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री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) सुविधा

Lokesh Pal January 06, 2026 03:04 38 0

संदर्भ

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री ने तेलंगाना के हैदराबाद में भारत के पहले वाणिज्यिक स्तर के उष्णकटिबंधीय ‘री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम’ (RAS) पर आधारित ‘रेनबो ट्राउट मत्स्यपालन फार्म और अनुसंधान संस्थान’ का उद्घाटन किया।

‘री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम’ (RAS) के बारे में

  • ‘री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम’ (RAS) एक भू-आधारित, मत्स्यपालन प्रणाली है, जिसमें संवर्द्धन टैंकों से जल का निरंतर उपचार और पुन: उपयोग किया जाता है, जिससे ताजे जल के न्यूनतम उपयोग तथा नियंत्रित पर्यावरणीय परिस्थितियों के साथ गहन मत्स्यपालन संभव हो पाता है।

  • RAS प्रवाह-प्रवेश प्रणालियों से भिन्न है, जहाँ जल का एक बार उपयोग करके उसे छोड़ दिया जाता है। RAS में, जल का कई बार उपचार और पुन: उपयोग किया जाता है।
  • पाली जाने वाली प्रजातियाँ
    • खाद्य मछली: तिलापिया, कैटफिश, सैल्मन, ट्राउट, बर्रामुंडी।
    • अन्य: झींगा, प्रॉन्स, सजावटी मछली।

मुख्य घटक

  • कल्चर टैंक:  जहाँ मछलियों/झींगों का पालन-पोषण किया जाता है।
  • मैकेनिकल फिल्टर: ठोस अपशिष्ट (बचा हुआ चारा, मल) को हटाता है।
  • बायोफिल्टर: नाइट्रिफाइंग बैक्टीरिया को बनाए रखता है, जो विषाक्त अमोनिया को नाइट्राइट और पुनः नाइट्रेट में परिवर्तित करते हैं।
  • ऑक्सीजनेशन/एरेशन यूनिट: घुलित ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखता है।
  • कीटाणुशोधन यूनिट: रोगजनकों को नियंत्रित करने के लिए UV या ओजोन का उपयोग करता है।
  • पंप और पाइप: सिस्टम में जल का संचार करते हैं।
  • तापमान और pH नियंत्रण: प्रजाति-विशिष्ट परिस्थितियाँ सुनिश्चित करता है।

पुनर्चक्रण मत्स्यपालन प्रणालियों की प्रमुख विशेषताएँ

  • बंद-चक्र जल पुनर्चक्रण: यह प्रणाली उपचार के बाद जल का निरंतर पुनर्चक्रण करती है, जिसके परिणामस्वरूप 90-99% जल का पुन: उपयोग होता है और मीठे जल के संसाधनों पर निर्भरता कम हो जाती है।
  • यांत्रिक अपशिष्ट निष्कासन: यांत्रिक निस्पंदन इकाइयाँ मछली के मल और बचे हुए चारे जैसे ठोस अपशिष्टों को हटा देती हैं, जिससे जल की गुणवत्ता में गिरावट नहीं आती।
  • जैविक निस्पंदन प्रक्रिया: नाइट्रिफाइंग बैक्टीरिया युक्त बायोफिल्टर विषैले अमोनिया को नाइट्राइट और फिर अपेक्षाकृत हानिरहित नाइट्रेट में परिवर्तित करते हैं, जिससे जलीय जीवों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित होता है।
  • उच्च स्टॉक घनत्व: RAS इष्टतम जल गुणवत्ता बनाए रखकर उच्च स्टॉक घनत्व का समर्थन करता है, जिससे प्रति इकाई क्षेत्र में उच्च उत्पादकता प्राप्त होती है।
  • नियंत्रित पर्यावरणीय परिस्थितियाँ: यह प्रणाली तापमान, pH, घुलित ऑक्सीजन और लवणता के सटीक विनियमन की अनुमति देती है, जिससे निरंतर और वर्ष भर मत्स्यपालन संभव होता है।

RAS की सीमाएँ

  • उच्च प्रारंभिक पूँजी निवेश।
  • कुशल जनशक्ति और निर्बाध बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है।

RAS बनाम पारंपरिक जलकृषि

पहलू RAS पारंपरिक जलकृषि
जल उपयोग बहुत निम्न उच्च
भूमि की आवश्यकता निम्न उच्च
पर्यावरण पर नियंत्रण बहुत उच्च सीमित
प्रदूषण माध्यम प्रायः उच्च
प्रारंभिक लागत उच्च निम्न

‘ट्राउट फार्मिंग’ के बारे में

  • ट्राउट फार्मिंग एक ऐसी मत्स्यपालन प्रथा है, जिसमें नियंत्रित मीठे जल तंत्र में ट्राउट का पालन किया जाता है, ताकि खाद्य उत्पादन, नदियों में मछलियों की संख्या बढ़ाने या स्पोर्ट फिशिंग संबंधी उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके।
  • यह ठंडे क्षेत्रों में सामान्य है क्योंकि ट्राउट को स्वच्छ, ठंडा और ऑक्सीजन युक्त जल की आवश्यकता होती है।
  • पर्यावरणीय आवश्यकताएँ
    • तापमान: सामान्यतः 10–18°C
    • जल की गुणवत्ता: उच्च घुलित ऑक्सीजन, कम मैलापन।
  • सामान्य ट्राउट प्रजातियाँ
    • रेनबो ट्राउट: सबसे व्यापक रूप से पाली जाने वाली मछली। तेजी से बढ़ती है और अनुकूलनीय होती है।
    • ब्राउन ट्राउट: धीमी वृद्धि, कुछ क्षेत्रों में उच्च बाजार मूल्य।
    • ब्रूक ट्राउट: जल की गुणवत्ता के प्रति संवेदनशील, आमतौर पर लघु स्तर पर पाली जाती है।

‘री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम’ (RAS) का समर्थन करने वाली सरकारी पहलें 

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): यह भारत में सतत् मत्स्यपालन को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी योजना है, जिसके तहत मत्स्यपालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के लिए ‘री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम’ (RAS) प्रौद्योगिकी को सक्रिय रूप से समर्थन दिया जाता है।
  • वित्तीय सहायता: PMMSY के तहत, सरकार RAS इकाइयों की स्थापना के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए इकाई लागत का 40% तक और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों के लिए 60% तक सब्सिडी दी जाती है।

भारत में ठंडे जल आधारित मत्स्यपालन संबंधी मुद्दे

  • उभरता हुआ उच्च-संभावित क्षेत्र: उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों की बढ़ती माँग, निर्यात क्षमता और सतत् प्रौद्योगिकियों को अपनाने के कारण ठंडे जल आधारित मत्स्यपालन का महत्त्व बढ़ रहा है।
  • पारंपरिक भौगोलिक एकाग्रता: ‘ट्राउट’ पालन ऐतिहासिक रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश तथा सिक्किम जैसे हिमालयी एवं पर्वतीय राज्यों में बर्फ से पोषित धाराओं का उपयोग करते हुए केंद्रित रहा है।
  • उत्पादन विस्तार: मत्स्य विभाग ने नई हैचरी की स्थापना के माध्यम से प्रति वर्ष 14 लाख ‘ट्राउट’ प्रजनकों के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • संस्थागत सहयोग: उत्तराखंड ने जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत ट्राउट आपूर्ति और आजीविका का समर्थन करने के लिए ITBP के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

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