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‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) अधिनियम, 2025

Lokesh Pal December 29, 2025 02:58 116 0

संदर्भ 

SHANTI अधिनियम एक ऐतिहासिक सुधार है, जो परमाणु ऊर्जा पर छह दशक पुराने सरकारी  एकाधिकार को समाप्त करता है, जिसका उद्देश्य जलवायु और ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निजी निवेश को आकर्षित करना है।

‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) अधिनियम, 2025

  • मुख्य उद्देश्य: भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी नवाचार के लिए परमाणु ऊर्जा की क्षमता को साकार करना।
  • प्रमुख सुधार
    • राज्य एकाधिकार का अंत करते हुए निजी क्षेत्र के निवेश के लिए लाइसेंस-आधारित मार्ग प्रशस्त करना।
    • परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को क्षेत्रीय नियामक के रूप में स्वतंत्र वैधानिक आधार प्रदान करना।
    • असैन्य परमाणु दायित्व ढाँचे का अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पुनर्गठन, जिससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के लिए प्रमुख बाधा दूर हो।

वर्तमान कानून में दायित्व से संबंधित समस्याएँ

  • वर्ष 2010 की परमाणु क्षति के लिए असैन्य दायित्व अधिनियम में ऐसा प्रावधान था, जो संयंत्र संचालकों को आपूर्तिकर्ताओं पर मुकदमा करने की अनुमति देता था।
    • यह वैश्विक मानकों से भिन्न था और प्रमुख विदेशी कंपनियों को निवेश से हतोत्साहित करता था।
  • SHANTI अधिनियम में परिवर्तन: अब संचालक द्वारा आपूर्तिकर्ता के विरुद्ध दावा केवल तभी किया जा सकता है, जब यह स्पष्ट रूप से अनुबंध में उल्लेखित हो या घटना जानबूझकर क्षति पहुँचाने के उद्देश्य से की गई हो।
    • यह परिवर्तन भारत को अंतरराष्ट्रीय दायित्व नियमों के अनुरूप लाता है और कोव्वाडा तथा जैतापुर जैसी अवरुद्ध हुई परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने की संभावना बढ़ाता है।
  • शेष अंतराल: इस अधिनियम में ‘आपूर्तिकर्ता’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, जिससे जटिल परमाणु आपूर्ति शृंखला में उत्तरदायित्व को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी रह सकती है।

SHANTI अधिनियम में शेष अनसुलझे मुद्दे

  • अस्पष्ट प्रमुख शब्द: ‘संवेदनशील’ गतिविधियाँ, ‘रणनीतिक प्रकृति’ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाव’ जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है।
    • इससे अनुसंधान निवेश, विशेषकर लघु मॉड्यूलर रिएक्टर जैसी नई तकनीकों में, बाधा उत्पन्न हो सकती है।
  • नियामकीय अनिश्चितता: अधिनियम ‘रणनीतिक’ गतिविधियों के लिए अतिरिक्त नियामक निकाय बनाने की अनुमति देता है, परंतु इसके स्पष्ट मानदंड निर्धारित नहीं करता है। इससे भविष्य की परियोजनाओं पर लागू नियमों को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है।
  • नियामक की स्वतंत्रता: यद्यपि परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा दिया गया है, किंतु इसके सदस्यों के चयन की समिति सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा गठित की जाती है।
    • चयन प्रक्रिया में स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने से इसकी स्वायत्तता की धारणा और सुदृढ़ हो सकती है।

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड  (AERB)

  • परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड भारत में सभी असैन्य परमाणु एवं विकिरण सुविधाओं का राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण है।
  • मुख्य दायित्व: आयनीकरण विकिरण और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना, ताकि मानव और पर्यावरण की सुरक्षा हो।
  • प्रमुख नियामकीय कार्य
    • परमाणु विद्युत संयंत्रों, अनुसंधान रिएक्टरों तथा विकिरण उपयोग करने वाली सुविधाओं के लिए अनुमतियाँ और लाइसेंस प्रदान करना।
    • सुरक्षा संहिताएँ, मार्गदर्शिकाएँ और मानक विकसित करना तथा उनका प्रवर्तन करना।
    • परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा समीक्षा और निरीक्षण करना।
  • पूर्व स्थिति: SHANTI अधिनियम से पहले, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड परमाणु ऊर्जा आयोग के अधीन एक कार्यकारी निकाय के रूप में कार्य करता था।
  • नवीन स्थिति: SHANTI अधिनियम द्वारा इसे स्वतंत्र वैधानिक आधार प्रदान किया गया है।
  • मुख्यालय: मुंबई।

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