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डिजिटल हितधारकों पर निगरानी की चुनौती

Lokesh Pal March 25, 2025 04:17 31 0

संदर्भ

हाल ही में भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) ने मेटा पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना आरोपित किया और विज्ञापन के लिए मेटा के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्मों के साथ उपयोगकर्ता डेटा साझा करने पर व्हाट्सऐप पर पाँच वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया। 

  • मेटा ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (National Company Law Appellate Tribunal-NCLAT) में अपील की, जिसने उपयोगकर्ता डेटा साझा करने पर पाँच वर्ष के प्रतिबंध और जुर्माने पर रोक लगा दी, बशर्ते कि मेटा कुल जुर्माने का 50% जमा करे।

डिजिटल बाजारों में डेटा का महत्त्व

  • वैयक्तिकरण और उपभोक्ता अंतर्दृष्टि: डेटा कंपनियों को उपभोक्ता वरीयताओं, आदतों और क्रय व्यवहार को समझने में सक्षम बनाता है।
    • वैयक्तिकृत अनुशंसाएँ (जैसे- Amazon, Netflix) उपयोगकर्ता अनुभव और जुड़ाव को बेहतर बनाती हैं।
  • प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ: बेहतर डेटा एनालिटिक्स वाली कंपनियाँ रुझानों एवं उपभोक्ता की आवश्यकताओं का अनुमान लगाकर बाजार में अपना प्रभाव स्थापित कर लेती हैं।
  • लक्षित विज्ञापन: प्लेटफॉर्म दर्शकों को विभाजित करने और विज्ञापन प्लेसमेंट को अनुकूलित करने के लिए AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करते हैं।
  • बाजार दक्षता और मूल्य निर्धारण रणनीतियाँ: गतिशील मूल्य निर्धारण मॉडल माँग, प्रतिस्पर्द्धा और उपयोगकर्ता व्यवहार के आधार पर वास्तविक समय में कीमतों को समायोजित करते हैं।
    • उदाहरण: उबर, मूल्य निर्धारण रणनीतियों को अनुकूलित करने के लिए डेटा का उपयोग करता है।
  • नवाचार एवं व्यवसाय विस्तार: स्टार्टअप और स्थापित फर्म नए बाजारों एवं अवसरों की पहचान करने के लिए डेटा का उपयोग करते हैं। 

पृष्ठभूमि: मेटा द्वारा प्रभुत्वशाली स्थिति का दुरुपयोग

  • शुरुआत: यह विवाद व्हाट्सऐप की वर्ष 2021 गोपनीयता नीति अपडेट से उत्पन्न हुआ।
    • अपडेट ने मेटा के प्लेटफॉर्म पर विस्तारित डेटा-शेयरिंग को अनिवार्य बना दिया।
  • प्रभुत्व का दुरुपयोग: CCI ने फैसला सुनाया कि नीति उपयोगकर्ताओं को ‘इसे ले लो या छोड़ दो’ समझौते के लिए मजबूर करती है।
    • इससे मेटा को डिजिटल विज्ञापन में समग्र डेटा के कारण अनुचित बढ़त मिली।
  • प्रतिस्पर्द्धा पर प्रभाव: अद्यतित नीति को व्हाट्सऐप की बाजार शक्ति को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा गया, जिससे संभावित रूप से प्रतिस्पर्द्धा को नुकसान पहुँचा और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को समान शर्तों पर प्रतिस्पर्द्धा करने से रोका जा सका।

मेटा और गूगल पर वैश्विक विनियामक चिंताएँ

  • संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): वर्ष 2024 में, USA में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले में पाया गया कि गूगल ने विशेष खोज समझौतों के लिए शेरमान एक्ट का उल्लंघन किया है। मेटा को इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप अधिग्रहणों पर अविश्वास मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है।
  • यूरोप
    • जर्मनी के संघीय कार्टेल कार्यालय ने निर्णय सुनाया कि मेटा के ‘क्रॉस-प्लेटफॉर्म डेटा’ संग्रह ने यूरोपीय संघ के प्रतिस्पर्द्धा कानून और GDPR दोनों का उल्लंघन किया है।
    • यूरोपीय संघ मेटा के विज्ञापन-समर्थित सदस्यता मॉडल की जाँच कर रहा है और उसने प्रमुख मामलों में Google पर €8 बिलियन का जुर्माना लगाया है।
  • ऑस्ट्रेलिया: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सख्त नियम लागू करना।

डिजिटल हितधारकों के बारे में

  • ‘डिजिटल हितधारक’ दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली प्रौद्योगिकी कंपनियों को संदर्भित करते हैं, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था पर प्रभावी हैं। 
  • उदाहरण: गूगल (अल्फाबेट), अमेजन, मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप) आदि।

डिजिटल हितधारकों की मुख्य विशेषताएँ

  • बिग डेटा का स्वामित्व: वे बड़े पैमाने पर उपभोक्ता डेटा एकत्र करते हैं और उसे संसाधित करते हैं।
  • बाजार प्रभुत्व: वे डिजिटल बाजारों के महत्त्वपूर्ण हिस्सों को नियंत्रित करते हैं।
  • पारिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण: वे सेवाओं को एकीकृत करते हैं, उदाहरण के लिए, गूगल सर्च + यूट्यूब + विज्ञापन।

डिजिटल हितधारकों के विनियमन की आवश्यकता

  • एकाधिकारवादी प्रथाओं को रोकना: डिजिटल हितधारक, प्रतिस्पर्द्धा-विरोधी प्रथाओं में संलग्न हैं, जो नवाचार को बाधित करती हैं और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुँचाती हैं। विनियमन के बिना, एकाधिकार उपभोक्ता विकल्प को कम करते हैं, कीमतें बढ़ाते हैं और स्टार्टअप को दबाते हैं। उदाहरण के लिए
    • प्रतिस्पर्द्धियों का अधिग्रहण (उदाहरण: फेसबुक द्वारा इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप को खरीदना)।
    • अनन्य अनुबंध और स्व-वरीयता (उदाहरण: ऐप्पल द्वारा ‘थर्ड पार्टी डेवलपर्स’ की तुलना में अपने ऐप्स को प्राथमिकता देना)।
    • प्रीडेटरी प्राइसिंग (उदाहरण: अमेजन द्वारा छोटे व्यवसायों को कम कीमत पर बेचना)।
  • उपभोक्ता गोपनीयता की रक्षा करना: सुनिश्चित करना कि उपयोगकर्ता डेटा का लक्षित विज्ञापन के लिए दुरुपयोग न किया जाए या स्पष्ट सहमति के बिना साझा न किया जाए। उदाहरण: कैंब्रिज एनालिटिका घोटाले ने दिखाया कि डेटा किस तरह से चुनावों में हस्तक्षेप कर सकता है।
  • निष्पक्ष कराधान और आर्थिक समानता सुनिश्चित करना: तकनीकी हितधारक कर खामियों का लाभ उठाते हैं, जिससे सरकारें सार्वजनिक सेवाओं के लिए आवश्यक राजस्व से वंचित हो जाती हैं। उदाहरण: कर-मुक्त देशों (जैसे- आयरलैंड, बरमूडा) में लाभ स्थानांतरित करना।
  • डिजिटल उपनिवेशवाद: उदाहरण: अमेरिकी और चीनी कंपनियाँ वैश्विक बाजारों पर प्रभावी हैं तथा स्थानीय व्यवसायों को कमजोर कर रही हैं।
  • निष्पक्ष प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देना: छोटे प्रतिस्पर्द्धियों और स्टार्टअप के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना।
  • साइबर सुरक्षा खतरे: विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता गोपनीयता संबंधी चिंताएँ बढ़ाती है।

डिजिटल हितधारकों पर निगरानी की चुनौतियाँ

  • भारत के प्रतिस्पर्द्धा कानून में खामियाँ: प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 में डेटा-केंद्रित एकाधिकार के लिए प्रावधानों का अभाव है। इसमें निम्नलिखित के लिए सुधारों की आवश्यकता है:-
    • बाजार प्रभुत्व का आकलन करने में एक महत्त्वपूर्ण कारक के रूप में ‘डेटा एकाधिकार’ को वरीयता देना।
    • डेटा-संचालित गतिशीलता को प्रतिबिंबित करने के लिए ‘बाजार शक्ति’ को पुनः परिभाषित करना।
    • अंतर-संचालन और अनिवार्य डेटा-साझाकरण समझौतों जैसी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल करना।
  • सीमा पार क्षेत्राधिकार संघर्ष: तकनीकी हितधारक, देशों के बीच कानूनी अंतर का लाभ उठाते हैं, जिससे प्रवर्तन मुश्किल हो जाता है। उदाहरण: भारतीय न्यायालय का निर्णय यूरोप में संगृहीत डेटा पर लागू नहीं हो सकता है।
  • क्षेत्राधिकार संबंधी जटिलता: डिजिटल हितधारक वैश्विक स्तर पर कार्य करते हैं, जिससे स्थानीय नियमों को लागू करना मुश्किल हो जाता है। उदाहरण: NCLAT में भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) के आदेश के विरुद्ध मेटा की अपील।
  • तीव्र तकनीकी प्रगति: कानून AI और बिग डेटा जैसी विकसित हो रही तकनीकों के साथ सामंजस्य स्थापित करने में संघर्ष करते हैं। उदाहरण: मेटा के विज्ञापन प्रभुत्व को बढ़ाने वाले AI-संचालित एल्गोरिदम।
  • कॉरपोरेट प्रभाव: बड़ी टेक कंपनियाँ सख्त नियमों को कमजोर करने या उनमें देरी करने के लिए सरकारों पर दबाव बनाती हैं। उदाहरण: अमेजन ने वर्ष 2023 में एंटीट्रस्ट बिलों के खिलाफ लॉबिंग में $20M खर्च किए।
  • अपर्याप्त प्रवर्तन और कम दंड: ट्रिलियन-डॉलर वाली फर्मों द्वारा उल्लंघन को रोकने के लिए जुर्माना बहुत कम है। उदाहरण: Google के विरुद्ध EU द्वारा लगाए गए $2.7B जुर्माने का उसके प्रभुत्व पर बहुत कम प्रभाव पड़ा।
  • कर से बचाव और लाभ स्थानांतरण: तकनीकी हितधारक उचित करों का भुगतान करने से बचने के लिए खामियों का लाभ उठाते हैं। उदाहरण: कर देनदारियों को कम करने के लिए Apple ने $200 बिलियन को विदेश में निवेशित किया है।
  • तकनीकी चोरी: AI-संचालित निर्णय (जैसे- सामग्री मॉडरेशन, विज्ञापन लक्ष्यीकरण) में पारदर्शिता का अभाव है। कंपनियाँ व्यापार रहस्यों का उदाहरण देते हुए ऑडिट का विरोध करती हैं।

डिजिटल हितधारकों पर नकेल कसने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI): CCI ने बड़ी टेक कंपनियों द्वारा प्रतिस्पर्द्धा-विरोधी प्रथाओं की जाँच की।
    • यह बाजार प्रतिस्पर्द्धा को विनियमित करने के लिए “घटना से पहले” (Ex-ante) और “घटना के बाद” (Ex-post) दोनों दृष्टिकोणों को अपनाता है।
      • “घटना से पहले” दृष्टिकोण के तहत, CCI प्रतिस्पर्द्धा विरोधी बाजार संरचनाओं को रोकने के लिए प्रस्तावित विलय और अधिग्रहण की समीक्षा करता है, ताकि उन्हें अंतिम रूप दिया जा सकता है।
      • “घटना के बाद” दृष्टिकोण के तहत, CCI प्रतिस्पर्द्धा-विरोधी समझौतों तथा प्रभुत्व के दुरुपयोग के उल्लंघन के बाद जाँच करता है और उनके खिलाफ कार्रवाई करता है।
  • प्रौद्योगिकी हितधारकों के विरुद्ध विनियामक कार्रवाई के उदाहरण
    • एंड्रॉइड ऐप इकोसिस्टम तथा वेब सर्च में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग करने के लिए गूगल को भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग द्वारा वर्ष 2022 में 1,337.76 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ा।
  • NCLAT ने वर्ष 2023 में इस जुर्माने को बरकरार रखा, जिससे भारत के नियामक रुख को मजबूती मिली।
  • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP), 2023: व्यक्तिगत डेटा प्रोसेसिंग, सहमति आवश्यकताओं, डेटा स्थानीयकरण और उल्लंघन के लिए दंड के लिए नियम स्थापित करता है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, 2021: शिकायत निवारण तथा सरकारी आदेशों के अनुपालन सहित सोशल मीडिया मध्यस्थों पर दायित्व लागू करता है।
  • डेटा स्थानीयकरण आवश्यकताएँ: डेटा के दुरुपयोग से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने भुगतान डेटा के लिए डेटा स्थानीयकरण लागू किया है।
    • RBI ने डिजिटल ऋण एप्लीकेशनों को उपयोगकर्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना निजी जानकारी तक पहुँचने से रोकने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं।
  • दूरसंचार अधिनियम, 2023: इंटरनेट आधारित संचार सेवाओं पर सरकारी निगरानी का विस्तार करता है।
  • आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष 2024-25: आर्थिक नीतियों को आकार देने में AI की भूमिका पर जोर देता है।

डिजिटल हितधारकों को विनियमित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून

  • शेरमान एक्ट (यू.एस.): एक प्रमुख कानून, जो एकाधिकार प्रथाओं और प्रतिस्पर्द्धा विरोधी समझौतों को प्रतिबंधित करता है।
  • डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) (यूरोपीय संघ): वर्ष 2023 का एक विनियमन कानून, जो बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म (गेटकीपर) पर प्रतिस्पर्द्धा-विरोधी व्यवहार को रोकने के लिए दायित्व आरोपित करता है। यह हानिकारक सामग्री के सख्त नियंत्रण को अनिवार्य बनाता है।
  • सामान्य डेटा सुरक्षा विनियमन (GDPR) (यूरोपीय संघ): वर्ष 2018 का एक डेटा सुरक्षा कानून, जो अनधिकृत डेटा उपयोग के लिए कठोर सहमति आवश्यकताओं तथा दंड को लागू करता है।

आगे की राह 

  • प्रतिस्पर्द्धा अधिनियम, 2002 में संशोधन: डेटा एकाधिकार को संबोधित करने तथा बाजार प्रभुत्व को पुनः परिभाषित करने के लिए प्रावधान पेश करने की आवश्यकता है।
    • उदाहरण: प्रभुत्व का आकलन करने के लिए एक पैरामीटर के रूप में ‘डेटा एकाधिकार’ को शामिल करना।
  • स्थानीय संदर्भ के साथ वैश्विक संरेखण: यूरोपीय संघ के डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) जैसे वैश्विक उदाहरणों से सीखते हुए यह सुनिश्चित करना कि नीतियाँ भारत के डिजिटल परिदृश्य के अनुकूल हों।
  • नियामक समन्वय को बढ़ावा देना: भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) तथा भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड के बीच सहयोग के लिए तंत्र स्थापित करना।
    • उदाहरण: डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) तथा सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन (GDPR) के साथ यूरोपीय संघ का एकीकृत दृष्टिकोण।
  • विनियमन पर वैश्विक सहयोग को मजबूत करना
    • डेटा गोपनीयता कानूनों में सामंजस्य स्थापित करना (उदाहरण के लिए- दुनिया भर में GDPR-शैली की सुरक्षा का विस्तार करना)।
    • लाभ स्थानांतरण को रोकने के लिए एक वैश्विक डिजिटल कर समझौता स्थापित करना।
    • अधिकार क्षेत्र की चोरी से निपटने के लिए सीमापार प्रवर्तन गठबंधन। 
      • उदाहरण: OECD के 15% वैश्विक न्यूनतम कर का उद्देश्य तकनीकी हितधारकों द्वारा कर चोरी को रोकना है।
  • कठोर दंड लागू करना: छोटे जुर्माने की जगह राजस्व आधारित दंड आरोपित करना।
    • उदाहरण: बार-बार उल्लंघन के लिए वैश्विक कारोबार का 10% जुर्माना
      • ऑस्ट्रेलिया के समाचार मीडिया सौदेबाजी संहिता का उद्देश्य गूगल तथा फेसबुक को अपने प्लेटफॉर्म पर न्यूज कंटेंट के लिए भुगतान करने के लिए बाध्य करना है।
  • जन जागरूकता का निर्माण: उपयोगकर्ताओं को गोपनीयता जोखिमों को समझने में मदद करने के लिए तकनीकी साक्षरता अभियान।
    • नुकसान को उजागर करने वाले अंदरूनी लोगों के लिए व्हिसलब्लोअर संबंधी सुरक्षा प्रावधान, उदाहरण के लिए, फ्राँसेस हौगेन के फेसबुक लीक मामले में।

निष्कर्ष

मेटा संबंधी यह मामला तकनीकी हितधारकों को विनियमित करने में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, लेकिन अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। निष्पक्ष प्रतिस्पर्द्धा सुनिश्चित करने के लिए भविष्य के विनियमनों को उभरती चुनौतियों से सक्रिय रूप से निपटना होगा।

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