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फ्यूचर सर्कुलर कोलाइडर

Lokesh Pal April 03, 2025 03:15 15 0

संदर्भ

 हाल ही में संभावित फ्यूचर सर्कुलर कोलाइडर (FCC) की व्यवहार्यता का आकलन करने वाली व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।

संबंधित तथ्य

  • लॉन्च: FCC व्यवहार्यता अध्ययन को कण भौतिकी के लिए यूरोपीय रणनीति के वर्ष 2020 अपडेट की सिफारिशों के बाद लॉन्च किया गया था और यह रणनीति के चल रहे अपडेट के लिए इनपुट के रूप में कार्य करेगा
  • प्रकाशन: यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (CERN)।

फ्यूचर सर्कुलर कोलाइडर (FCC) के बारे में

  • FCC एक प्रस्तावित कण कोलाइडर है, जो 2040 के दशक में सर्न के प्रमुख उपकरण अर्थात् 27 किलोमीटर के लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) का स्थान ले सकता है।
  • स्थान: कण ‘कोलाइडर रिंग’ को फ्राँसीसी-स्विस सीमा के साथ और जिनेवा झील के नीचे स्थित किया जाएगा।

  • बजट: इस परियोजना की योजना लगभग 14 बिलियन स्विस फ्रैंक (लगभग 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की लागत से बनाई जा रही है।
  • उद्देश्य: कोलाइडर का लक्ष्य ब्रह्मांड के बारे में मूलभूत प्रश्नों का पता लगाना है, जिसमें डार्क मैटर की प्रकृति, मैटर-एंटीमैटर विषमता की उत्पत्ति और न्यूट्रिनो द्रव्यमान का स्रोत आदि शामिल हैं।
  • सुरंग की विशेषताएँ
    • परिधि: सुरंग की परिधि 90.7 किमी. होगी।
    • सतह बिंदु: सुरंग में 8 सतह बिंदु होंगे (7 फ्राँस में, 1 स्विट्जरलैंड में)।
  • चरण: FCC अनुसंधान कार्यक्रम दो संभावित चरणों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
    • FCC-ee चरण: यह एक इलेक्ट्रॉन-पॉजिट्रॉन कोलाइडर है, जो हिग्स, इलेक्ट्रोवीक और टॉप-क्वार्क फैक्ट्री के रूप में कार्य करता है, जो विभिन्न केंद्र-द्रव्यमान ऊर्जाओं पर संचालित होता है।
      • समयरेखा: यह 2040 के दशक के मध्य से लगभग 15 वर्षों तक संचालित होगा।
    • FCC-hh चरण: यह एक बाद के चरण का प्रोटॉन-प्रोटॉन कोलाइडर है, जो लगभग 100 TeV की ऊर्जा पर कार्य करता है।
      • समयरेखा: यह 2070 के दशक से 25 वर्षों तक कार्य करेगा।
  • महत्त्व
    • नई प्रौद्योगिकियाँ: FCC ने वैज्ञानिक खोजों का वादा किया है, जो क्रायोजेनिक्स, सुपर-कंडक्टिंग मैग्नेट और वैक्यूम प्रौद्योगिकी आदि जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दे सकती हैं।
    • मानक मॉडल से परे अन्वेषण: FCC हिग्स बोसोन और अन्य मौलिक कणों और बलों की जाँच करके कण भौतिकी के वर्तमान मानक मॉडल से आगे जाएगा, जिससे संभावित रूप से नए कणों तथा घटनाओं की खोज हो सकती है।
    • हिग्स बोसोन: FCC हिग्स बोसोन का अधिक सटीक अध्ययन करने की अनुमति देगा, जिसमें अन्य कणों के साथ इसकी अंतःक्रिया भी शामिल है, जो यह समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है कि कण कैसे द्रव्यमान प्राप्त करते हैं और ब्रह्मांड की संरचना क्या है।
    • उच्च परिशुद्धता और संवेदनशीलता: FCC अभूतपूर्व परिशुद्धता, संवेदनशीलता और ऊर्जा पहुँच प्रदान करेगा, जिससे वैज्ञानिक नई भौतिकी का पता लगा सकेंगे तथा मौजूदा सिद्धांतों का अधिक सटीकता से परीक्षण कर सकेंगे।
    • कोलाइडर काफी अधिक चमक और अधिकतम चार प्रयोगों को सक्षम बनाता है, साथ ही बाद के हैड्रॉन कोलाइडर के लिए बुनियादी ढाँचा भी प्रदान करता है।

यूरोपीय परमाणु अनुसंधान परिषद (CERN) के बारे में

  • स्थापना: CERN की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी और दिसंबर 1951 में पेरिस में UNESCO की अंतर-सरकारी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया था।
  • अवस्थिति: CERN प्रयोगशाला जिनेवा के पास फ्रेंको-स्विस सीमा पर स्थित है।
  • सदस्यता: यह यूरोप के पहले संयुक्त उपक्रमों में से एक था और अब इसके 23 सदस्य देश हैं।
  • अनुसंधान का क्षेत्र: CERN का मुख्य अनुसंधान क्षेत्र कण भौतिकी (Particle Physics) है।
  • उपकरण: CERN में उपयोग किए जाने वाले उपकरण उद्देश्य-निर्मित कण त्वरक और डिटेक्टर हैं।
    • त्वरक: वे कणों की किरणों को उच्च ऊर्जा तक बढ़ाते हैं, इससे पहले कि किरणें एक दूसरे से या स्थिर लक्ष्यों से टकराएँ। 
    • डिटेक्टर इन टकरावों के परिणामों का निरीक्षण और रिकॉर्ड करते हैं।
  • होस्ट 
    • लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC): CERN में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली कण त्वरक है।
      • LHC: इसमें सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट की 27 किलोमीटर लंबी रिंग होती है, जिसमें रास्ते में कणों की ऊर्जा को बढ़ाने के लिए कई त्वरक संरचनाएँ होती हैं।
        • LHC ने उसी सुरंग में पिछले इलेक्ट्रॉन-पॉजिट्रॉन कोलाइडर की जगह ली, जिसे LEP कहा जाता है, जिसे 1980 के दशक में बनाया गया था।
      • LHC के अंदर की किरणों को त्वरक रिंग के चारों ओर चार स्थानों पर टकराया जाता है, जो चार कण डिटेक्टरों यानी ATLAS, CMS, ALICE और LHCB की स्थिति के अनुरूप है।
    • अन्य प्रयोग: इसमें एंटीमैटर, कॉस्मिक किरणों, वैकल्पिक त्वरक प्रौद्योगिकियों, उन्नत चुंबकों और चिकित्सा अनुप्रयोगों के लिए आइसोटोप पर काम शामिल है।
  • हिग्स बोसोन की खोज: LHC ने वर्ष 2012 में हिग्स बोसोन (मानक मॉडल का आधार) की खोज की।
    • हिग्स बोसोन की खोज ब्रह्मांड में व्याप्त एक क्षेत्र यानी हिग्स क्षेत्र का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण थी।
    • हिग्स क्षेत्र की खोज ने अन्य मूलभूत कणों की इसके साथ अलग-अलग अंतःक्रियाओं की व्याख्या की जिसके परिणामस्वरूप उनके द्रव्यमान अलग-अलग होते हैं।

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