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सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना

Lokesh Pal December 30, 2025 03:01 94 0

संदर्भ

भारत सरकार ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) विनिर्माण प्रोत्साहन योजना’ को स्वीकृति प्रदान की है।

REPM योजना के बारे में

  • प्रारंभ एवं नोडल मंत्रालय: भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा, दिसंबर 2025 में प्रारंभ।
  • वित्तीय परिव्यय: कुल ₹7,280 करोड़।
  • उद्देश्य: सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM)  (मुख्यतः NdFeB प्रकार) के निर्माण हेतु एकीकृत घरेलू विनिर्माण पारितंत्र की स्थापना करना।
    • आयात पर निर्भरता में कमी (वर्तमान में लगभग 100%, मुख्यतः चीन से)।
    • आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना (आत्मनिर्भर भारत)।

  • लक्षित क्षमता: प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन एकीकृत REPM  उत्पादन।
  • अवधि: प्रति लाभार्थी 7 वर्ष (स्थापना के लिए 2 वर्ष की प्रारंभिक अवधि और प्रोत्साहन के लिए 5 वर्ष)।
  • माँग परिप्रेक्ष्य: इलेक्ट्रिक व्हीकल, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के विस्तार के कारण वर्ष 2030 तक भारत की REPM खपत (2025 के स्तर की तुलना में) दोगुनी होने की संभावना।
    • वर्तमान वार्षिक माँग लगभग 4,000–5,000 टन, जो पूर्णतः आयातित है।

भारत का दुर्लभ मृदा खनिज संसाधन आधार

  • भारत में विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाने वाले दुर्लभ खनिजों का पर्याप्त भंडार है:
  • प्रमुख स्थान: तटीय समुद्री बालू एवं लाल बालू’: आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, महाराष्ट्र।
  • आंतरिक जलोढ़ क्षेत्र: पश्चिम बंगाल, झारखंड।

दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक के बारे में

  • दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध सबसे शक्तिशाली स्थायी चुम्बक होते हैं।
  • ये दुर्लभ मृदा तत्त्वों (आवर्त सारणी के 17 धातु तत्त्व) को लौह और बोरॉन जैसे अन्य तत्त्वों के साथ मिश्रित कर बनाए जाते हैं।
  • सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM): सिंटर्ड REPM, REPM की एक उप-श्रेणी हैं।
    • इन्हें सिंटरिंग प्रक्रिया द्वारा निर्मित किया जाता है, जिसमें सूक्ष्म दुर्लभ मृदा मिश्रधातु चूर्ण को संपीडित कर उसके गलनांक से कम ताप पर गर्म किया जाता है, जिससे ठोस और सघन चुंबक का निर्माण होता है।
    • ये सभी स्थायी चुंबकों में सर्वाधिक चुंबकीय शक्ति प्रदान करते हैं।

सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के प्रमुख प्रकार

  • नियोडिमियम (NdFeB) चुंबक: नियोडिमियम, लौह और बोरॉन से निर्मित होता है, जो सबसे शक्तिशाली और सर्वाधिक उपयोग में आने वाला चुंबक है। भारत की REPM योजना का मुख्य केंद्र।
  • समेरियम-कोबाल्ट चुंबक: समेरियम और कोबाल्ट से निर्मित। NdFeB की तुलना में थोड़े कम शक्तिशाली होते हैं, लेकिन उच्च तापमान पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं और अत्यधिक संक्षारण प्रतिरोधी होते हैं।

REPM के प्रमुख गुण

  • अत्यधिक चुंबकीय शक्ति: आकार की तुलना में सर्वाधिक शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं; एक छोटा चुंबक अपने वजन से सैकड़ों गुना अधिक भार उठा सकता है।
  • उच्च ऊर्जा उत्पाद: बड़ी मात्रा में चुंबकीय ऊर्जा संचित करते हैं, जो इनके प्रदर्शन का सबसे महत्त्वपूर्ण मानदंड है।
  • सघनता एवं दक्षता: उपकरणों के लघुकरण में सहायक, जैसे-हेडफोन या विद्युत वाहनों में छोटे और अधिक शक्तिशाली मोटर।

REPM के प्रमुख अनुप्रयोग

  • आधुनिक प्रौद्योगिकी में, विशेष रूप से लघुकरण, दक्षता और हरित ऊर्जा के लिए, REPM महत्त्वपूर्ण हैं:
    • इलेक्ट्रिक वाहन (EV): कुशल विद्युत रूपांतरण के लिए ट्रैक्शन मोटर्स में उपयोग किए जाते हैं।
    • पवन टरबाइन: नवीकरणीय ऊर्जा के लिए डायरेक्ट-ड्राइव जनरेटर में उपयोग किए जाते हैं।
    • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स: हार्ड ड्राइव, स्पीकर, हेडफोन, स्मार्टफोन।
    • अन्य: MRI मशीनें, एयरोस्पेस, रक्षा, उच्च दक्षता वाले मोटर और सेंसर।

वैश्विक आपूर्ति शृंखला की चुनौती

  • प्रमुख उत्पादक: चीन वर्तमान में वैश्विक आपूर्ति शृंखला का लगभग 90% नियंत्रित करता है—खनन, प्रसंस्करण से लेकर चुंबक निर्माण तक।
  • रणनीतिक संवेदनशीलता: यह संकेंद्रण अन्य देशों के लिए, विशेषकर रक्षा और हरित ऊर्जा जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में, गंभीर आपूर्ति जोखिम उत्पन्न करता है। यही मूल समस्या है जिसे भारत की REPM योजना संबोधित करना चाहती है।

दुर्लभ मृदा खनिज

  • परिभाषा: दुर्लभ मृदा खनिज 17 रासायनिक रूप से समान तत्त्वों का समूह हैं, जिनका उपयोग उच्च प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक उद्योगों में किया जाता है।

  • संरचना: इनमें 15 लैंथनाइड्स (La–Lu) के साथ-साथ स्कैंडियम (Sc) और यट्रियम (Y) शामिल हैं।
  • मुख्य गुण: विशिष्ट चुंबकीय, प्रकाशीय और विद्युत-रासायनिक गुण, जो इन्हें उन्नत प्रौद्योगिकियों में अपरिहार्य बनाते हैं।
  • प्रमुख खनिज: मोनाजाइट, बास्टनैसाइट और जेनोटाइम दुर्लभ मृदा युक्त प्रमुख खनिज हैं।

इन्हें “दुर्लभ मृदा” क्यों कहा जाता है?

  • इनमें से अनेक तत्त्व पृथ्वी की भूपर्पटी में अपेक्षाकृत प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, किंतु सघन और आर्थिक रूप से खनन योग्य निक्षेपों में बहुत कम मिलते हैं।
  • ऐतिहासिक रूप से ये ऑक्साइड रूप में खोजे गए थे, जिन्हें मृदा” कहा गया, जिससे इनका नामकरण हुआ।

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