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पिघलते हिमनद और समुद्री जलस्तर में वृद्धि

Lokesh Pal February 25, 2025 02:47 102 0

संदर्भ

नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार,  पिघलते ग्लेशियरों ने इस सदी में वैश्विक समुद्र स्तर में लगभग 2 सेमी. की वृद्धि की है।

समुद्र स्तर में वृद्धि (Sea Level Rise) 

  • समुद्र स्तर में वृद्धि, ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों के कारण विश्व के महासागरों के स्तर में वृद्धि को संदर्भित करता है।
  • समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण
    • हिमनद और हिम आवरण का पिघलना: ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमनद और हिम आवरण तेजी से पिघल रहा है।
      • वर्ष 2000 के बाद से, क्षेत्रीय स्तर पर हिमनदों की 2% से 39% और वैश्विक स्तर पर 5% बर्फ समाप्त हो गई है, जो ग्रीनलैंड एवं अंटार्कटिका से समाप्त हो चुकी बर्फ से 18% अधिक है।
    • समुद्री जल का तापीय विस्तार: तापीय विस्तार तब होता है जब वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण जल गर्म होकर प्रसरित होता है।
      • जैसे-जैसे महासागर अधिक ऊष्मा अवशोषित करते हैं, उनका आयतन बढ़ता जाता है, जिससे समुद्र के स्तर में विस्तार होता है।
      • गर्म महासागरों के कारण समुद्री जल का विस्तार होता है, जो वैश्विक समुद्र स्तर में वृद्धि का एक तिहाई से आधा हिस्सा है।

हिमनादों (ग्लेशियरों) के बारे में

  • महासागरों के गर्म होने के बाद ग्लेशियर वैश्विक समुद्र स्तर में वृद्धि के लिए दूसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता हैं।
  • वे जलवायु परिवर्तन के प्राकृतिक संकेतक भी हैं और कई प्रकार से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेष रूप से शुष्क मौसम के दौरान महत्त्वपूर्ण जल संसाधन प्रदान करते हैं।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

  • हिम की हानि: पिछले 25 वर्षों में ग्लेशियरों से वार्षिक रूप से 273 बिलियन टन हिम पिघल चुकी है।
    • वर्ष 2000 से वर्ष 2023 के बीच, विश्व के ग्लेशियरों से 6.542 ट्रिलियन टन हिम पिघली है, जिससे समुद्र के स्तर में 18 मिमी. की वृद्धि हुई है।
  • समुद्र स्तर में वृद्धि की दर: वर्ष 1880 से अब तक वैश्विक समुद्र स्तर में 21 सेमी. की वृद्धि हुई है।
    • यह दर 0.18 सेमी/वर्ष (वर्ष 1993) से बढ़कर 0.42 सेमी/वर्ष (वर्ष 2024) हो गई है।
    • वर्ष 1993 से वर्ष 2024 के मध्य समुद्र स्तर में 10 सेमी से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • क्षेत्रीय विविधताएँ: विश्व मौसम विज्ञान संगठन, 2022 के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में प्रति वर्ष 2.5 मिमी. की औसत से अधिक वृद्धि देखी जा रही है।
    • महासागरीय तापमान एवं लवणता में परिवर्तन जैसे स्थानीय कारक समुद्र स्तर में असमान वृद्धि का कारण बनते हैं।
  • भारत पर प्रभाव
    • मुंबई: समुद्री जलस्तर में 4.44 सेमी. की वृद्धि (वर्ष 1987-2021) देखी गई, जिससे यह सबसे अधिक प्रभावित भारतीय शहर बन गया।
    • अन्य प्रभावित शहर: हल्दिया, पश्चिम बंगाल, विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश और कोच्चि, केरल।

समुद्र स्तर में वृद्धि से संबंधित चिंताएँ एवं कारण

  • तटीय बाढ़ एवं भूमि क्षरण: बाढ़ और तटीय क्षरण में वृद्धि से तटीय समुदाय विस्थापित हो सकते हैं।
    • वर्ष 1990 और वर्ष 2016 के मध्य पश्चिम बंगाल तट पर 99 वर्ग किलोमीटर भूमि नष्ट हो गई (NCCR  रिपोर्ट, 2018)।
  • तटीय आबादी पर प्रभाव: वर्ष 2018 में विश्व की 29% आबादी तटीय क्षेत्र से 50 किमी. के दायरे में निवास कर रही थी।
    • वैज्ञानिक रिपोर्ट, 2024 के अनुसार, विश्व भर में 15% लोग तटों से सिर्फ 10 किमी निवास करते हैं।
  • तूफानी झंझा महोर्मि (Storm Surges): समुद्र का बढ़ता जल स्तर उष्णकटिबंधीय चक्रवात की तीव्रता को बढ़ाता है, जिससे बाढ़ एवं क्षति की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
  • तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा: मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ और लवणीय दलदलों का क्षरण हो रहा है।
    • समुद्र का जलस्तर बढ़ने से मीठे जल के स्रोत दूषित हो रहे हैं, जिससे कृषि एवं पेयजल  पर प्रभाव पड़ रहा है।
  • भविष्य के अनुमान: यदि ग्रीन हाउस उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो वर्ष 2050 तक समुद्र का स्तर 20 सेमी. तक बढ़ सकता है जो  पिछली सदी की तुलना में दोगुना होगा। 
    • इसके परिणामस्वरूप विश्व भर में बाढ़ की संभावना और अधिक तीव्र होगी।

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