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स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर, 2026

Lokesh Pal January 27, 2026 03:01 17 0

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) नेस्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर’ 2026 (State of Finance for Nature 2026) रिपोर्ट जारी की है।

स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर’ रिपोर्ट के बारे में 

  • अवलोकन: ‘स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर’ (SFN) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में, उसके साझेदारों (जैसे- इकोनॉमिक्स ऑफ लैंड डिग्रेडेशन इनिशिएटिव और विविड इकोनॉमिक्स) के सहयोग से तैयार की जाने वाली एक वार्षिक वैश्विक आकलन रिपोर्ट है।
  • पहला प्रकाशन: वर्ष 2021 में,स्टेट ऑफ फाइनेंस फॉर नेचर: ट्रिपलिंग इन्वेस्टमेंट्स इन नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस बाय 2030” शीर्षक से।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • प्राकृतिक रूप से नकारात्मक गतिविधियों हेतु वित्तीयन: वर्ष 2023 में, US$7.3 ट्रिलियन प्राकृतिक रूप से नकारात्मक गतिविधियों में प्रयुक्त हुआ, जबकि केवल US$220 बिलियन प्रकृति-आधारित समाधान (NbS) में गया।
    • नकारात्मक बनाम सकारात्मक वित्त का अनुपात: 30:1 से अधिक।
  • ट्रिपल प्लैनेटरी’ संकट: UNEP ने चेतावनी दी कि यह असंतुलन जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता क्षरण और प्रदूषण के ट्रिपल प्लैनेटरी’ संकट (Triple Planetary Crisis) को बढ़ावा दे रहा है।

प्राकृतिक रूप से सकारात्मक’ और ‘प्राकृतिक रूप से नकारात्मक’ वित्त

  • प्राकृतिक रूप से सकारात्मक’ वित्त से तात्पर्य उन निवेशों से है, जो पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा, पुनर्स्थापन अथवा सतत् प्रबंधन में सहायक होते हैं, जैसे- प्रकृति-आधारित समाधान (NbS)
  • इसके विपरीत,  ‘प्राकृतिक रूप से नकारात्मक’ वित्त में वे निवेश और सब्सिडियाँ शामिल हैं जो प्राकृतिक पूँजी को क्षति पहुँचाती हैं, जैसे- पर्यावरण-हानिकारक सब्सिडियाँ और संसाधन-गहन औद्योगिक गतिविधियाँ।

  • प्राकृतिक रूप से नकारात्मक’ वित्त के स्रोत
    • निजी पूँजी: लगभग $5 ट्रिलियन प्राकृतिक रूप से नकारात्मक’ वित्त निजी निवेश से प्राप्त हुआ, जो उपयोगिताएँ, औद्योगिक क्षेत्र, ऊर्जा और बुनियादी सामग्री जैसे उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में केंद्रित था।
    • हानिकारक सब्सिडियाँ: अतिरिक्त $2.4 ट्रिलियन पर्यावरण के लिए हानिकारक सब्सिडियों के रूप में प्रवाहित हुआ, जो मुख्यतः जीवाश्म ईंधन, कृषि, जल उपयोग तथा परिवहन और निर्माण क्षेत्रों को समर्थन देता है।
    • जीवाश्म ईंधन को सबसे अधिक हिस्सा प्राप्त हुआ, जो कुल सब्सिडियों का 47 प्रतिशत था, इसके बाद कृषि और जल उपयोग का हिस्सा 17-17 प्रतिशत था।

  • निवेश अंतर: UNEP ने रेखांकित किया कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों (रियो कन्वेंशन) और जैव-विविधता प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए NbS में निवेश को न्यूनतम 2.5 गुना बढ़ाकर वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष $571 बिलियन करना आवश्यक है।

  • सकारात्मक प्रगति के क्षेत्र
    • हानिकारक निजी निवेश में कमी: तेल और गैस सहित प्रकृति के लिए सबसे हानिकारक क्षेत्रों में निजी निवेश वर्ष 2020 में $990 बिलियन से घटकर वर्ष 2023 में $519 बिलियन रह गया, अर्थात् 48 प्रतिशत की गिरावट हुई।
    • NbS वित्त में वृद्धि: NbS के लिए सार्वजनिक और निजी वित्त प्रवाह वर्ष 2023 में $220 बिलियन तक पहुँचा, जो वर्ष 2022 की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है।
  • नेचर ट्रांजिशन X-कर्व (Nature Transition X-Curve)
    • यह रिपोर्टनेचर ट्रांजिशन X-कर्व” प्रस्तुत करती है, जो सरकारों और व्यवसायों के लिए एक व्यावहारिक ढाँचा है:
      • प्राकृतिक रूप से नकारात्मक’ वित्त को चरणबद्ध रूप से समाप्त करना।
      • प्राकृतिक रूप से सकारात्मक’ वित्त तथा NbS निवेशों का विस्तार करना।
    • पृथक परियोजनाओं के स्थान पर प्रणालीगत आर्थिक परिवर्तन पर बल।

मुख्य अनुशंसाएँ

  • सब्सिडी सुधार: पर्यावरण-हानिकारक सब्सिडियों का सुधार और पुनःउद्देश्यीकरण, नेचर ट्रांजिशन के वित्तपोषण का सबसे प्रभावी साधन माना गया है।
    • NbS, जलवायु अनुकूलन और जैव-विविधता संरक्षण की ओर बचत का पुनर्निर्देशन।
  • नियामक संरेखण: सरकारों को राजकोषीय नीतियों, विनियमों और प्रोत्साहनों को प्रकृति तथा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के वास्तविक आर्थिक मूल्य के अनुरूप बनाना चाहिए।
    • NbS को पर्यावरणीय अनुदान नहीं, बल्कि आर्थिक अवसंरचना के रूप में देखा जाना चाहिए।
  • प्रकटीकरण और पारदर्शिता: कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को प्रकृति-संबंधी निर्भरताओं, प्रभावों, जोखिमों और अवसरों का प्रकटीकरण करना अनिवार्य किया जाए।
    • निवेश व्यवहार और पूँजी आवंटन में परिवर्तन के लिए यह आवश्यक है।
  • संयुक्त पूँजी और जोखिम न्यूनीकरण: निजी पूँजी को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने के लिए संयुक्त पूँजी तंत्रों और जोखिम न्यूनीकरण उपकरणों का विस्तार आवश्यक है।

प्रकृति आधारित समाधान (NbS) के बारे में

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा के अनुसार, प्रकृति-आधारित समाधान वे क्रियाएँ हैं, जो प्राकृतिक या संशोधित पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा, संरक्षण, पुनर्स्थापन, सतत् उपयोग और प्रबंधन करती हैं, तथा सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी व अनुकूलनशील समाधान प्रदान करती हैं, साथ ही मानव कल्याण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ, लचीलापन और जैव-विविधता लाभ सुनिश्चित करती हैं।
  • प्रकृति आधारित समाधानों का महत्त्व
    • जलवायु और जैव-विविधता लाभ: NbS जलवायु परिवर्तन के शमन, जैव-विविधता क्षरण को रोकने और पारिस्थितिकी तंत्र की सहनशीलता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, साथ ही मानव कल्याण में सुधार करते हैं।
    • परस्पर सहायक लाभ: कुछ NbS जलवायु, जैव-विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र और आजीविका के लिए एक साथ लाभ प्रदान करते हैं।
      • उदाहरण के लिए, पीटलैंड्स का बेहतर प्रबंधन जलवायु शमन और अनुकूलन में सहायक होता है, साथ ही आवास संरक्षण और मृदा उर्वरता बनाए रखता है।
    • लागत-प्रभावशीलता: प्रकृति आधारित समाधान लागत-प्रभावी निवेश विकल्प हैं, जो विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के माध्यम से दीर्घकालिक पारिस्थितिकी और आर्थिक प्रतिफल प्रदान करते हैं।

प्रकृति आधारित  समाधानों की दिशा में प्रमुख पहलें

  • कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव-विविधता रूपरेखा (GBF) का उद्देश्य वर्ष 2030 तक वैश्विक भूमि और समुद्री क्षेत्रों के 30 प्रतिशत की रक्षा करना है तथा हानिकारक सब्सिडियों में प्रति वर्ष USD 500 बिलियन की कमी का आह्वान करता है।
  • MISHTI योजना (मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटैट्स एंड टैन्जिबल इनकम्स) भारत के तटीय क्षेत्रों और लवणीय क्षेत्रों में मैंग्रोव रोपण पर केंद्रित है, जिससे पारिस्थितिकी अनुकूलन और आजीविका दोनों सुदृढ़ होते हैं।
  • अमृत धरोहर योजना समुदाय की भागीदारी और सतत् आजीविका के एकीकरण के माध्यम से रामसर-नामित आर्द्रभूमियों के संरक्षण का लक्ष्य रखती है।

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