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भारत में गलत सूचना के खतरे से निपटना

Lokesh Pal April 03, 2025 03:07 19 0

संदर्भ

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2025 में गलत सूचना और भ्रामक सूचनाओं को अत्यधिक जोखिमयुक्त अल्पकालिक वैश्विक खतरे के रूप में रेखांकित किया गया है।

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट

  • वैश्विक जोखिम रिपोर्ट के बारे में: यह विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक रिपोर्ट है, जो अल्पावधि (2 वर्ष) और दीर्घावधि (10 वर्ष) में अपेक्षित सबसे अधिक दबाव वाले वैश्विक जोखिमों का विश्लेषण करती है।

विश्व आर्थिक मंच (WEF) के बारे में 

  • WEF एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो सार्वजनिक-निजी सहयोग पर केंद्रित है।
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड।
  • स्थापना: वर्ष 1971 में क्लॉस श्वाब द्वारा यूरोपीय प्रबंधन मंच के रूप में स्थापित।
  • WEF द्वारा प्रकाशित प्रमुख रिपोर्ट: वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता सूचकांक, वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक, ऊर्जा संक्रमण सूचकांक, वैश्विक जोखिम रिपोर्ट और वैश्विक यात्रा एवं पर्यटन प्रतिस्पर्द्धात्मकता सूचकांक।

गलत सूचना बनाम भ्रामक सूचना के बारे में

  • गलत सूचना: गलती से फैलाई गई झूठी सूचना, धोखा देने के उद्देश्य के बिना।
    •  उदाहरण: बिना पुष्टि किए भूकंप की नकली रिपोर्ट साझा करना।
  • दुष्प्रचार: जानबूझकर गुमराह करने के लिए झूठी सूचनाएँ प्रसारित करना।
    • उदाहरण: किसी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कोई नकली समाचार लेख बनाना।
    • गलत सूचना को बढ़ावा मिलता है: एआई द्वारा उत्पन्न विषय-वस्तु, एल्गोरिदम संबंधी पूर्वाग्रह, गहराता सामाजिक विभाजन।

गलत सूचना फैलने के कारण 

  • एल्गोरिथमिक प्रवर्धन: सोशल मीडिया एल्गोरिदम जुड़ाव को प्राथमिकता देते हैं, अक्सर सनसनीखेज और भ्रामक सामग्री को बढ़ावा देते हैं, जो भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं।
  • एआई-जनरेटेड कंटेंट: जनरेटिव एआई के उदय ने डीपफेक, हस्तक्षेप की गई छवियाँ और टेक्स्ट-आधारित गलत सूचना निर्माण को आसान बना दिया है, जो विश्वसनीय लगती हैं।
  • पारंपरिक मीडिया में विश्वास में कमी: जैसे-जैसे पारंपरिक मीडिया में विश्वास कम होता जाता है, यह एक ऐसा माहौल बनाता है, जहाँ राजनीतिक अभिकर्ता और गैर-राज्य संस्थाएँ झूठी कहानियाँ प्रसारित करने के लिए सूचना अंतराल का लाभ उठाती हैं।
    • रॉयटर्स इंस्टिट्यूट डिजिटल न्यूज रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारत में समाचारों पर समग्र विश्वास में 3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो अब 38% है, और 46 देशों में 24वें स्थान पर है।
  • विदेशी प्रभाव: चीन और रूस जैसे देशों पर अन्य देशों में चुनाव, सामाजिक स्थिरता और सार्वजनिक चर्चा को प्रभावित करने के लिए गलत सूचना रणनीति का उपयोग करने का आरोप लगाया गया है।
    • उदाहरण: चीन के भीतर संचालित वीबो जैसे प्लेटफॉर्म सक्रिय रूप से भारत की विकृत छवि का प्रचार करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • इको चैंबर्स: सोशल मीडिया ऐसे एकांत स्थान का निर्माण करता है, जहाँ लोग ऐसी जानकारी का उपभोग करते हैं, जो उनकी मौजूदा मान्यताओं के अनुरूप होती है, जिससे पूर्वाग्रह और गलत सूचनाओं को बल मिलता है।
  • सत्यता से अधिक झूठ का प्रसारण: त्वरित सूचना साझा करने की आवश्यकता अक्सर तथ्य-जाँच से अधिक होती है, जिससे लोग अनजाने में झूठ प्रसारित करते हैं।
    • खासकर मेटा द्वारा संभावित रूप से तथ्य-जाँच साझेदारी को समाप्त करने की चिंताओं के साथ जोखिम बढ़ रहे हैं, जैसा कि यू.एस. में देखा गया है।

भारत की गलत सूचना के प्रति संवेदनशीलता

  • डिजिटल परिदृश्य का विस्तार: भारत 900 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को पार करने की राह पर है, जिससे यह गलत सूचना अभियानों का एक प्रमुख लक्ष्य बन गया है।
  • कम डिजिटल साक्षरता दर: इंटरनेट की पहुँच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है पर कई उपयोगकर्ताओं के पास जानकारी को सत्यापित करने के लिए महत्त्वपूर्ण डिजिटल कौशल की कमी है।
    • वर्ष 2022 में, ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में केवल 38% परिवार डिजिटल रूप से साक्षर हैं।
  • चुनाव में हेरा-फेरी: वर्ष 2024 के आम चुनावों के दौरान, मतदाताओं की भावनाओं को प्रभावित करने के लिए डीपफेक और एआई-जनरेटेड सामग्री को हथियार बनाया गया।
    • इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (Indian School of Business- ISB) और साइबरपीस फाउंडेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया
      • 46% गलत सूचनाएँ राजनीति से संबंधित है।
      • 33.6% सामान्य मुद्दों को शामिल करती है।
      • 16.8% धार्मिक सामग्री से संबंधित है।
  • विदेशी हस्तक्षेप: चीन लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है, विशेषतः वर्ष 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद, चीन के पक्ष में बयानबाजी करने के लिए वीबो और प्रतिबंधित ऐप (जैसे- टिकटॉक) जैसे प्लेटफॉर्म का प्रयोग करता रहा है।
  • धार्मिक और जातीय तनाव: फर्जी खबरों के कारण भीड़ द्वारा हिंसा भड़कना (जैसे, व्हाट्सऐप अफवाहों के कारण लिंचिंग)।
    • उदाहरण: वर्ष 2013 में फर्जी वीडियो के कारण मुजफ्फरनगर में हुए दंगों ने सांप्रदायिक भावनाओं को बढ़ावा दिया।
  • आर्थिक क्षति: गलत सूचना के कारण उपभोक्ता बहिष्कार, शेयर बाजार में हस्तक्षेप और व्यवसायों को नुकसान हुआ है।
    • उदाहरण: कोरोना वायरस की गलत सूचना और वायरस के झूठे डर के कारण पोल्ट्री उद्योग को अनुमानित 1 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
  • नियमन का अभाव: भारत में यूरोपीय संघ के एआई अधिनियम या एआई सुरक्षा पर अमेरिकी कार्यकारी आदेशों के विपरीत, डीपफेक का मुकाबला करने के लिए विशिष्ट कानूनों का अभाव है।

गलत सूचना के प्रसार से निपटने में चुनौतियाँ

  • निष्क्रिय अग्रेषण संस्कृति: अनजाने में कई उपयोगकर्ता असत्यापित सामग्री साझा करते हैं, जो दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य के बिना गलत सूचना को बढ़ावा देते हैं।
  • भाषायी विविधता: भारत की भाषायी विविधता, जिसमें 22 आधिकारिक भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ हैं, गलत सूचना से निपटने में एक बड़ी चुनौती पेश करती है।
  • डीपफेक का उदय: एआई-संचालित डीपफेक टूल अब व्यापक रूप से सुलभ हैं, जिससे दुर्भावनापूर्ण अभिकर्ताओं के लिए सार्वजनिक धारणा में हस्तक्षेप करना आसान हो गया है।
  • एन्क्रिप्शन: एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप (जैसे, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम) गलत सूचना को उसके स्रोत पर निगरानी करना और रोकना कठिन बनाते हैं।
  • कोई विशिष्ट गलत सूचना विरोधी कानून नहीं: भारत आईटी अधिनियम (2000, संशोधित 2008) पर निर्भर करता है, जिसमें गलत सूचना की स्पष्ट परिभाषा का अभाव है।
  • अपर्याप्त वित्तपोषित तथ्य-जाँच पारिस्थितिकी तंत्र: उदाहरण: ऑल्ट न्यूज जैसे तथ्य-जाँचकर्ता सीमित बजट पर काम करते हैं।

गलत सूचना से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए कदम

  • कम्युनिटी नोट्स प्रोग्राम एक्स की एक पहल है, जिसका उद्देश्य गलत सूचनाओं से निपटने और उपयोगकर्ता द्वारा उत्पन्न संदर्भ के माध्यम से सामग्री की गुणवत्ता को बढ़ाना है।
  • यूरोपीय संघ का डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA): वर्ष 2022 में अधिनियमित DSA, गलत सूचना के प्रसार को रोकने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दायित्व डालता है।
  • ऑस्ट्रेलिया का समाचार मीडिया सौदेबाजी संहिता: वर्ष 2021 में पारित यह कानून Google और Facebook जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म को अपने प्लेटफॉर्म पर साझा की गई समाचार सामग्री के लिए भुगतान करने हेतु बाध्य करता है। यह उन्हें गलत सूचना पर अंकुश लगाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए समाचार वितरित करने के तरीके के लिए भी जवाबदेह बनाता है।
  • ऑनलाइन सुरक्षा अधिनियम, 2023: यह ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने के लिए यूनाइटेड किंगडम की संसद का एक अधिनियम है।

गलत सूचना से निपटने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम

  • प्रेस सूचना ब्यूरो (Press Information Bureau- PIB) तथ्य-जाँच इकाई: सरकार से संबंधित गलत सूचनाओं की पुष्टि करती है और स्पष्टीकरण जारी करती है।
  • चुनाव आयोग का मतदाता जागरूकता और गलत सूचना नियंत्रण: लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए चुनाव से संबंधित फर्जी खबरों और डीपफेक कंटेंट की निगरानी करता है।
    • ‘सरकार द्वारा राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन’ (National Digital Literacy Mission- NDLM) और ‘डिजिटल साक्षरता अभियान’ (दिशा) को देश भर में 52.50 लाख उम्मीदवारों को डिजिटल साक्षरता में प्रशिक्षित करने के लक्ष्य के साथ लागू किया गया था।
  • आईटी नियम, 2021: सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत किसी भी उपयोगकर्ता द्वारा गलत सूचना के प्रसार को रोकना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए एक कानूनी दायित्व है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A: राज्य की सुरक्षा और अभिरक्षा के हित में आवश्यक ऑनलाइन सूचना तक पहुँच को अवरुद्ध करती है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act- DMA), 2005: आपदा प्रबंधन अधिनियम (DMA), 2005 की धारा 52 और 54 के तहत फर्जी दावों तथा चेतावनियों पर एक वर्ष तक का कारावास या जुर्माना हो सकता है।

वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2025 की सिफारिशें

  • कौशल विकास और जवाबदेही: AI एल्गोरिदम के साथ काम करने वाले डेवलपर्स की जिम्मेदार और प्रभावी तैनाती सुनिश्चित करने के लिए निरंतर अपस्किलिंग की आवश्यकता होती है।
    • जनरेटिव AI प्रथाओं की देख-रेख और नैतिक दिशा-निर्देशों को लागू करने के लिए पर्यवेक्षी बोर्ड और AI परिषदों की स्थापना की जानी चाहिए।
  • दुष्प्रचार नियंत्रण: गलत सूचना से निपटने के लिए शक्ति – इंडिया इलेक्शन फैक्ट-चेकिंग कलेक्टिव और डीपफेक एनालिसिस यूनिट जैसी तथ्य-जाँच पहलों को मजबूत किया जाना चाहिए।
  • बड़ी तकनीक का विनियमन: भारत को अपने विशाल सोशल मीडिया उपयोगकर्ता आधार का लाभ उठाकर प्रमुख प्लेटफॉर्मों पर विनियामक प्रभाव को बढ़ावा देना चाहिए।
    • बहुत बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (जिनके 45 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं) को यूरोपीय संघ के डिजिटल सेवा अधिनियम के समान ऑडिट और पारदर्शिता उपायों के अधीन होना चाहिए।
    • दुर्भावनापूर्ण अभिकर्ताओं को झूठी कहानियाँ फैलाने से रोकने के लिए ऑनलाइन विज्ञापनों में अनिवार्य फंडिंग प्रकटीकरण शामिल होना चाहिए।
  • निगरानी और लोकतांत्रिक सुरक्षा उपायों में संतुलन: गलत सूचना को नियंत्रित करने के प्रयासों का दुरुपयोग अत्यधिक निगरानी या सेंसरशिप के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
    • सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है।
  • जन जागरूकता और लचीलापन: वित्तीय साक्षरता और आलोचनात्मक सोच की पहल का विस्तार करना, जैसे कि अमिताभ बच्चन के साथ RBI का अभियान, सूचित डिजिटल नागरिकता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।
  • साइबर सुरक्षा और स्वतंत्र अनुसंधान: डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए साइबर सुरक्षा अनुसंधान और नवाचार के लिए अधिक धन आवंटित किया जाना चाहिए।
    • गलत सूचना और विदेशी सूचना हस्तक्षेप (Foreign Information Manipulation & Interference- FIMI) पर स्वतंत्र शोध को समर्थन दिया जाना चाहिए।
    • प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पत्रकारों के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा लागू की जानी चाहिए।
  • वैश्विक सहयोग: गलत सूचना की अंतरराष्ट्रीय प्रकृति को देखते हुए, वैश्विक प्रतिक्रियाओं का समन्वय करने और डिजिटल खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ाने के लिए सीमा पार गठबंधन स्थापित किए जाने चाहिए।

निष्कर्ष

भारत को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, तेजी से ध्रुवीकृत डिजिटल विश्व में सत्य, एकता और समानता को बढ़ावा देने में उदाहरण के रूप में नेतृत्व करना चाहिए। गलत सूचना का मुकाबला करने और देश की विविधता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को संरक्षित करने में भी विभिन्न चुनौतियाँ मौजूद हैं।

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