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MSME की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए नीति आयोग का रोडमैप

Lokesh Pal January 19, 2026 04:40 32 0

संदर्भ

नीति आयोग ने ‘योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से MSME क्षेत्र में दक्षता की प्राप्ति’ (Achieving Efficiencies in MSME Sector through Convergence of Schemes) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए सरकारी समर्थन को सुव्यवस्थित करने हेतु एक रणनीतिक ढाँचा प्रस्तुत किया गया है।

योजना अभिसरण का औचित्य

  • योजनाओं की बहुलता: MSME मंत्रालय ऋण, कौशल विकास, विपणन, नवाचार, प्रौद्योगिकी उन्नयन और अवसंरचना से संबंधित 18 योजनाओं का प्रशासन करता है।
  • चुनौतियाँ: उद्देश्यों में अतिव्यापन, विभिन्न मंत्रालयों में खंडित क्रियान्वयन, प्रयासों की पुनरावृत्ति, अक्षमताएँ तथा लाभार्थियों तक सीमित पहुँच।
  • सुधार की आवश्यकता: समन्वय के अभाव से सार्वजनिक संसाधनों का प्रभाव कमजोर हो जाता है और MSMEs के लिए योजनाओं तक पहुँच जटिल हो जाती है।

द्वि-आयामी अभिसरण रणनीति

इन चुनौतियों से निपटने के लिए रिपोर्ट ने द्वि-आयामी अभिसरण रणनीति की सिफारिश की है।

  • सूचना अभिसरण
    • एकीकृत डेटा प्रणालियाँ: केंद्र और राज्य स्तर पर सरकारी रूप से उत्पन्न डेटा का एकीकरण।
    • शासन में सुधार: सूचित निर्णय-निर्माण, बेहतर समन्वय और सशक्त निगरानी को सक्षम बनाता है।
    • साक्ष्य-आधारित नीति: डेटा-आधारित शासन और लक्षित हस्तक्षेपों को सुगम बनाता है।
  • अभिसरण की प्रक्रिया
    • योजनाओं का संरेखण: समान उद्देश्यों वाली योजनाओं का युक्तिकरण और संरेखण।
    • संचालनात्मक सरलीकरण: योजनाओं के विलय और सामान्य घटकों के संयोजन के माध्यम से पुनरावृत्तियों में कमी।
    • अंतर-मंत्रालयी सहयोग: कुशल सेवा वितरण के लिए मंत्रालयों और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।

रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें

  • MSMEs के लिए केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल
    • MSMEs योजनाओं, अनुपालन, वित्त और बाजार जानकारी को एकीकृत करने हेतु AI-संचालित केंद्रीकृत मंच का प्रस्ताव।
    • विशेषताएँ: AI चैटबॉट, डैशबोर्ड और वास्तविक समय सहायता हेतु मोबाइल पहुँच।
  • क्लस्टर विकास योजनाओं का अभिसरण
    • रिपोर्ट ‘पारंपरिक उद्योगों के पुनर्जीवन हेतु निधि योजना’ (SFURTI) को एमएसई–क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) के साथ विलय कर अधिक सुव्यवस्थित क्लस्टर विकास ढाँचा निर्माण की अनुशंसा करती है।
    • पारंपरिक उद्योगों के लिए समर्पित उप-योजना का सृजन, MSE-CDP के अंतर्गत एकीकृत शासन तथा समेकित वित्तपोषण।
  • कौशल विकास कार्यक्रमों का अभिसरण
    • कौशल विकास पहलों को तीन-स्तरीय संरचना में पुनर्गठित किया जाना चाहिए, जिसका फोकस होगा:
      • उद्यमिता और व्यावसायिक कौशल
      • MSMEs तकनीकी कौशल
      • ग्रामीण और महिला कारीगरों के लिए प्रशिक्षण।
  • क्रय और विपणन योजना (PMS) का अंतरराष्ट्रीय सहयोग (IC) के साथ अभिसरण (IC):
    • MSMEs की विपणन सहायता तक पहुँच को सरल बनाने और बाजार विस्तार हेतु PMS और IC को एकीकृत विपणन सहायता विंग के अंतर्गत विलय करने की सिफारिश।
    • घरेलू घटक: राष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों और क्रेता-विक्रेता बैठकों में MSMEs की भागीदारी को सुगम बनाता है।
    • अंतरराष्ट्रीय घटक: विदेशी व्यापार मेलों, B2B कार्यक्रमों और क्रेता-विक्रेता बैठकों के माध्यम से वैश्विक बाजार पहुँच का समर्थन।
  • नवोन्मेषी वित्तपोषण
    • नवाचार वित्तपोषण को सुव्यवस्थित करने के लिए ASPIRE को ‘MSMEs इनोवेटिव स्कीम’ के साथ एक समर्पित कृषि-ग्रामीण उद्यम श्रेणी के अंतर्गत एकीकृत करने की सिफारिश।

MSMEs के बारे में

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार, भारत में MSMEs का वर्गीकरण संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश और वार्षिक कारोबार के आधार पर किया जाता है।

उद्यम संयंत्र एवं मशीनरी में निवेश कारोबार
सूक्ष्म ₹2.5 करोड़ से अधिक नहीं ₹10 करोड़ से अधिक नहीं
लघु ₹25 करोड़ से अधिक नहीं ₹100 करोड़ से अधिक नहीं
मध्यम ₹125 करोड़ से अधिक नहीं ₹500 करोड़ से अधिक नहीं

भारत में MSMEs की स्थिति

  • भविष्य की विकास संभावनाएँ: MSMEs की कुल संख्या 6.34 करोड़ से बढ़कर लगभग 7.5 करोड़ होने का अनुमान है, जिसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 2.5% है।
  • विकास प्रदर्शन: वर्ष 2000 से 2016 के बीच औद्योगिक क्षेत्र की औसत वृद्धि दर 7.6% रही, जबकि MSMEs ने 8.6% की उच्च औसत वृद्धि दर्ज की।
  • जीडीपी में योगदान: वर्ष 2017 से 2023 के बीच MSMEs क्षेत्र का योगदान भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में निरंतर 27% से 30% रहा।
  • रोजगार सृजन: लगभग 62% (करीब 28.13 करोड़) कार्यबल को रोजगार प्रदान करता है, जो कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है।
  • निर्यात में योगदान: भारत के कुल निर्यात का लगभग 45%।
    • निर्यात वृद्धि: वर्ष 2020-21 में ₹3.95 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹12.39 लाख करोड़ हो गई।
  • क्षेत्रीय संरचना: अक्टूबर 2024 तक, लगभग 25% पंजीकृत MSMEs विनिर्माण क्षेत्र में तथा शेष 75% सेवा गतिविधियों में संलग्न हैं।

MSMEs के लिए सरकारी पहलें

  • पीएम विश्वकर्मा योजना
    • केंद्रीय बजट 2023-24 में घोषित, यह योजना कारीगरों और शिल्पकारों (विश्वकर्माओं) द्वारा प्रदत्त उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता, पैमाने और बाजार एकीकरण को घरेलू एवं वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से जोड़कर सुदृढ़ करने का उद्देश्य रखती है।
  • उद्यम पंजीकरण पोर्टल
    • 1 जुलाई, 2020 को प्रारंभ, यह MSMEs के लिए निःशुल्क, कागज-रहित और स्व-घोषणा आधारित पंजीकरण तंत्र प्रदान करता है।
    • यह पोर्टल उद्योग आधार ज्ञापन और उद्यमिता ज्ञापन-II से बिना दस्तावेज अपलोड किए सुगम स्थानांतरण की सुविधा प्रदान करता है, जिससे अनुपालन प्रक्रिया सरल हो जाती है।
    • उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म: अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को एकीकृत करने हेतु नवंबर 2023 में प्रारंभ, जिससे प्राथमिकता क्षेत्र ऋण जैसी सुविधाओं तक पहुँच संभव होती है।
  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
    • यह एक ऋण-संबद्ध सब्सिडी योजना है, जिसका उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।
  • पारंपरिक उद्योगों के पुनर्जीवन हेतु निधि योजना (SFURTI)
    • वर्ष 2005-06 में प्रारंभ, इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को क्लस्टरों में संगठित कर उत्पाद विकास, विविधीकरण, मूल्य संवर्द्धन और सतत् आय वृद्धि को प्रोत्साहित करना है।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) के लिए सार्वजनिक खरीद नीति
    • वर्ष 2012 में अधिसूचित, यह नीति केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और CPSEs द्वारा वार्षिक खरीद का 25% MSEs से अनिवार्य रूप से करने का प्रावधान करती है।
  • बजटीय विस्तार: MSMEs क्षेत्र पर सरकारी व्यय वित्त वर्ष 2019-20 में ₹6,717 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹23,168 करोड़ हो गया है, जो सशक्त नीति निर्माण तथा वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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