मान: उनकी कला उपलब्धियों के लिए त्रावणकोर रियासत द्वारा उन्हें “राजा” की उपाधि प्रदान की गई।

विशेष आर्थिक क्षेत्र रियायतें

सरकार ने वैश्विक व्यापार व्यवधानों को कम करने और विनिर्माण प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र इकाइयों को अनुकूल शर्तों पर घरेलू बिक्री की एकमुश्त राहत प्रदान करने की घोषणा की है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए प्रमुख रियायतें

  • रियायती घरेलू बिक्री: पात्र इकाइयाँ घरेलू शुल्क क्षेत्र में कम सीमा शुल्क दरों पर वस्तुओं की बिक्री कर सकेंगी, जिससे लागत पर दबाव कम होगा।
  • पात्रता मानदंड: 31 मार्च, 2025 से पहले संचालित इकाइयाँ, जिनमें कम-से-कम 20% मूल्य संवर्द्धन हो, इस योजना के लिए पात्र होंगी।
  • बिक्री सीमा: घरेलू बिक्री को पिछले तीन वर्षों के उच्चतम निर्यात मूल्य के 30% तक सीमित रखा गया है, ताकि निर्यात-उन्मुख प्रकृति बनी रहे।
  • समयबद्ध राहत: यह योजना 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक लागू रहेगी, जो एक अस्थायी समर्थन उपाय है।

संभावित प्रभाव

  • उद्योग को समर्थन: वैश्विक माँग में कमी और आपूर्ति शृंखला बाधाओं का सामना कर रहे विशेष आर्थिक क्षेत्र विनिर्माताओं को राहत मिलेगी।
  • घरेलू आपूर्ति में वृद्धि: घरेलू बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ेगी, साथ ही घरेलू उत्पादकों के साथ संतुलित प्रतिस्पर्द्धा बनी रहेगी।
  • व्यापार सुगमता: आभासी (Faceless) मूल्यांकन और स्वचालित प्रणालियों से दक्षता बढ़ेगी और प्रक्रियात्मक विलंब कम होंगे।

विशेष आर्थिक क्षेत्र के बारे में

  • परिचय: विशेष आर्थिक क्षेत्र ऐसे निर्धारित शुल्क-मुक्त क्षेत्र होते हैं, जहाँ व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कर प्रोत्साहन, विश्वस्तरीय अवसंरचना और उदार नियम प्रदान किए जाते हैं।
  • भारत में प्रावधान: ये विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 के अंतर्गत संचालित होते हैं, जिनमें कर छूट, शुल्क-मुक्त आयात और एकल खिड़की स्वीकृति जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।
  • विशेष प्रावधान: अधिकृत गतिविधियों के लिए इन्हें सीमा शुल्क क्षेत्र से बाहर माना जाता है, सकारात्मक शुद्ध विदेशी मुद्रा अर्जन अनिवार्य होता है तथा सीमित घरेलू बिक्री शुल्क के साथ अनुमति दी जाती है।
  • महत्त्व: ये निर्यात को बढ़ावा देते हैं, विदेशी निवेश आकर्षित करते हैं, रोजगार सृजन करते हैं तथा भारत में औद्योगिक और अवसंरचनात्मक विकास को सुदृढ़ करते हैं।

NCERT एक डीम्ड विश्वविद्यालय के रूप में

शिक्षा मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को “मानित विश्वविद्यालय (Deemed University)” का दर्जा प्रदान किया है, जिससे इसे पाठ्यक्रम संचालित करने और डिग्री प्रदान करने का अधिकार प्राप्त हुआ है।

संबंधित तथ्य

  • यह निर्णय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्वीकृति के बाद लिया गया।
  • जनवरी 2026 में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को आयोग ने स्वीकार किया था।

‘मानित विश्वविद्यालय’ के बारे में

  • यह भारत में उच्च शिक्षा का ऐसा संस्थान होता है, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग उसकी उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान योगदान और समग्र प्रदर्शन के आधार पर मान्यता देता है।
  • यह दर्जा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 3 के अंतर्गत, आयोग की सिफारिश पर शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है।

दर्जे का दायरा

  • यह दर्जा निम्नलिखित पर लागू होगा:
    • राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद का मुख्यालय
    • इसके छह क्षेत्रीय संस्थान
  • यह दर्जा निर्धारित शर्तों के पालन के अधीन है।

प्रमुख शर्तें

  • व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध: एनसीईआरटी को व्यावसायिक या लाभ अर्जित करने वाली गतिविधियों में संलग्न होने की अनुमति नहीं होगी।
  • शैक्षणिक मानकों का अनुपालन: सभी कार्यक्रमों को निम्नलिखित का पालन करना होगा:
    • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मानदंड
    • संबंधित वैधानिक निकाय और परिषदें।
  • नए कार्यक्रमों का विनियमन: नए कार्यक्रम, जिनमें शामिल हैं:
    • कैंपस से बाहर और विदेशों में संचालित पाठ्यक्रम केवल यूजीसी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही प्रारंभ किए जाने चाहिए।

शैक्षणिक विस्तार जनादेश

  • अनुसंधान और डॉक्टरेट कार्यक्रम: एनसीईआरटी को निम्नलिखित कार्यक्रम आवश्यक है:
    • अनुसंधान कार्यक्रम शुरू करना
    • डॉक्टरेट (पीएचडी) कार्यक्रम प्रदान करना
    • नवीन शैक्षणिक पाठ्यक्रम विकसित करना।
  • शैक्षणिक क्षेत्रों का विविधीकरण: संस्थान को निम्नलिखित करना होगा:
    • उभरते क्षेत्रों से आगे विस्तार करना
    • कार्यक्रमों को निम्नलिखित के अनुरूप बनाना:
      • यूजीसी विनियम
      • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020।
  • मान्यता और गुणवत्ता आश्वासन: एनसीईआरटी को निम्नलिखित कार्य करना होगा:
    • राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA) से कार्यक्रमों को मान्यता प्राप्त कराना।
    • राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) से संस्थागत मान्यता प्राप्त करना।

रैंकिंग और डिजिटल एकीकरण

  • रैंकिंग में भागीदारी::
    • संस्थान के लिए राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाँचे (NIRF) में भाग लेना अनिवार्य होगा।
  • एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC): राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद को:
    • विद्यार्थियों के लिए एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स पहचान संख्या प्रदान करनी होगी।
    • विद्यार्थियों के क्रेडिट संबंधी आँकड़ों को डिजिटल लॉकर में अपलोड करना होगा।
    • क्रेडिट हस्तांतरण और निगरानी के लिए अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स पोर्टल से एकीकरण करना अनिवार्य होगा।

 

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