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स्विटजरलैंड, लिकटेंस्टीन द्वारा भारत के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि का समर्थन

Lokesh Pal February 26, 2025 02:12 10 0

संदर्भ

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (European Free Trade Association-EFTA) के चार सदस्यों में से दो, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन, भारत के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty-BIT) करने का समर्थन कर रहे हैं। 

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (European Free Trade Association-EFTA)

  • परिचय: यह आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विटजरलैंड द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एक अंतर-सरकारी संगठन है।
    • स्टॉकहोम कन्वेंशन के माध्यम से वर्ष 1960 में स्थापित, इस संगठन का उद्देश्य यूरोप में आर्थिक सहयोग और मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना है।
  • सदस्य देश: EFTA में वर्तमान में स्विटजरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।
    • वे यूरोपीय संघ का हिस्सा नहीं हैं।
  • भारत और EFTA: यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और चीन के बाद भारत EFTA का पाँचवाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका कुल द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2023 में 25 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया।
    • EFTA यूरोप में तीन (अन्य दो EU और UK) में से एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक ब्लॉक है।
    • EFTA देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, उसके बाद नॉर्वे का स्थान है।

पृष्ठभूमि

  • EFTA व्यापार समझौता: EFTA राष्ट्रों ने नए हस्ताक्षरित व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (Trade and Economic Partnership Agreement-TEPA) के हिस्से के रूप में अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है।
    • हालाँकि व्यापार समझौता आर्थिक सहयोग पर केंद्रित था, लेकिन BIT प्रारंभ में चर्चा का हिस्सा नहीं था। 
    • हालाँकि, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टीन अब भारत में परिचालन करने वाली अपनी कंपनियों के लिए बेहतर निवेश संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए BIT पर जोर दे रहे हैं।

द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) के बारे में

  • द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) एक पारस्परिक समझौता है जो एक राष्ट्र के नागरिकों और कंपनियों द्वारा दूसरे राष्ट्र में निजी निवेश के लिए नियम और शर्तें स्थापित करता है।
  • भारत द्वारा पहली BIT पर 14 मार्च, 1994 को हस्ताक्षर किए गए थे।
  • BIT की कुछ विशेषताएँ
    • निवेशक संरक्षण: BITs आमतौर पर अनुचित व्यवहार, बिना मुआवजे के अधिग्रहण और मनमाने विनियामक परिवर्तनों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करते हैं।
    • गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार: यह सुनिश्चित करता है कि विदेशी निवेशकों के साथ मेजबान देश की कानूनी प्रणाली के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से व्यवहार किया जाए।
    • मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) खंड: यह गारंटी देता है कि निवेशकों को किसी अन्य देश के निवेशकों को दिए जाने वाले व्यवहार से कम अनुकूल व्यवहार प्राप्त नहीं होगा।
    • राष्ट्रीय व्यवहार: इसके अंतर्गत यह आवश्यक है कि विदेशी निवेशकों के साथ समान परिस्थितियों में घरेलू निवेशकों के समान व्यवहार किया जाए।
    • निवेशक राज्य विवाद निपटान (Investor State Dispute Settlement- ISDS): अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता आदि शुरू करने से पहले निवेशकों को स्थानीय उपायों का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।

स्विटजरलैंड और लिकटेंस्टीन के लिए द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) की आवश्यकता

  • DTAA में MFN क्लॉज का निलंबन: दिसंबर 2024 में, स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ दोहरे कराधान अपवंचन समझौते (DTAA) में सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) क्लॉज को निलंबित कर दिया।
  • भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का प्रभाव: निलंबन भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हुआ, जिसमें कहा गया था कि DTAA प्रवर्तन के लिए आयकर अधिनियम के तहत अधिसूचना की आवश्यकता होती है।
    • इससे नेस्ले सहित भारत में कार्य करने वाली स्विस कंपनियों पर अधिक कर आरोपित कर गए।
  • निवेश संरक्षण एवं स्थिरता: BIT स्विटजरलैंड और लिकटेंस्टीन के निवेशकों को अधिक कानूनी सुरक्षा और पूर्वानुमान प्रदान करेगा तथा कर विवादों से संबंधित चिंताओं को दूर करेगा और एक स्थिर निवेश वातावरण सुनिश्चित करेगा।

भारत का BIT फ्रेमवर्क

  • भारत ने अरबों डॉलर के अंतरराष्ट्रीय विवादों में प्रतिकूल निर्णयों के कारण वर्ष 1993 के मॉडल पर आधारित अपनी पुरानी द्विपक्षीय निवेश संधियों (BIT) को रद्द कर दिया।
  • इसका समाधान करने के लिए, भारत ने वर्ष 2016 में एक रूढ़िवादी BIT मॉडल पेश किया, जिसमें निवेशक-राज्य विवादों में निवेशकों के बजाय राज्य को प्राथमिकता दी गई, जिसमें ‘स्थानीय उपायों की समाप्ति’ खंड भी शामिल है।
  • हालाँकि, इस मॉडल की पश्चिमी व्यापार भागीदारों द्वारा अत्यधिक प्रतिबंधात्मक होने के कारण आलोचना की गई है।

निवेशक-अनुकूल BIT की ओर भारत का रुख

  • भारत ने BIT के प्रति अपने दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत दिया है और केंद्रीय बजट में BIT ढाँचे को नया रूप देने की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया है।
  • नए BIT में अपेक्षित प्रमुख बदलावों में शामिल हैं: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए बेहतर सुरक्षा इकाई-आधारित सुरक्षा और अधिक निवेशक-अनुकूल निवेश मानदंड।

स्विटजरलैंड और लिकटेंस्टीन द्वारा भारत के साथ BIT पर जोर देने का महत्त्व

  • भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करना: एक संशोधित BIT ढाँचा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को बढ़ावा दे सकता है, भारत की विश्वसनीयता बढ़ा सकता है और अन्य देशों के साथ भविष्य की संधियों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है।
  • बदलते वैश्विक निवेश रुझान: निवेश गंतव्य के रूप में भारत के बढ़ते महत्त्व को उजागर करता है, अन्य देशों को समान संधियों की तलाश करने और स्थायी निवेश प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • भू-राजनीतिक प्रभाव: भारत-यूरोप संबंधों को मजबूत करता है और बहुपक्षीय व्यापार मंचों में भारत की सक्रिय भूमिका को प्रोत्साहित करता है।
  • कर और कानूनी चुनौतियों का समाधान: कर और विवाद समाधान पर स्पष्टता प्रदान करता है, जो संभावित रूप से वैश्विक कर संधियों के लिए एक बेंचमार्क के रूप में कार्य करता है।
  • बढ़ी हुई निवेशक सुरक्षा: MNCs को मजबूत कानूनी सुरक्षा उपायों से लाभ होगा, जिससे भारत में निवेश से जुड़े जोखिम कम होंगे
  • बेहतर व्यावसायिक विश्वास: स्पष्ट निवेश मानदंड और विवाद समाधान तंत्र विदेशी निवेशकों के बीच व्यावसायिक विश्वास में वृद्धि करेंगे।

व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (Trade and Economic Partnership Agreement-TEPA)

  • परिचय: यह भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हस्ताक्षरित एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है।
  • TEPA की मुख्य विशेषताएँ
    • अपनी तरह का पहला FTA: चार विकसित यूरोपीय देशों के साथ भारत का पहला समझौता।
    • निवेश प्रतिबद्धता: EFTA ने 15 वर्षों में 100 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने का संकल्प लिया है।
    • रोजगार सृजन: TEPA का लक्ष्य भारत में 1 मिलियन प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना है।
    • अध्याय: TEPA में 14 अध्याय हैं, जिनमें मुख्य रूप से वस्तुओं से संबंधित बाजार पहुँच, उत्पत्ति के नियम, व्यापार सुविधा, व्यापार उपाय, स्वच्छता और फाइटोसैनिटरी उपाय आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

निष्कर्ष 

स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और भारत के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) मजबूत आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने और कर विवादों एवं निवेशक संरक्षण जैसी प्रमुख चिंताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

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