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NGT ने ग्रेट निकोबार परियोजना को मंजूरी प्रदान की

Lokesh Pal February 18, 2026 03:17 4 0

संदर्भ

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की छह सदस्यीय विशेष पीठ ने ग्रेट निकोबार मेगा परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति को बरकरार रखा और हस्तक्षेप के लिए कोई वैध आधार नहीं पाया।

संबंधित तथ्य

  • रणनीतिक महत्त्व: अधिकरण ने स्वीकार किया कि परियोजना के रणनीतिक महत्त्व से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • चिंताओं का समाधान: अधिकरण इस बात से संतुष्ट था कि वर्ष 2023 में गठित उच्च-स्तरीय समिति द्वारा पहले उठाई गई चिंताओं का समाधान कर दिया गया है।

NGT का दृष्टिकोण

  • संतुलित दृष्टिकोण: इसने इस बात पर जोर दिया कि द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र की शर्तों का भी सम्मान किया जाना चाहिए और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
  • बंदरगाह क्षेत्रों के लिए CRZ अनुपालन: अधिकरण ने केंद्र सरकार की प्रस्तुति का उल्लेख किया कि CRZ 1A और 1B क्षेत्रों में आने वाले बंदरगाहों के हिस्सों को संशोधित मास्टर प्लान से बाहर रखा जाएगा।
  • प्रजाति संरक्षण की शर्तें: इसने उल्लेख किया कि लेदरबैक समुद्री टर्टल, निकोबार मेगापोड, खारे पानी का मगरमच्छ, रॉबर क्रेब, निकोबार मकॉक और ग्रेट निकोबार द्वीप की अन्य स्थानिक पक्षी प्रजातियों की रक्षा के लिए विशेष सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए गए हैं।
  • पर्यावरणीय स्वीकृति का अनुपालन: पर्यावरणीय स्वीकृति में दी गई शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि उनका उल्लंघन न हो।
  • तटीय संरक्षण: तटीय कटाव को रोकने और रेतीले समुद्र तटों की रक्षा के लिए, जो द्वीप हेतु महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल और प्राकृतिक अवरोध हैं।
  • प्रवाल भित्ति संरक्षण: भारतीय प्राणी सर्वेक्षण का हवाला देते हुए अधिकरण ने कहा कि परियोजना क्षेत्र में कोई प्रवाल भित्ति मौजूद नहीं है।
    • बिखरे हुए प्रवालों को स्थानांतरित किया जाएगा और मंत्रालय को तटीय प्रवाल भित्तियों के संरक्षण और वैज्ञानिक पुनर्जीवन को सुनिश्चित करना होगा।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड (ANIIDCO) के बारे में 

  • परिचय: अर्द्ध-सरकारी एजेंसी, जिसे वर्ष 1988 में कंपनी अधिनियम के तहत निगमित किया गया।
  • उद्देश्य: क्षेत्र के संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का विकास तथा वाणिज्यिक उपयोग करना।
  • परियोजना प्रवर्तक के रूप में नियुक्ति: ग्रेट निकोबार परियोजना के लिए जुलाई 2020 में अंडमान और निकोबार प्रशासन द्वारा नियुक्त किया गया।

ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के बारे में

  • विजन: ग्रेट निकोबार को लॉजिस्टिक्स, व्यापार और रक्षा केंद्र में बदलने के लिए एक बहु-घटक मेगा विकास परियोजना, जिससे हिंद महासागर में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और जनजातीय कल्याण अनुपालन के साथ, EIA अधिसूचना 2006 और शोंपेन नीति, 2015 के तहत स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु योजना बनाई गई है।
    • शोंपेन नीति 2015: यह अंडमान और निकोबार प्रशासन द्वारा स्थापित एक नियामक ढाँचा है, जिसका उद्देश्य ग्रेट निकोबार द्वीप पर बड़े पैमाने की विकास परियोजनाओं के दौरान स्वदेशी शोंपेन जनजाति के कल्याण और अधिकारों को प्राथमिकता देना है।
  • कार्यान्वयन प्राधिकरण: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड (ANIIDCO)।
  • चरणबद्ध समय-सीमा: वर्ष 2024 से निर्माण कार्य; वर्ष 2028 तक आंशिक संचालन, तथा वर्ष 2050 तक पूर्ण पैमाने पर विकास।
  • उच्च-स्तरीय समिति (HPC) की समीक्षा
    • पर्यावरणीय स्वीकृति को चुनौती दिए जाने के बाद, राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने वर्ष 2023 के आदेश के अनुसार, परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति की पुनः समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति (HPC) का गठन किया।

प्रमुख घटक

  • अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT): 14.2 मिलियन TEU की क्षमता के साथ, यह कोलंबो/सिंगापुर पर भारत की निर्भरता को कम करेगा और द्वीप को एक वैश्विक शिपिंग हब के रूप में स्थापित करेगा।
    • यह मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 का हिस्सा है, जो भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का समर्थन करता है।
  • ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: हवाई संपर्क में सुधार करेगा, पर्यटन को बढ़ावा देगा और आपात स्थिति में सैनिकों तथा आपूर्ति की त्वरित तैनाती को सक्षम बनाएगा।
  • 450 MVA गैस + सौर ऊर्जा संयंत्र: पारंपरिक और नवीकरणीय स्रोतों के मिश्रण से सतत् विकास के लिए निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
  • एकीकृत टाउनशिप: 16,610 हेक्टेयर में विस्तृत एक नियोजित टाउनशिप, जो निवासियों और श्रमिकों को आवास, बुनियादी ढाँचा और आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करेगी।
  • चरणबद्ध विकास: तीन चरणों (2025–47) में विभाजित, ताकि निवेश को विस्तारित किया जा सके, पारिस्थितिकी दबाव को कम किया जा सके और दो दशकों में अनुकूलनशील योजना बनाई जा सके।

अवस्थिति – ग्रेट निकोबार द्वीप (GNI)

  • बंगाल की खाड़ी में निकोबार द्वीप समूह का सबसे दक्षिणी द्वीप।
  • संरक्षित स्थल
    • ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिजर्व
    • कैंपबेल बे राष्ट्रीय उद्यान
    • गैलथिया राष्ट्रीय उद्यान।

परियोजना का महत्त्व

  • रणनीतिक स्थान: ग्रेट निकोबार मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जिससे होकर वैश्विक व्यापार का लगभग 30%–40% भाग, जिसमें चीन के तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा शामिल है, गुजरता है।
  • आर्थिक क्षमता: यह सागरमाला पहल का समर्थन करता है और भारत को सिंगापुर/हांगकांग जैसे क्षेत्रीय ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखता है।
  • अवसंरचना विकास: दूरस्थ क्षेत्र में संपर्क और बुनियादी ढाँचे में सुधार करता है।
  • सामरिक महत्त्व: पूर्वी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नौसैनिक और वायु संचालन क्षमता को बढ़ाता है।
  • क्षेत्रीय कूटनीति: बंगाल की खाड़ी और बिम्सटेक क्षेत्र में भारत को व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करता है। यह ट्रांसशिपमेंट के लिए विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।

परियोजना से जुड़ी चिंताएँ

  • पारिस्थितिकी चिंताएँ: ग्रेट निकोबार एक जैव-विविधता हॉटस्पॉट है (200 पक्षी प्रजातियाँ, स्थानिक वनस्पति, प्रवाल भित्तियाँ)।
    • गैलथिया बे: विशाल लेदरबैक समुद्री टर्टल का महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल और मैंग्रोव के साथ एक रामसर आर्द्रभूमि।
    • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल होने की संभावना खतरे में पड़ सकती है।
  • शासन और संस्थागत चिंताएँ: सीमित अनुभव के बावजूद ANIIDCO को परियोजना प्रस्तावक नियुक्त किया गया (पहले शराब, दूध, पर्यटन रिसॉर्ट का प्रबंधन)।
    • वर्ष 2022 तक पर्यावरण नीति और विशेषज्ञता का अभाव → विश्वसनीयता पर सवाल।
    • हितों का टकराव: वही अधिकारी ANIIDCO का नेतृत्व कर रहे हैं और पर्यावरण निगरानी व स्वीकृति के भी प्रभारी हैं।
    • स्वतंत्र निगरानी और पारदर्शिता पर संदेह उत्पन्न होता है।
  • कानूनी और नियामक चिंताएँ: परियोजना क्षेत्र में तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ-1A) शामिल है → सामान्यतः बड़े पैमाने पर निर्माण निषिद्ध होता है।
    • तैयारी की कमी के बावजूद MoEFCC द्वारा दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति को अनियमित बताया गया।
    • NGT और कलकत्ता उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित याचिकाएँ वन संबंधी स्वीकृतियों को चुनौती दे रही हैं।

आगे की राह

  • ‘अर्थ जूरिसप्रुडेंस’ (Earth Jurisprudence): बोलीविया, कोलंबिया, इक्वाडोर और न्यूजीलैंड जैसे देश ‘अर्थ जूरिसप्रुडेंस’ का पालन करते हैं, जिसमें प्रकृति को कानूनी अधिकार दिए जाते हैं, भारत को भी पारिस्थितिकी संरक्षण मजबूत करने के लिए यह दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
  • वन अधिकार अधिनियम अनुपालन सुनिश्चित करना: निकोबारी और शोंपेन जनजातियों की वास्तविक भागीदारी के साथ नई ग्राम सभा परामर्श प्रक्रिया आयोजित करना।
    • आगे बढ़ने से पूर्व व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को उचित रूप से मान्यता देकर निपटारा करना।
  • स्वतंत्र पर्यावरण निगरानी: पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के लिए ANIIDCO और अंडमान-निकोबार प्रशासन से बाहर एक स्वतंत्र निगरानी निकाय स्थापित करना।
    • जैव-विविधता और आपदा प्रबंधन में विश्वसनीय बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करना।

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