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अगली पीढ़ी के सिंक्रोट्रॉन का उद्घाटन

Lokesh Pal May 21, 2024 05:52 134 0

संदर्भ

चीन ने हाई एनर्जी फोटॉन सोर्स (High Energy Photon Source- HEPS) का उद्घाटन किया है, जो एशिया में पहला चौथी पीढ़ी का सिंक्रोट्रॉन लाइट सोर्स होगा।

संबंधित तथ्य

  • मौजूदा सिंक्रोट्रॉन: वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 70 सिंक्रोट्रॉन हैं, जो या तो परिचालन में हैं अथवा निर्माणाधीन हैं।
  • चौथी पीढ़ी का सुविधाएँ: चौथी पीढ़ी की सुविधाएँ एक्स-रे बीम उत्पन्न करने के लिए मल्टी-बेंड अक्रोमैट लैटिस (Multi-Bend Achromat Lattice) नामक मैग्नेट की एक शृंखला पर निर्भर करती हैं, जो सँकरी एवं चमकदार होती हैं। मौजूदा सुविधाओं में शामिल हैं:-
    • स्वीडन की MAX IV प्रयोगशाला
    • ब्राजील के कैंपिनास में सीरियस (Sirius)
    • ग्रेनोबल (फ्राँस) में यूरोपियन सिंक्रोट्रॉन रेडिएशन फसिलिटी का अत्यंत ब्राइट सोर्स।
    • लेमोंट, इलिनोइस में एडवांस फोटॉन सोर्स।

हाई एनर्जी फोटॉन सोर्स (HEPS) के बारे में

  • स्थान: यह बीजिंग से 50 किलोमीटर दूर हुआइरोउ (Huairou) में अवस्थित है।
  • बजट: यह 4.8 बिलियन युआन (US$665 मिलियन) की परियोजना है।
  • उद्देश्य: एक ऐसे प्रकाश स्रोत को प्रस्तुत करना जो साक्ष्यों में गहराई से प्रवेश करके रियल टाइम में उनकी आणविक एवं परमाणु संरचना के बारे में अवगत कराएगा।
  • दायरा: उपयोगकर्ता बायोमेडिसिन, ऊर्जा, उन्नत सामग्री एवं संघनित-पदार्थ भौतिकी सहित विषयों में प्रयोगों के लिए मौजूदा 14 बीमलाइनों में से चयन कर सकते हैं।
    • इसके अलावा, HEPS में 90 बीमलाइनों को समायोजित करने की उम्मीद है, जो आगे चलकर गणित को छोड़कर प्रत्येक वैज्ञानिक क्षेत्र को प्रभावित करेगी।
  • विशेषता
    • हार्ड एक्स किरणों का उत्पादन करना: HEPS 1.36 किलोमीटर की परिधि के साथ अपने स्टोरेज रिंग के अंदर 6 गीगाइलेक्ट्रॉन वोल्ट की ऊर्जा तक इलेक्ट्रॉनों को गति देगा, ताकि नैनोमीटर स्केल पर नमूनों को मापने के लिए उच्च-ऊर्जा, या हार्ड एक्स-रे का उत्पादन किया जा सके।
    • नैनो माप को सक्षम करना: इसका समय रिजॉल्यूशन तीसरी पीढ़ी के सिंक्रोट्रॉन द्वारा हासिल की गई तुलना में 10,000 गुना बेहतर होगा, जिससे शोधकर्ता मिलीसेकंड के बजाय सैकड़ों नैनोसेकंड में माप कर सकेंगे।
    • उच्च रिजॉल्यूशन इमेजिंग: HEPS की इलेक्ट्रॉन बीम दुनिया में सबसे संकीर्ण होगी, जो इसे विशेष रूप से तीव्र एक्स-रे बनाने की अनुमति देगा, जिससे शोधकर्ता विकिरण की समान मात्रा के साथ अपने नमूनों से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
      • यह पदार्थ के गुणों के बारे में वैज्ञानिकों की समझ को आगे बढ़ाएगा एवं नई सामग्रियों के विकास में मदद करेगा।
    • शीघ्र प्रयोग: HEPS शोधकर्ताओं को उन प्रयोगों को तेजी से निष्पादित करने की भी अनुमति देगा, जिन्हें पुरानी सुविधाओं पर पूरा करने में कई दिन लगेंगे।
      • उदाहरण: प्रोटीन की परमाणु संरचना निर्धारित करने के लिए, शोधकर्ताओं को इन अणुओं को शुद्ध करने एवं व्यवस्थित क्रिस्टल संरचनाओं में समेटने की आवश्यकता होती है, जिन्हें एक्स-रे के साथ देखा जा सकता है। पुराने सिंक्रोट्रॉन को बड़े नमूनों की आवश्यकता होती है, जिनका उत्पादन करना मुश्किल होता है, जिससे छोटे प्रोटीन क्रिस्टल का अध्ययन करना लगभग असंभव हो जाता है।

सिंक्रोट्रॉन लाइट (Synchrotron Light) क्या है?

  • सिंक्रोट्रॉन: यह एक प्रकार का गोलाकार कण त्वरक है, जो आवेशित कणों (इलेक्ट्रॉनों) को चुंबकों के अनुक्रम के माध्यम से तब तक गति देने का काम करता है, जब तक कि वे लगभग प्रकाश की गति तक नहीं पहुँच जाते।
  • सिंक्रोट्रॉन प्रकाश का निर्माण: ये तेज गति से चलने वाले उच्च ऊर्जा इलेक्ट्रॉन, सिंक्रोट्रॉन प्रकाश नामक मजबूत चुंबकीय क्षेत्रों के ‘सिंक्रोनाइज्ड’ अनुप्रयोग द्वारा बहुत उज्ज्वल प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
    • यह अत्यंत तीव्र प्रकाश, मुख्य रूप से एक्स-रे क्षेत्र में, पारंपरिक स्रोतों से उत्पन्न प्रकाश की तुलना में लाखों गुना अधिक चमकीला एवं सूर्य से 10 अरब गुना अधिक चमकीला है।
  • महत्त्व: इलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्पन्न तीव्र प्रकाश को फिर फिल्टर किया जाता है और प्रायोगिक कार्यस्थानों में ले जाने के लिए समायोजित किया जाता है, जहाँ इसका उपयोग परमाणुओं एवं अणुओं जैसे सूक्ष्म पदार्थों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। 
  • मूल
    • पहला सिंक्रोट्रॉन: इसे वर्ष 1946 में बनाया गया था एवं इसे उच्च ऊर्जा कणों के बीच टकराव का अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया था। उदाहरण: CERN में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर। 
    • पहला सिंक्रोट्रॉन प्रकाश प्रयोग: वर्ष 1956 में, संयुक्त राज्य अमेरिका के कॉर्नेल में एक पार्टिकल कोलाइडर से खींची गई सिंक्रोट्रॉन प्रकाश का उपयोग करके पहला प्रयोग किया गया था।
    • पहली समर्पित सुविधा: वर्ष 1980 में UK ने चेशायर के डेरेसबरी में प्रयोगों के लिए सिंक्रोट्रॉन लाइट के उत्पादन हेतु समर्पित दुनिया का पहला सिंक्रोट्रॉन बनाया।

प्रक्रिया

  • पहला चरण: सिंक्रोट्रॉन के केंद्र में इलेक्ट्रॉन गन द्वारा इलेक्ट्रॉन उत्पन्न होते हैं एवं रैखिक त्वरक (Linear Accelerator), या लाइनैक (Linac) द्वारा प्रकाश की गति के 99.9997% तक त्वरित होते हैं।
  • दूसरा चरण: फिर इलेक्ट्रॉनों को बूस्टर रिंग में स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ लगभग आधे सेकंड में, ऊर्जा में 100 MeV से 3,000 MeV (या 3 GeV) की वृद्धि की जाती है। फिर उन्हें बाहरी स्टोरेज रिंग में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
  • अंतिम चरण: इलेक्ट्रॉनों को सीधे खंडों द्वारा अलग किए गए चुंबकों की एक शृंखला द्वारा स्टोरेज रिंग के चारों ओर प्रसारित किया जाता है। जैसे ही इलेक्ट्रॉन चुंबकीय क्षेत्र से विक्षेपित होते हैं, विद्युत चुंबकीय विकिरण उत्पन्न होता है।
  • अंतिम सिंक्रोट्रॉन प्रकाश: प्रत्येक बेन्डिंग मैग्नेट पर सिंक्रोट्रॉन प्रकाश की एक किरणपुंज  उत्पन्न होती है एवं सिंक्रोट्रॉन द्वारा उत्पादित विद्युत चुंबकीय विकिरण इलेक्ट्रॉन की कक्षा की स्पर्श रेखा पर आगे की दिशा में एक संकीर्ण शंकु में उत्सर्जित होता है।
  • सिंक्रोट्रॉन प्रकाश के गुण
    • उच्च चमक: यह अत्यंत तीव्र है (पारंपरिक X-ray ट्यूबों की तुलना में सैकड़ों हजारों गुना अधिक तीव्र) एवं अत्यधिक संश्लेषित है।
    • व्यापक ऊर्जा स्पेक्ट्रम: इसे विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम (अवरक्त से लेकर दृश्य प्रकाश से लेकर एक्स-रे तक) की सीमा में उत्पन्न किया जा सकता है। 
    • ट्यून करने योग्य: किसी भी चयनित तरंग दैर्ध्य की तीव्र किरण प्राप्त करना संभव है।
    • अत्यधिक ध्रुवीकृत: सिंक्रोट्रॉन अत्यधिक ध्रुवीकृत विकिरण उत्सर्जित करता है, जो रैखिक, गोलाकार या अंडाकार हो सकता है।
    • बहुत छोटे कंपन: कंपन आम तौर पर एक नैनो-सेकंड (एक सेकंड का एक अरबवाँ हिस्सा) से भी कम समय में उत्सर्जित होते हैं, जिससे समय आधारित अध्ययन संभव हो पाता है।

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