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रेबीज (Rabies)

Lokesh Pal January 06, 2026 02:53 62 0

संदर्भ

दिल्ली सरकार, कुत्तों के काटने से होने वाली रेबीज से मानव मृत्यु को शून्य के स्तर तक लाने हेतु अपनी रणनीति के तहत, महामारी रोग अधिनियम, 1897 के अंतर्गत ह्यूमन रेबीज को अधिसूचित बीमारी (नोटिफाइएबल डिजीज) घोषित करने जा रही है।

अधिसूचित बीमारी (नोटिफाइएबल डिजीज) क्या है?

  • कानूनी अनिवार्यता: अधिसूचित बीमारी (नोटिफाइएबल डिजीज) वह बीमारी है, जिसकी सूचना स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रदान करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्य: रिपोर्टिंग से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए संकट उत्पन्न करने वाले रोगों की निगरानी, ​​प्रकोप की रोकथाम, प्रारंभिक हस्तक्षेप और नियंत्रण संभव हो पाता है।
  • राज्य-विशिष्ट सूचियाँ: नोटिफाइएबल डिजीज की सूची प्रत्येक राज्य में अलग-अलग होती है और इसमें तपेदिक, डेंगू, कोविड-19 जैसे संक्रामक रोग और हाल ही में सर्पदंश को शामिल गया हैं।

कानूनी और संस्थागत ढाँचा

  • महामारी रोग अधिनियम, 1897: यह अधिनियम किसी भी बीमारी (जैसे रेबीज) को अधिसूचित बीमारी (नोटिफाइएबल डिजीज) घोषित करने का कानूनी आधार प्रदान करता है।
  • एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP): यह डेटा संग्रह, निगरानी और प्रतिक्रिया का प्रबंधन करेगा, जिससे शीघ्र हस्तक्षेप और संसाधनों का कुशल आवंटन संभव होगा।
  • राष्ट्रीय दर्जा: राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अनुसार, भारत के 20 राज्यों ने मानव रेबीज को अधिसूचित बीमारी  घोषित कर दिया है।

महामारी रोग अधिनियम, 1897 के बारे में

  • उत्पत्ति: महामारी रोग अधिनियम, 1897 को औपनिवेशिक काल के दौरान, 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में बॉम्बे प्रेसीडेंसी में फैले ब्यूबॉनिक प्लेग के प्रकोप से निपटने के लिए अधिनियमित किया गया।
  • उद्देश्य: खतरनाक महामारी रोगों के प्रसार की प्रभावी रोकथाम और नियंत्रण को सुनिश्चित करना।
  • प्रमुख प्रावधान
    • धारा 2: यह अधिनियम राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेशों को महामारी को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपाय करने और अस्थायी नियम बनाने का अधिकार देता है।
    • धारा 2A: केंद्र सरकार महामारी के प्रसार को रोकने के लिए परिवहन निरीक्षण और व्यक्तियों को हिरासत में लेने हेतु उपाय कर सकती है और नियम बना सकती है।
    • धारा 2B: महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा करना और संपत्ति को क्षतिग्रस्त करना निषिद्ध है।
    • धारा 3: यह अधिनियम के अंतर्गत जारी आदेशों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान करती है।
      • धारा 3(2): स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुँचाने पर कारावास (3 महीने से 5 वर्ष तक) और जुर्माना (₹50,000 से ₹2 लाख तक) हो सकता है।
    • धारा 4: अधिनियम को लागू करते समय सद्भावनापूर्वक की गई कार्रवाई के लिए अधिकारियों और प्राधिकरणों को कानूनी प्रतिरक्षा प्रदान करती है।

रेबीज के बारे में

  • प्रकृति: रेबीज एक टीका-निवारक, पशुओं में फैलने वाला विषाणुजनित रोग है।
  • कारक: रेबीज वायरस (RABV), जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
  • होस्ट: यह सभी स्तनधारियों को प्रभावित करता है, जिनमें कुत्ते, बिल्लियाँ, पालतू जानवर और वन्यजीव शामिल हैं।
  • संचरण: यह प्राय: काटने, खरोंच लगने या श्लेष्म झिल्ली (आँखें, मुँह) या खुले घावों के संपर्क में आने से लार के माध्यम से फैलता है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य स्थिति: इसे उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो गरीब, हाशिए पर स्थित और सुभेद्य आबादी को असमान रूप से प्रभावित करता है।
  • रेबीज के प्रकार
    • उग्र रेबीज: इसमें अति सक्रियता, बेचैनी और मतिभ्रम जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
    • पक्षाघाती रेबीज: इसमें मांसपेशियों की कमजोरी, पक्षाघात और कोमा की स्थिति जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
  • रोकथाम: समय पर टीकाकरण से 100% रोकथाम संभव है।
  • मृत्यु दर: लक्षण दिखने के बाद रेबीज लगभग 100% घातक होता है, इसलिए रोकथाम और शीघ्र उपचार अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।
  • संवेदनशील समूह: स्थानिक क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे (5-14 वर्ष)
  • उपचार
    • रेबीज की रोकथाम: पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफीलैक्सिस (PEP) के तहत चार खुराक वाला टीका तथा जिन व्यक्तियों को टीका नहीं लगा है उनके लिए रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) प्रभावी है।
    • WHO द्वारा अनुमोदित टीके: रैबिवैक्स-एस, वैक्सीरैब एन, वेरोरैब।

पूर्व-संपर्क निवारक उपचार (प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस-PrEP): यह विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों (पशु चिकित्सकों, पशु संचालकों) को, संभावित जोखिम से पूर्व दिया जाने वाला एक निवारक टीकाकरण है ।

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