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प्रजनन संबंधी स्वायत्तता

Lokesh Pal February 10, 2026 05:13 7 0

संदर्भ 

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी, जिससे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत सांविधिक गर्भकाल की सीमाओं के परे प्रजनन स्वायत्तता को पुनः पुष्टि मिली।

प्रमुख विशेषताएँ

  • न्यायालय के अनुसार, किसी भी महिला, खासकर नाबालिग, को अनचाहे गर्भ को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
  • कठोर सांविधिक समय-सीमाओं की तुलना में प्रजनन स्वायत्तता और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर दिया गया।
  • 24 सप्ताह से अधिक अवधि में पहुँच अस्वीकृत होने पर असुरक्षित और अवैध गर्भपात के जोखिमों की चेतावनी दी।

प्रजनन स्वायत्तता (Reproductive Autonomy)

  • प्रजनन स्वायत्तता से तात्पर्य एक महिला के अपने शरीर, प्रजनन क्षमता और मातृत्व के संबंध में स्वतंत्र, सूचित और स्वैच्छिक निर्णय लेने के अधिकार से है।
  • मुख्य विशेषताएँ
    • अनुच्छेद-21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का अभिन्न हिस्सा।
    • गर्भ को जारी रखने या समाप्त करने का अधिकार शामिल।
    • शारीरिक अखंडता, गरिमा और मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करना।

प्रजनन स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे

  • पितृसत्तात्मक नियंत्रण: सामाजिक मानदंड और संस्थागत प्रथाएँ महिलाओं के निर्णय लेने की क्षमता को सीमित करती हैं।
  • सहमति बाधाएँ: अस्पताल प्रायः वैध स्थिति के बावजूद पति या माता-पिता की सहमति माँगते हैं।
  • किशोरावस्था संबंधी संवेदनशीलता: यौन शिक्षा की कमी और किशोर यौनिकता संबंधी उपेक्षा।
  • स्वास्थ्य सेवा में अंतर: विशेषज्ञों की कमी और सुरक्षित गर्भपात सेवाओं का असमान ग्रामीण पहुँच।
  • लैंगिक असमानता: NFHS-5 के अनुसार, केवल 10% महिलाएँ स्वतंत्र रूप से स्वास्थ्य संबंधी निर्णय ले पाती हैं।

भारत की गर्भपात नीति

  • भारत में गर्भपात को एक वैधानिक ढाँचे  के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है, जो महिलाओं की प्रजनन स्वायत्तता और चिकित्सा निगरानी के बीच संतुलन स्थापित करता है, बजाय इसके कि इसे एक असीमित मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए।
  • उद्गम: IPC, 1860 (धारा 312) ने महिलाओं का जीवन बचाने के उद्देश्य को छोड़कर गर्भपात को अपराध माना गया है।
  • हालिया संशोधन: MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत गर्भपात की अनुमति 20 सप्ताह तक एक डॉक्टर की राय पर दी जाती है, और 20–24 सप्ताह तक निर्दिष्ट वर्गों (दुष्कर्म पीड़ित, नाबालिग, विधवाएँ/तलाकशुदा महिलाएँ) के लिए अनुमति है।
  • MTP (संशोधन) अधिनियम, 2021 के प्रावधान
    • 20 सप्ताह तक: एक पंजीकृत चिकित्सक की राय पर गर्भपात की अनुमति।
    • 20–24 सप्ताह: निर्दिष्ट वर्गों (दुष्कर्म पीड़ित, नाबालिग आदि) के लिए दो डॉक्टरों की राय आवश्यक।
    • 24 सप्ताह से अधिक: भ्रूण असामान्यताओं के मामलों में मेडिकल बोर्ड की मंजूरी पर अनुमति।
    • व्यापक पहुँच: “पति” से “साथी” तक विस्तार, जिससे वैवाहिक स्थिति से परे पहुँच का विस्तार।

गर्भपात पर अन्य सर्वोच्च न्यायालय के आदेश

  • X बनाम प्रधान सचिव, भारत सरकार, एनसीटी दिल्ली (2022): न्यायालय ने कहा कि अविवाहित महिलाओं को 24 सप्ताह तक गर्भपात के समान अधिकार हैं और स्पष्ट किया कि MTP अधिनियम के तहत “दुष्कर्म” में वैवाहिक दुष्कर्म भी शामिल है।
  • XYZ बनाम गुजरात राज्य (2023): 25–26 सप्ताह के गर्भ की समाप्ति की अनुमति दी, यह मान्यता देते हुए कि अनचाहे गर्भ का जारी रहना गंभीर मानसिक पीड़ा उत्पन्न करता है।
  • गर्भपात के रिवर्सल पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश (2024): पुनः दोहराया कि गर्भवती महिला की सहमति या नाबालिग होने पर उसके अभिभावक की सहमति सर्वोपरि है और इसे किसी भी चरण में वापस लिया जा सकता है।
  • जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017): यह स्थापित किया कि प्रजनन संबंधी विकल्प अनुच्छेद-21 के तहत निजता, गरिमा और शारीरिक स्वायत्तता का हिस्सा हैं।

वैश्विक प्रथाएँ

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: डॉब्स वर्सस जैक्सन (2022) मामले के बाद गर्भपात पर प्रतिबंध, अब गर्भपात संघीय संवैधानिक अधिकार नहीं रहा, जिससे राज्यों में भिन्नता उत्पन्न हुई—कुछ राज्यों में लगभग पूर्ण प्रतिबंध और कुछ में विस्तारित पहुँच शामिल है।
  • फ्राँस: गर्भपात अनुरोध पर 14 सप्ताह तक कानूनी है और इसे स्पष्ट संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है, जो प्रजनन अधिकारों को मौलिक मानता है।
  • चीन: गर्भपात व्यापक रूप से कानूनी और सुलभ बना हुआ है, हालाँकि हाल के नीतिगत परिवर्तन गैर-चिकित्सीय गर्भपात को प्रोत्साहित नहीं करते, ताकि घटती प्रजनन दर का समाधान किया जा सके।
  • लैटिन अमेरिका (ग्रीन वेव): अर्जेंटीना, कोलंबिया और मैक्सिको में प्रगतिशील उदारीकरण हुआ है, जबकि अल-सल्वाडोर और होंडुरास में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है।
    • अर्जेंटीना में: किसी भी कारण से अनुरोध पर गर्भपात 14 सप्ताह तक कानूनी है। 14 सप्ताह के बाद, दुष्कर्म के मामलों में या माँ के जीवन/स्वास्थ्य पर जोखिम होने पर गर्भपात की अनुमति है।
  • पोलैंड: यूरोप के सबसे कठोर प्रावधानों में से एक, जहाँ गर्भपात केवल दुष्कर्म, विवाहेतर संबंध या महिला के जीवन पर जोखिम होने की स्थिति में ही अनुमति है।

सर्वोच्च न्यायालय का विकसित होता गर्भपात संबंधी न्यायशास्त्र महिलाओं की गरिमा, स्वायत्तता और मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखता है, और संवैधानिक नैतिकता को प्रक्रियात्मक कठोरता पर प्राथमिकता देता है।

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