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सुदर्शन चक्र पहल

Lokesh Pal January 03, 2026 04:00 51 0

संदर्भ

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सुदर्शन चक्र पहल में DRDO की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

सुदर्शन चक्र पहल के बारे में

  • उद्देश्य
    • सुदर्शन चक्र पहल का उद्देश्य भारत के महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचों और सैन्य संपत्तियों को व्यापक हवाई सुरक्षा प्रदान करना है।
    • यह पहल उन्नत हवाई रक्षा प्रणालियों पर केंद्रित होगी, जिससे देश उभरते हवाई खतरों के विरुद्ध बेहतर रूप से तैयार रह सके।
    • इसका लक्ष्य वर्ष 2035 तक स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली विकसित करना है, ताकि शत्रु के हमलों को अप्रभावी किया जा सके तथा प्रभावी ढंग से जवाबी कार्रवाई की जा सके।
  • कवरेज: अस्पतालों, रेलवे, धार्मिक केंद्रों और अन्य महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे सहित रणनीतिक तथा नागरिक क्षेत्र।
  • प्रेरणा: भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र के नाम पर रखा गया है, जो एक सुरक्षा कवच का प्रतीक है।
  • समय-सीमा: वर्ष 2035 तक पूर्ण परिचालन क्षमता प्राप्त करना।
  • स्वदेशी विकास: भारत कीमेक इन इंडिया’ पहल के तहत पूरी तरह से विकसित, सुदर्शन चक्र अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, निर्देशित-ऊर्जा हथियार, लेजर और ड्रोन को शामिल करते हुए घरेलू अनुसंधान, विकास तथा विनिर्माण पर निर्भर करेगा।

सुदर्शन चक्र पहल की क्षमताएँ और संरचना

सुदर्शन चक्र पहल’ संबंधी शुद्ध विवरण अभी भी गोपनीय हैं, लेकिन इसकी अवधारणात्मक रूपरेखा से पता चलता है कि यह इजरायल केआयरन डोम’ के समान एक अत्यधिक उन्नत, बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली के रूप में कार्य करेगा, लेकिन इसकी क्षमताएँ कहीं अधिक उन्नत होंगी।

  • निगरानी और पहचान: व्यापक कवरेज और प्रारंभिक खतरे की पहचान के लिए लंबी दूरी के रडार, अंतरिक्ष-आधारित सेंसर तथा नागरिक-सैन्य रडार संलयन का उपयोग किया जाता है।
  • गतिज रक्षा: यह प्रणाली विभिन्न दूरियों पर मिसाइलों, UAVs और विमानों को निष्क्रिय करने के लिए आकाश-NG, MRSAM और भविष्य के हाइपरसोनिक इंटरसेप्टर पर निर्भर करेगी।
  • रक्षा सहयोग: इंटरसेप्टर के अलावा, आने वाले खतरों को बाधित या निष्क्रिय करने के लिए निर्देशित-ऊर्जा हथियार, इलेक्ट्रॉनिक वॉर और साइबर रोधी उपायों का उपयोग किया जाएगा।
  • एकीकृत कमान और नियंत्रण (C2) नेटवर्क: इस प्रणाली में AI-सक्षम निर्णय लेने वाला ढाँचा होगा, जो त्वरित और समन्वित प्रतिक्रियाओं के लिए भारत की तीनों सेनाओं के बीच निर्बाध समन्वय की अनुमति देगा।
  • नागरिक सुरक्षा स्तर: इस मिशन में महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे और शहरी केंद्रों की मजबूती सुनिश्चित करने के उपाय शामिल होंगे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नागरिक आबादी की सुरक्षा प्रदान करेंगे।
  • वैश्विक तुलनाएँ: इजरायल के आयरन डोम और प्रस्तावित अमेरिकी गोल्डन डोम के समान, सुदर्शन चक्र को भारत की विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा, जिसमें भविष्य के लिए तैयार उन्नत सुविधाएँ होंगी।

विश्व में वायु रक्षा प्रणालियाँ

  • रूस: S-400 ट्रायंफ, S-500 प्रोमेतेय
  • अमेरिका: पैट्रियट (PAC-3), THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस)
  • इजराइल: आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग
  • चीन: HQ-9, HQ-19।

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