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ध्रुवीय भँवर (पोलर वॉर्टेक्स)

Lokesh Pal January 29, 2026 03:52 11 0

संदर्भ

जनवरी 2026 में अमेरिका के 17 राज्यों में एक शीतकालीन तूफान आया, जिसने ध्रुवीय भँवर (पोलर वॉर्टेक्स) के दक्षिण की ओर विस्तार के कारण अत्यधिक ठंड और भारी हिमपात के माध्यम से लाखों लोगों को प्रभावित किया।

ध्रुवीय भँवर (पोलर वॉर्टेक्स) के बारे में

  • परिभाषा: ध्रुवीय भँवर (पोलर वॉर्टेक्स) एक बड़े पैमाने की निम्न-दाब आधारित और ठंडी वायु प्रणाली है, जो उत्तर तथा दक्षिण ध्रुवों के चारों ओर वामावर्त दिशा में परिक्रमा करती है।
  • वॉर्टेक्स: “वॉर्टेक्स” शब्द इसके घूर्णनशील स्वरूप को दर्शाता है, जो वायुमंडल में एक भँवर (वॉर्टेक्स) के समान होता है।
  • मुख्य विशेषताएँ: यह क्षोभमंडल (निचला वायुमंडल) से लेकर समतापमंडल तक (पृथ्वी की सतह से लगभग 50 किमी. ऊपर) विस्तृत होता है।
    • सर्दियों में ध्रुवों पर सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति के कारण यह ‘वॉर्टेक्स’ सशक्त हो जाता है, जिससे तीव्र शीतलन होता है।
  • स्थिति: मुख्यतः आर्कटिक क्षेत्र (उत्तरी पोलर वॉर्टेक्स) और अंटार्कटिक क्षेत्र (दक्षिणी पोलर वॉर्टेक्स) के ऊपर पाया जाता है।

ध्रुवीय भँवर का निर्माण एवं कार्यविधि

  • ठंडे ध्रुवीय क्षेत्र: ध्रुवों पर कई महीनों तक लगभग कोई सूर्य प्रकाश नहीं प्राप्त होता (ध्रुवीय रात्रि), जिससे तापमान समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की तुलना में तीव्र रूप से गिर जाता है (जो अपेक्षाकृत गर्म रहते हैं)।
  • अत्यधिक तापमान अंतराल: अत्यधिक ठंडे ध्रुवीय क्षेत्रों और अपेक्षाकृत गर्म मध्य-अक्षांश/भूमध्यरेखीय क्षेत्रों के बीच।

  • जेट स्ट्रीम की भूमिका: वायु इस तापमान अंतर को संतुलित करने का प्रयास करती है, जिससे ऊपरी वायुमंडल (समतापमंडल) में पश्चिम से पूर्व की ओर तीव्र पवनें (जेट स्ट्रीम) प्रवाहित होती हैं।
  • वॉर्टेक्स: तेज गति वाली ये पवनें ध्रुव के चारों ओर भँवर की तरह घूमती हैं। यह घूर्णनशील वलय अत्यधिक ठंडी वायु को अपने भीतर एकत्रित कर लेता है।
  • सर्दियों में सर्वाधिक सशक्त: पोलर वॉर्टेक्स का निर्माण/सुदृढ़ीकरण शीत ऋतु में होता है, जब तापमान का अंतर सर्वाधिक होता है। ग्रीष्म ऋतु में, जब ध्रुवों को पुनः सूर्य प्रकाश प्राप्त होने लगता है, तो यह कमजोर हो जाता है या लगभग समाप्त हो जाता है।

ध्रुवीय भँवर के प्रकार

ऊँचाई के आधार पर इसके दो प्रमुख प्रकार होते हैं:

  • समतापमंडलीय ध्रुवीय भँवर: यह समतापमंडल में स्थित होता है और प्राथमिक ‘वॉर्टेक्स’ माना जाता है।
    • दक्षिणी गोलार्द्ध में यह अधिक स्थिर रहता है क्योंकि वहाँ भू-भाग कम होने से वायु प्रवाह में कम व्यवधान होता है।
  • क्षोभमंडलीय ध्रुवीय भँवर: यह निम्न वायुमंडल तक विस्तारित रूप है।
    • यह कम स्पष्ट होता है, किंतु जब समतापमंडलीय ध्रुवीय भँवर कमजोर पड़ता है, तब यह सतह स्तर पर शीतकालीन प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

विघटन और आकस्मिक समतापमंडलीय ऊष्मीकरण (SSW)

  • SSW: क्षोभमंडल से आने वाली ग्रहीय तरंगों के कारण समतापमंडल का तीव्र ऊष्मीकरण (कुछ दिनों में 50°C तक) होता है, जिससे वॉर्टेक्स कमजोर या विभाजित हो जाता है।
  • परिणाम: विघटन की स्थिति में जेट स्ट्रीम तरंगाकार हो जाती है, जिससे ठंडी ध्रुवीय वायु मध्य-अक्षांशों में फैल जाती है, जबकि गर्म वायु, उत्तर की ओर प्रवाहित होती है।
  • आवृत्ति: उत्तरी गोलार्द्ध में SSW घटनाएँ लगभग प्रत्येक दूसरे शीतकाल में होती हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में ये अपेक्षाकृत दुर्लभ हैं।

मौसम और जलवायु पर प्रभाव

  • अत्यधिक शीत लहरें: इन्हें “पोलर वॉर्टेक्स आउटब्रेक” कहा जाता है, जो कनाडा, अमेरिका और यूरोप जैसे क्षेत्रों में शून्य से नीचे तापमान, भारी हिमपात और बर्फीले तूफान का कारण बनती हैं।
  • व्यापक प्रभाव: कुछ क्षेत्रों में वर्षा पैटर्न में परिवर्तन, कहीं सूखा, और अप्रत्यक्ष रूप से मानसून प्रणालियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
  • आर्थिक एवं मानवीय प्रभाव: इन व्यवधानों से ऊर्जा की माँग बढ़ जाती है, परिवहन ठप हो जाता है और हाइपोथर्मिया से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं। उदाहरणस्वरूप, शीतकालीन मृत्यु दर में वृद्धि होती है।

ध्रुवीय भँवर और जलवायु परिवर्तन

  • आर्कटिक प्रवर्द्धन (Arctic Amplification): आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे तापमान अंतराल घटता है और वॉर्टेक्स के कमजोर पड़ने की संभावना बढ़ती है, परिणामस्वरूप अधिक बार विघटन हो सकता है।
  • कुछ अध्ययनों के अनुसार, वैश्विक ऊष्मीकरण के कारण SSW घटनाओं में वृद्धि हो सकती है, जिससे समग्र ऊष्मीकरण के बावजूद अत्यधिक शीत घटनाओं का विरोधाभास उत्पन्न होता है।
  • भारत के लिए निहितार्थ: यद्यपि भारत सीधे प्रभावित नहीं होता, किंतु वैश्विक परिसंचरण में होने वाले अप्रत्यक्ष परिवर्तन भारतीय मानसून या हिमालयी मौसम को प्रभावित कर सकते हैं।

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