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पेन्नैयार नदी विवाद

Lokesh Pal February 04, 2026 03:21 5 0

संदर्भ 

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच पेन्नैयार नदी के जल बंटवारे से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद के निपटारे हेतु एक अंतर-राज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण गठित करने का निर्देश दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि

  • वाद की उत्पत्ति: तमिलनाडु ने वर्ष 2018  में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें उसने पेन्नैयार नदी पर कर्नाटक द्वारा बाँधों और जल-विभाजन संरचनाओं के निर्माण को चुनौती दी।
  • मुख्य मुद्दा: यह विवाद कर्नाटक द्वारा ऊपरी प्रवाह क्षेत्र में जल उपयोग से संबंधित है, जिससे कथित रूप से तमिलनाडु में निचले प्रवाह पर प्रभाव पड़ता है।
  • प्रभावित क्षेत्र: पेन्नैयार नदी उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सिंचाई और पेयजल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों पर संवैधानिक प्रावधान

  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद: दो या अधिक राज्यों के बीच राज्य सीमाओं के पार बहने वाली नदियों के जल के उपयोग, वितरण और नियंत्रण से संबंधित विवाद।
  • सातवीं अनुसूची
    • प्रविष्टि 56 – संघ सूची (सूची I): संसद द्वारा सार्वजनिक हित में आवश्यक घोषित किए जाने तक अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के विनियमन और विकास के लिए केंद्र सरकार को अधिकार प्रदान करती है।
    • प्रविष्टि 17 – राज्य सूची (सूची II): जल आपूर्ति, सिंचाई, नहरें, जल निकासी, तटबंध, जल भंडारण और जलविद्युत शक्ति जैसे जल-संबंधी विषयों को सम्मिलित करती है, जो प्रविष्टि 56 के अंतर्गत संघीय शक्तियों के अधीन हैं।
  • अनुच्छेद-262
    • संसद को अंतर-राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण से संबंधित विवादों अथवा शिकायतों के निपटारे हेतु कानून बनाने का अधिकार देता है।
    • संसद यह भी प्रावधान कर सकती है कि ऐसे विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होगा।

अनुच्छेद-262 के अंतर्गत बनाए गए कानून

  • नदी बोर्ड अधिनियम, 1956: यह अधिनियम राज्य सरकारों से परामर्श के बाद अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के विनियमन और विकास हेतु नदी बोर्ड स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार को अधिकार देता है।
  • अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम (ISRWD), 1956: यह अधिनियम केंद्र सरकार को तब जल विवाद न्यायाधिकरण गठित करने का अधिकार देता है, जब एक या अधिक राज्य औपचारिक रूप से अंतर-राज्यीय जल विवाद के निपटारे का अनुरोध करते हैं।
  • न्यायिक सीमाएँ: अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के लिए गठित न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित निर्णय या सूत्र पर सर्वोच्च न्यायालय प्रश्न नहीं उठा सकता।

अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत न्यायाधिकरण गठन की प्रक्रिया

  • विवाद समाधान की शुरुआत: जब एक या अधिक राज्य जल विवाद के संबंध में केंद्र से संपर्क करते हैं, तो केंद्र सरकार, पहले संबंधित राज्यों के बीच परामर्श के माध्यम से समाधान का प्रयास करती है।
  • न्यायाधिकरण का गठन: यदि परामर्श विफल रहता है, तो केंद्र सरकार मामले के निपटारे हेतु जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन कर सकती है।
  • समयबद्ध ढाँचा (2002 संशोधन)
    • न्यायाधिकरण के गठन के लिए एक वर्ष की समय सीमा निर्धारित की गई है।
    • न्यायाधिकरण को तीन वर्षों के भीतर अपना निर्णय देना होता है, जिससे विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होता है।

पेन्नैयार नदी के बारे में

  • नामकरण: पेन्नैयार नदी को कन्नड़ में दक्षिणा पिनाकिनी और तमिल में थेनपेननई, पोन्नैयार या पेन्नैयार कहा जाता है।
  • उद्गम: यह नदी कर्नाटक के चेन्नकेशव पहाड़ियों में नंदी दुर्ग पर्वत की पूर्वी ढलानों से निकलती है।

  • प्रवाह मार्ग: पेन्नैयार नदी, कर्नाटक से पूर्व की ओर बहते हुए तमिलनाडु में प्रवेश करती है और अंततः बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
  • लंबाई: लगभग 497 किमी. की कुल लंबाई के साथ, पेन्नैयार नदी कावेरी के बाद तमिलनाडु की दूसरी सबसे लंबी नदी है।
  • सहायक नदियाँ: इसकी प्रमुख सहायक नदियों में मार्कंडेय नदी, कंबैनल्लूर नदी, पांबर नदी, वणियार, कल्लार, वलयार ओडै, पांबनार, अलियार, मुसुकुंदनधी और थुरिंजलार नदियाँ शामिल हैं, जो इसके मौसमी प्रवाह में योगदान देती हैं।
  • घाटी स्थिति: केंद्रीय जल आयोग (CWC) की बेसिन रिपोर्ट के अनुसार, पेन्नैयार बेसिन, पेनार और कावेरी बेसिन के बीच स्थित बारह नदी घाटियों में दूसरी सबसे बड़ी अंतर-राज्यीय पूर्ववाहिनी नदी घाटी है।
  • घाटी वितरण: पेन्नैयार नदी बेसिन का लगभग 77% भाग तमिलनाडु में स्थित है, जिससे जलग्रहण क्षेत्र के संदर्भ में यह मुख्यतः तमिलनाडु की नदी के रूप में संदर्भित है।

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