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सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट

Lokesh Pal February 05, 2026 03:19 7 0

संदर्भ

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), चाँदीपुर से ‘सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट’ (SFDR) तकनीक का सफल उड़ान प्रदर्शन किया।

संबंधित तथ्य

  • भारत इस उन्नत प्रणोदन तकनीक के साथ विशिष्ट देशों के समूह में शामिल हो गया है।

रैमजेट इंजन के बारे में

  • कार्य सिद्धांत: रैमजेट एक एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन है, जो वाहन की आगे की गति का उपयोग करके आने वाली वायु को संपीडित करता है। इसमें ‘एक्सियल’ या ‘सेंट्रीफ्यूगल कंप्रेसर’ का उपयोग नहीं होता है।
  • प्रक्षेपण आवश्यकता: रैमजेट चालित वाहनों को इंजन के सक्रिय होने से पूर्व आवश्यक गति प्राप्त करने के लिए रॉकेट बूस्टर जैसी सहायता की आवश्यकता होती है।

सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक के बारे में

  • ‘सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट’ (SFDR) एक ‘एडवांस एयर-ब्रीदिंग मिसाइल प्रोपल्सन टेक्नोलॉजी’ है, जिसमें मिसाइल प्रारंभिक त्वरण के लिए बूस्टर का उपयोग करती है और फिर वायुमंडलीय ऑक्सीजन से संचालित रैमजेट दहन कक्ष के माध्यम से, डक्ट प्रणाली में ठोस ईंधन का दहन कर उच्च गति वाली उड़ान बनाए रखती है।

  • विकास एजेंसी: यह प्रणाली DRDO द्वारा विकसित की जा रही है, जिसका नेतृत्व हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) कर रही है।
  • युद्धक भूमिका: यह लड़ाकू विमानों को बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) नौसैनिक युद्ध में निर्णायक बढ़त प्रदान करती है।

वायु युद्ध में SFDR निर्णायक क्यों है?

  • निरंतर सुपरसोनिक उड़ान: पारंपरिक ठोस रॉकेट मोटरों के विपरीत, जो जल्दी कार्यहीन हो जाती हैं, SFDR प्रणोदन मिसाइलों को लंबे समय तक मैक 2 से मैक 3.8 की गति बनाए रखने की अनुमति देता है।
  • विस्तारित आक्रमण सीमा: SFDR से सुसज्जित मिसाइलें 50 किमी. से 340 किमी. की दूरी तक गतिशील हवाई लक्ष्यों पर हमला कर सकती हैं।
  • संचालन लचीलापन: यह प्रणाली समुद्र तल से 20 किमी ऊँचाई तक कार्य कर सकती है, जिसमें 10 किमी. की ऊर्ध्वाधर ‘स्नैप-अप’ या ‘स्नैप-डाउन’ क्षमता होती है।
  • बढ़ी हुई मारक क्षमता: SFDR दुश्मन विमान को चारों तरफ से घेर लेता है और तेजी से पीछा कर सकता है व मुड़ सकता है, इसलिए उसका बचना बहुत मुश्किल हो जाता है।

SFDR प्रणोदन प्रणाली की कार्यप्रणाली

  • बूस्टर चरण: मिसाइल को पहले नोजल-रहित बूस्टर का उपयोग करके सुपरसोनिक गति तक त्वरित किया जाता है, जिससे तीन सेकंड के भीतर रैमजेट संचालन में तेजी से संक्रमण संभव हो पाता है।
    • प्रणोदक ग्रेन को दक्षता के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है और यह एयर-लॉन्च मिसाइलों के लिए ‘नो-इजेक्ट’ संबंधी सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करता है। प्रणोदक को हाई एनर्जी मटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL), पुणे द्वारा विकसित किया गया है।
  • सस्टेनर चरण: सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट सस्टेनर लंबे समय तक संचालित उड़ान का समर्थन करता है।
    • SFDR में बोरॉन-आधारित उच्च-ऊर्जा ठोस ईंधन का उपयोग किया जाता है। प्रारंभ में आंशिक दहन होता है, तथा बाद में वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करते हुए रैमजेट कक्ष में पूर्ण दहन होता है, जिससे समुद्र तल पर 50 सेकंड और अधिक ऊँचाई पर 200 सेकंड तक संचालित उड़ान संभव होती है।
  • थ्रस्ट नियंत्रण: हॉट गैस वाल्व दहन प्रवाह को नियंत्रित करता है, जिससे गति और ऊँचाई के अनुसार थ्रस्ट समायोजित किया जाता है।
    • यह 1100K से 1400K तापमान के बीच कार्य करता है और इसमें ‘कार्बन-कार्बन कंपोजिट’, टंग्स्टन-कॉपर मिश्रधातु तथा मरेजिंग स्टील जैसे उन्नत पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
  • एयर इनटेक संचालन: ‘चीक-माउंटेड टाइटेनियम-अलॉय’ एयर इनटेक उड़ान के दौरान पायरो तकनीकी तंत्र द्वारा खुलते हैं और ‘थ्री-रैंप’ डिजाइन के माध्यम से आने वाली वायु को संपीडित करते हैं।
  • उन्नत ऑनबोर्ड प्रणालियाँ: मिसाइल में ऑनबोर्ड कंप्यूटर, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, रेडियो-फ्रीक्वेंसी सीकर, जैम-प्रतिरोधी डेटा लिंक, हाई-टॉर्क इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्ट्यूएटर और कॉम्पैक्ट लीथियम थर्मल बैटरी एकीकृत होती हैं।
  • वारहेड और फ्यूज: घातकता के लिए, मिसाइल में प्रॉक्सिमिटी फ्यूज और लक्ष्य विनाश को अधिकतम करने के लिए डिजाइन किया गया फ्रैगमेंटेशन वारहेड होता है।

SFDR बनाम पारंपरिक रॉकेट मोटर

  • वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग: SFDR संचालित मिसाइलें क्रूज चरण के दौरान ऑक्सीडाइजर नहीं ले जातीं, क्योंकि रैमजेट वायु से ऑक्सीजन ग्रहण करता है, जबकि पारंपरिक सॉलिड रॉकेट ईंधन और ऑक्सीडाइजर दोनों ले जाती हैं।

परीक्षण का महत्त्व

  • मिसाइल क्षमता में वृद्धि: SFDR तकनीक लंबी दूरी की ‘एयर-टू-एयर’ मिसाइलों के लिए एक महत्त्वपूर्ण क्षमता है, जो युद्ध प्रभावशीलता को बढ़ाती है।
  • सामरिक बढ़त: यह अधिक दूरी, गति और ‘एंड-गेम मैन्युवरबिलिटी’ प्रदान करके विरोधियों के विरुद्ध निर्णायक सामरिक बढ़त देता है।
  • क्षमता में वृद्धि: यह तकनीक भारत की वायु युद्ध क्षमता को मजबूत करती है और रक्षा तैयारी में योगदान देती है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता: यह उन्नत मिसाइल प्रणोदन तकनीकों में भारत की आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाती है।
  • रक्षा में आत्मनिर्भर भारत: यह स्वदेशी रक्षा अनुसंधान, विकास और उद्योग भागीदारी को सुदृढ़ करती है।

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