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वर्ष 2025 में महासागर का रिकॉर्ड स्तर पर तापन

Lokesh Pal January 12, 2026 02:50 11 0

संदर्भ

एडवांसेज इन एटमॉस्फेरिक साइंसेज’ (Advances in Atmospheric Sciences) में प्रकाशित एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, वैश्विक महासागरों में वर्ष 2025 में आधुनिक रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद किसी भी वर्ष की तुलना में सर्वाधिक तापन दर्ज किया गया।

संबंधित तथ्य 

  • इस अध्ययन में विश्वभर के 31 संस्थानों से जुड़े 50 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया, जिसमें एशिया, यूरोप और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों तथा स्वतंत्र शोध समूहों के संयुक्त आँकड़ों का उपयोग किया गया।

जेटाजूल (ZJ) ऊर्जा की एक इकाई है; 1 जेटाजूल = 10²¹ जूल

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

  • महासागरीय तापन में रिकॉर्ड वृद्धि: वर्ष 2025 में महासागरीय तापन में लगभग 23 जेटाजूल की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2023 के स्तर पर वैश्विक ऊर्जा खपत के लगभग 37 वर्षों के बराबर है।
    • वर्ष 2025 में वैश्विक महासागर सतह का लगभग 16 प्रतिशत भाग अपने इतिहास का सबसे गर्म वर्ष रहा, जबकि 33 प्रतिशत क्षेत्र रिकॉर्ड किए गए तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा।
  • ऊपरी महासागर का ऊष्मीकरण: महासागर के ऊपरी 2,000 मीटर में संचित ऊष्मा रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई, जिससे अतिरिक्त ऊष्मा के दीर्घकालिक संचयन की पुष्टि होती है।
  • ग्रीनहाउस गैसों से संबंध: ग्रीनहाउस गैसों द्वारा एकत्रित अतिरिक्त ऊष्मा का लगभग 90% महासागर अवशोषित कर लेते हैं, जिससे वे वायुमंडलीय तापन के विरुद्ध प्राथमिक बफर बन जाते हैं।
  • महासागरीय तापन के क्षेत्रीय प्रतिरूप
    • प्रभावित सतह क्षेत्र: वर्ष 2025 में वैश्विक महासागर सतह का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा अब तक का सबसे गर्म रहा, जबकि 33 प्रतिशत हिस्सा रिकॉर्ड किए गए तीन सबसे गर्म वर्षों में शामिल रहा।
    • सर्वाधिक तीव्र तापन वाले क्षेत्र: सर्वाधिक तीव्र तापन उष्णकटिबंधीय एवं दक्षिण अटलांटिक, उत्तर प्रशांत तथा दक्षिणी महासागर में दर्ज किया गया।
  • गहरे महासागर में तापन: गहरे महासागर में संचित ऊष्मा भी एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई, जो यह दर्शाता है कि तापन केवल सतही परतों तक सीमित नहीं है।
  • समुद्र नितल के तापमान की प्रवृत्ति
    • वाष्पीकरण और वर्षा में वृद्धि: महासागर सतही तापमान में वृद्धि के कारण वाष्पीकरण बढ़ा, जिससे वर्षा के प्रतिरूप अधिक तीव्र हुए।
    • चरम मौसमी घटनाएँ: वर्ष 2025 के दौरान इन परिस्थितियों के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया और मैक्सिको में भीषण बाढ़ तथा मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में सूखा पड़ा।
  • स्तरीकरण में वृद्धि: अधिक गर्म महासागर स्तरीकरण को बढ़ाते हैं, जिसमें हल्का, गर्म और पोषक तत्त्व रहित सतही जल, ठंडे और पोषक तत्त्व समृद्ध गहरे जल के ऊपर स्तरित हो जाता है।
  • महासागरीय तापन के दीर्घकालिक परिणाम
    • समुद्र-स्तर में वृद्धि: निरंतर ऊष्मीकरण से समुद्री जल का तापीय प्रसार होता है, जिससे समुद्र-स्तर वृद्धि की प्रक्रिया तेज होती है।
    • समुद्री हीटवेव: अधिक महासागरीय तापन समुद्री हीटवेव को तीव्र करता है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होते हैं।
    • अधिक शक्तिशाली तूफान: वायुमंडल में अतिरिक्त ऊष्मा और नमी के कारण अधिक तीव्र तूफानों तथा चरम मौसमी घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
  • भविष्य का परिदृश्य
    • नए रिकॉर्ड बनने की संभावना: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जब तक पृथ्वी अतिरिक्त ऊष्मा संचित करती रहेगी, आने वाले वर्षों में महासागरीय तापन के नए रिकॉर्ड बनने की संभावना बनी रहेगी, जो वैश्विक जलवायु शमन प्रयासों की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
  • वैश्विक शोध प्रयास: इस अध्ययन में पूरे विश्व के 31 संस्थानों से जुड़े 50 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया और इसमें एशिया, यूरोप तथा अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्रों और स्वतंत्र शोध समूहों के संयुक्त आँकड़ों का उपयोग किया गया।

तापमान वृद्धि के परिणाम

  • समुद्री पर्यटन पर प्रभाव: महासागरीय तापन में वृद्धि से प्रवाल विरंजन होता है, जिससे अंडमान द्वीपसमूह और ग्रेट बैरियर रीफ जैसे क्षेत्रों में समुद्री पर्यटन के प्रमुख आकर्षण क्षतिग्रस्त होते हैं और पर्यटन राजस्व में गिरावट आती है।
  • शिपिंग मार्गों पर प्रभाव: आर्कटिक समुद्री बर्फ के पिघलने से नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं और परिवहन समय घट रहा है, किंतु बढ़ते तूफान और पर्यावरणीय जोखिम मौजूदा शिपिंग लेनों तथा वैश्विक व्यापार लॉजिस्टिक्स के लिए चुनौती उत्पन्न करते हैं।
  • बंदरगाह अवसंरचना पर प्रभाव: महासागरीय तापन से उत्पन्न समुद्र स्तर वृद्धि, निम्न-तटीय क्षेत्रों में स्थित बंदरगाह अवसंरचना को खतरे में डालती है, जिससे बाढ़ और तूफानी ज्वार से होने वाले व्यवधानों को रोकने हेतु जलवायु अनुकूलन में वृद्धि हेतु बड़े निवेश की आवश्यकता होती है।
  • तटीय आजीविका पर प्रभाव: महासागरीय तापन में वृद्धि से मछलियों के प्रवासन प्रतिरूप बदलते हैं, जिससे मत्स्यन उद्योग प्रभावित होता है और मत्स्यन पर निर्भर तटीय समुदायों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, साथ ही जलवायु-जनित आपदाओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है।

महासागरीय तापन से निपटने के उपाय

  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी: वैश्विक ऊष्मीकरण और महासागरों पर इसके प्रभाव को धीमा करने के लिए GHG उत्सर्जन में कमी अत्यंत आवश्यक है।
  • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन: प्रवाल भित्तियों और मैंग्रोव जैसे संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा के लिए समुद्री संरक्षित क्षेत्र (MPAs) और समुद्री अभयारण्यों का विस्तार किया जाना चाहिए।
    • मैंग्रोव व सीग्रास का पुनर्स्थापन कार्बन पृथक्करण में सहायक होता है और तटीय सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे समुद्री जैव-विविधता पर महासागर ऊष्मीकरण के प्रभाव कम होते हैं।
  • तटीय क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाना: तटीय रक्षा को सुदृढ़ करना, बाढ़ संरक्षण और सतत् शहरी नियोजन जैसी तटीय अनुकूलन रणनीतियाँ, समुद्र स्तर में वृद्धि तथा चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
  • महासागर अम्लीकरण कम करना: महासागरीय तापन के कारण महासागर अम्लीकरण में वृद्धि होती है, जो समुद्री जीवन को नुकसान पहुँचा सकता है।
    • CO₂ उत्सर्जन में कमी से महासागर ऊष्मीकरण और अम्लीकरण—दोनों को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है।
  • सतत् शिपिंग और समुद्री प्रथाएँ: स्वच्छ शिपिंग तकनीकों (जैसे- हाइड्रोजन-चालित पोत) को अपनाना और सतत् समुद्री प्रथाओं को लागू करना इस क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सहायक होगा।

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