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Lokesh Pal
January 07, 2026 03:24
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हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी, जबकि पाँच सह-आरोपियों को जमानत दे दी, जिससे कठोर वैधानिक जमानत मानकों को और अधिक सुदृढ़ता प्राप्त हुई।


सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देता है, साथ ही लोकतांत्रिक ढाँचे में लंबे समय तक हिरासत, सीमित न्यायिक विवेक और शांतिपूर्ण असहमति के संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करते हुए UAPA के तहत जमानत प्रतिबंधों को मजबूत करता है।
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