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Lokesh Pal
January 16, 2026 03:50
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हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PCA) की धारा 17A की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर विभाजित निर्णय सुनाया।
धारा 17A पर बहस प्रशासनिक संरक्षण और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को दर्शाती है। सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ का निर्णय भारत की भ्रष्टाचार-विरोधी व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण होगा। सुरक्षा उपायों को कार्यपालिका नियंत्रण से हटाकर स्वतंत्र निगरानी की ओर ले जाना होगा, यह सुनिश्चित करते हुए कि ईमानदार अधिकारियों को मिलने वाला संरक्षण भ्रष्टों के लिए प्रतिरक्षा न बन जाए।
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