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Lokesh Pal
February 10, 2026 05:13
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हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने एक नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी, जिससे मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत सांविधिक गर्भकाल की सीमाओं के परे प्रजनन स्वायत्तता को पुनः पुष्टि मिली।
सर्वोच्च न्यायालय का विकसित होता गर्भपात संबंधी न्यायशास्त्र महिलाओं की गरिमा, स्वायत्तता और मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखता है, और संवैधानिक नैतिकता को प्रक्रियात्मक कठोरता पर प्राथमिकता देता है।
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