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Lokesh Pal
April 03, 2025 03:36
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हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने पर्यावरण न्यायशास्त्र में पर्यावरण-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने में भारत की अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला है।
कई देशों ने प्रकृति के अधिकारों को मान्यता देने वाले कानूनी ढाँचे को अपनाया है तथा पारिस्थितिकी तंत्रों को शोषण से बचाने के लिए उन्हें कानूनी व्यक्तित्व के रूप में मान्यता प्रदान की है।
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपनाया गया पर्यावरण-केंद्रित कानूनी दृष्टिकोण मानवीय हितों से परे पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़ते वैश्विक रुझान को दर्शाता है। प्रकृति के अंतर्निहित अधिकारों को मान्यता देकर, भारत और अन्य राष्ट्र जलवायु परिवर्तन से निपटने, जैव विविधता की रक्षा करने तथा सतत् विकास सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखते हैं। हालाँकि, आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को संतुलित करना एक चुनौती बनी हुई है, जिसके लिए निरंतर कानूनी और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है।
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