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AI के माध्यम से भारत का रूपांतरण

Lokesh Pal January 01, 2026 01:45 38 0

संदर्भ

भारत एक निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आर्थिक विकास, शासन क्षमता और सामाजिक समावेश को नया आकार दे रही है।

  • बिग डेटासेट, मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे और युवा कार्यबल के साथ, भारत न केवल दक्षता के लिए, बल्कि समावेशी तथा सतत् विकास के लिए AI का लाभ उठाना चाहता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है?

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मशीनों की वह क्षमता है, जिसके द्वारा वे ऐसे कार्य कर सकती हैं, जिनके लिए सामान्यतः मानव बुद्धि की आवश्यकता होती है।
  • इसमें डेटा से सीखना, नए इनपुट के अनुसार ढलना, पैटर्न को पहचानना और पूर्वानुमान या निर्णय उत्पन्न करना शामिल है।
  • आधुनिक AI प्रणालियाँ बड़े डेटासेट, एल्गोरिदम और लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) पर निर्भर करती हैं, और निरंतर डेटा फीडबैक से इनका प्रदर्शन बेहतर होता जाता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब कोई विशिष्ट क्षेत्र की तकनीक नहीं रह गई है; यह बिजली या इंटरनेट की तरह एक सामान्य प्रयोजन वाली तकनीक बन गई है, जिसके अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वर्तमान महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ

  • जनरेटिव AI: GPT-5 और गूगल जेमिनी जैसे उन्नत मॉडल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रचनात्मक उद्योगों में AI-संचालित सामग्री निर्माण को सक्षम बनाते हैं।
  • मल्टीमॉडल AI: DALL·E 3 और LLaMA जैसी प्रौद्योगिकियाँ टेक्स्ट, इमेज और वीडियो प्रोसेसिंग को एकीकृत करती हैं, जिससे वास्तविक दुनिया में AI अनुप्रयोगों का विस्तार होता है।
  • औषधि खोज में AI: अल्फाफोल्ड ने अभूतपूर्व पैमाने पर प्रोटीन संरचनाओं की भविष्यवाणी करके जैव चिकित्सा अनुसंधान में क्रांति ला दी है।
  • AI-रोबोटिक्स: AI रोबोटों को सीखने, अनुकूलन करने और स्वायत्त निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
  • सॉफ्टवेयर विकास के लिए AI: GitHub Copilot X और Codex जैसे उपकरण स्वचालित कोड जनरेशन के माध्यम से डेवलपर्स की सहायता करते हैं।
  • वाक् और ध्वनि AI: ElevenLabs और VALL-E जैसे प्लेटफॉर्म कई उद्योगों के लिए यथार्थवादी ध्वनि संश्लेषण को सक्षम बनाते हैं।
  • स्वायत्त AI एजेंट: AutoGPT जैसी प्रणालियाँ जटिल, बहु-चरणीय कार्यों को स्वतंत्र रूप से निष्पादित कर सकती हैं।
  • जलवायु विज्ञान में AI: GraphCast जैसे मॉडल मौसम और जलवायु पूर्वानुमानों की सटीकता में सुधार करते हैं।

यद्यपि ये अभूतपूर्व खोजें प्रभावशाली हैं, लेकिन अधिकांश अग्रणी मॉडल कंप्यूटिंग पर बहुत अधिक निर्भर हैं और कुछ ही देशों और निगमों तक सीमित हैं, जिससे तकनीकी निर्भरता को लेकर चिंताएँ बढ़ जाती हैं।

भारत में वर्तमान AI इकोसिस्टम

  • तकनीकी क्षेत्र का विकास: भारत के प्रौद्योगिकी राजस्व के इस वर्ष 280 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
  • रोजगार: प्रौद्योगिकी और AI इकोसिस्टम में 60 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं।
  • वैश्विक क्षमता केंद्र: भारत में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें से 500 से अधिक विशेष रूप से AI पर केंद्रित हैं।
  • स्टार्टअप की मजबूती: भारत में लगभग 18 लाख स्टार्ट-अप हैं और पिछले वर्ष लॉन्च किए गए लगभग 89% नए स्टार्ट-अप ने अपने उत्पादों या सेवाओं में AI का उपयोग किया।
  • उद्यमों द्वारा AI का उपयोग: नैसकॉम AI एडॉप्शन इंडेक्स में भारत का स्कोर 2.45/4 है, जो दर्शाता है कि 87% उद्यम सक्रिय रूप से AI समाधानों को अपना रहे हैं।
  • उच्च मूल्य वाले क्षेत्र: AI का मूल्य औद्योगिक और ऑटोमोटिव, खुदरा और उपभोक्ता वस्तुएँ, BFSI और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में केंद्रित है, जो कुल AI मूल्य का लगभग 60% योगदान करते हैं।
  • परिपक्वता स्तर: BCG सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 26% भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर AI परिपक्वता प्राप्त कर ली है।

वैश्विक AI प्रतिस्पर्द्धा

  • रैंकिंग: भारत ने AI प्रतिस्पर्द्धा में वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया (स्टैनफोर्ड 2025 ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल)।
  • कवरेज: वर्ष 2017-2024 के दौरान AI विकास और नवाचार का आकलन करता है।
  • उल्लेखित कारक: प्रतिभा, अनुसंधान, स्टार्ट-अप, निवेश, अवसंरचना, नीति एवं शासन।
  • भारत GitHub पर AI परियोजनाओं में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता भी है, जो इसके डेवलपर इकोसिस्टम की मजबूती को दर्शाता है।

सरकारी पहल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की परिवर्तनकारी क्षमता और रणनीतिक जोखिम दोनों को पहचानते हुए, भारत ने मिशन-आधारित दृष्टिकोण अपनाया है।

इंडियाAI मिशन

  • इंडियाAI मिशन एक राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम है, जिसे भारत के AI नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2024 में अनुमोदित किया गया था।
  • इसका उद्देश्य अनुसंधान, नवाचार, कंप्यूटिंग अवसंरचना और कौशल विकास को बढ़ावा देकर भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करना है।

  • कार्यान्वयनकर्ता: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (DIC)।
  • उद्देश्य 
    • AI अवसंरचना का विकास करना – विश्व स्तरीय कंप्यूटिंग क्षमताएँ और डेटा प्लेटफॉर्म स्थापित करना।
    • AI अनुसंधान और स्टार्ट-अप को बढ़ावा देना – स्वदेशी AI प्रौद्योगिकियों और नवाचार को प्रोत्साहित करना।

ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट

  • GPU एक उच्च-प्रदर्शन वाला कंप्यूटर चिप है, जो बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से संसाधित कर सकता है।
  • यह AI मॉडल को संचालित करने, जटिल गणनाओं का प्रबंधन करने और सामान्य प्रोसेसर की तुलना में मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग को तेज गति से करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आवश्यक घटक

  • इंडियाAI कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर
    • 10,000 से अधिक GPU के साथ एक उच्च स्तरीय AI सुपरकंप्यूटिंग इकोसिस्टम स्थापित करता है।
    • स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और सार्वजनिक संस्थानों को AI कंप्यूटिंग संसाधन प्रदान करता है।
  • भारत के AI नवाचार केंद्र (IIC)
    • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान और उत्पाद विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना।
    • कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शासन और भाषा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना।
  • इंडियाAI डेटासेट प्लेटफॉर्म: सुरक्षित पहुँच और गोपनीयता सुरक्षा उपायों के साथ AI मॉडल प्रशिक्षण के लिए एक एकीकृत डेटा भंडार का निर्माण करना।
    • AIकोष सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों का उपयोग करके AI सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए डेटासेट तथा मॉडल संकलित करता है।
    • इसमें 20 क्षेत्रों में 5,500 से अधिक डेटासेट और 251 AI मॉडल उपलब्ध हैं, जिससे डेवलपर्स तेजी से एप्लिकेशन बना सकते हैं।
  • इंडियाAI एप्लिकेशन डेवलपमेंट इनिशिएटिव
    • यह स्तंभ स्वास्थ्य सेवा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, शासन और सहायक शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए AI समाधानों का समर्थन करता है।
    • जुलाई 2025 तक 30 आवेदन स्वीकृत किए गए थे। यह साइबरगार्ड AI हैकाथॉन जैसे क्षेत्र-संबंधित हैकाथॉन का भी आयोजन करता है।
  • इंडियाAI फ्यूचरस्किल्स प्रोग्राम: इस स्तंभ का उद्देश्य बुनियादी स्तर से लेकर उन्नत स्तर तक, सभी स्तरों पर AI पेशेवरों को प्रशिक्षित करना है।
    • द्वितीय और तृतीय स्तरीय शहरों में AI प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं, जिनमें से 31 प्रयोगशालाएँ राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) और उद्योग भागीदारों के माध्यम से शुरू की गई हैं।
  • इंडियाAI स्टार्ट-अप वित्तपोषण: अनुदान, सीड फंडिंग और वेंचर पार्टनरशिप के माध्यम से AI स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
    • इंडियाAI स्टार्ट-अप्स ग्लोबल प्रोग्राम मार्च 2025 में लॉन्च किया गया था, ताकि स्टेशन एफ और एचईसी पेरिस जैसी साझेदारियों के माध्यम से भारतीय स्टार्ट-अप्स को यूरोप में विस्तार करने में मदद मिल सके।
  • इंडियाAI रिस्पॉन्सिबल AI फ्रेमवर्क: AI सिस्टम में निष्पक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले नैतिक और शासन ढाँचे विकसित करता है।
    • यह भागीदार संस्थानों के माध्यम से इंडियाAI सेफ्टी इंस्टिट्यूट के विकास में भी सहयोग करता है।

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026

  • भारत फरवरी 2026 में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य देश की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमताओं को प्रदर्शित करना और विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना है।
  • भारत ने कार्यक्रम का लोगो और प्रमुख पहलों का अनावरण किया।
    • AI पिच फेस्ट (UDAAN): AI स्टार्ट-अप्स के लिए एक वैश्विक मंच, जिसमें महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और दिव्यांग नवाचारकों पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि स्केलेबल AI समाधानों को प्रदर्शित किया जा सके।
    • AI एक्सपो: जिम्मेदार बुद्धिमत्ता पर केंद्रित एक विशाल प्रदर्शनी, जिसमें भारत और 30 से अधिक देशों के 300 से अधिक प्रदर्शक AI अनुप्रयोगों, उत्पादों और नीतिगत नवाचारों को प्रदर्शित करेंगे।
    • वैश्विक नवाचार चुनौतियाँ: युवाओं, महिलाओं और विविध प्रतिभागियों के लिए खुली चुनौतियाँ, ताकि वे विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया की सार्वजनिक और विकासात्मक समस्याओं के समाधान के लिए AI-संचालित समाधान विकसित कर सकें।
    • अनुसंधान संगोष्ठी: एक अंतरराष्ट्रीय मंच, जो भारत, ग्लोबल साउथ और व्यापक वैश्विक समुदाय के अग्रणी शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक AI अनुसंधान प्रस्तुत करने, कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक साथ लाता है।

समावेशी सामाजिक विकास के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – नीति आयोग की रिपोर्ट

  • रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि AI भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों का समर्थन कैसे कर सकता है।
  • इस रिपोर्ट में भारत को वर्ष 2035 तक समावेशी AI में वैश्विक अग्रणी देश के रूप में परिकल्पित किया गया है, जहाँ प्रौद्योगिकी श्रमिकों की क्षमताओं को प्रतिस्थापित करने के स्थान पर उनकी सहायक बनेगी।
  • रिपोर्ट इस बात पर भी बल देती है कि AI सामाजिक और आर्थिक विभाजनों को पाटकर संरचनात्मक असमानताओं को कम कर सकता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रौद्योगिकी के लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुँचें।
  • रिपोर्ट में डिजिटल श्रमसेतु मिशन का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य भारत के अनौपचारिक क्षेत्र के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को तैनात करना है।
  • रोडमैप में वॉयस-फर्स्ट AI, पारदर्शी भुगतान के लिए स्मार्ट अनुबंध, कौशल विकास के लिए माइक्रो-क्रेडेंशियल और स्केलेबल साझेदारी के माध्यम से बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

चरणबद्ध रोडमैप

  • चरण 1 (2025-2026): मिशन दिशा-निर्देश
    • स्पष्ट लक्ष्यों, समय-सीमाओं और मापने योग्य परिणामों के साथ मिशन चार्टर का मसौदा तैयार करना।
    • सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिक समाज के हितधारकों को शामिल करके प्राथमिकताएँ निर्धारित करना और उद्देश्यों को परिभाषित करना।
  • चरण 2 (2026-2027): संस्थागत ढाँचा और शासन प्रणाली
    • अंतर-क्षेत्रीय शासन संरचनाओं, नेतृत्व भूमिकाओं और कार्यान्वयन योजना की स्थापना।
    • इस चरण में घरेलू नवाचार और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देते हुए कानूनी, नियामक और डिजिटल अवसंरचना की तैयारी पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • चरण 3 (2027-2029): पायलट परियोजनाएँ और चयनित कार्यक्रम 
    • उच्च प्रभावित क्षेत्रों में पायलट परियोजनाएँ शुरू की जाएँगी ताकि वास्तविक परिस्थितियों में समाधानों का परीक्षण किया जा सके।
    • मजबूत निगरानी और मूल्यांकन ढाँचे के समर्थन से सुलभता और अंतिम छोर तक अपनाने को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • चरण 4 (2029 से आगे): राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन और एकीकरण
    • सिद्ध समाधानों को राज्यों और शहरों में विस्तारित किया जाएगा।
    • स्थानीय अनुकूलन से क्षेत्रीय प्रासंगिकता और विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों की गतिशीलता सुनिश्चित होगी। इस चरण का उद्देश्य मिशन को संस्थागत रूप देना और व्यापक स्तर पर इसके लाभों को बनाए रखना है।

अन्य सरकारी पहल और नीतिगत समर्थन

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए उत्कृष्टता केंद्र
    • सरकार ने स्वास्थ्य सेवा, कृषि और सतत् शहरों के लिए तीन विकास केंद्र स्थापित किए और बजट 2025 में शिक्षा के लिए चौथे विकास केंद्र की घोषणा की।
    • ये विकास केंद्र सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग को जोड़ने वाले सहयोगात्मक नवाचार केंद्रों के रूप में कार्य करते हैं।
    • भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने के लिए कौशल विकास हेतु पाँच राष्ट्रीय विकास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।
  • AI सक्षमता ढाँचा: यह ढाँचा AI युग में नीति निर्माण और शासन की तैयारी को मजबूत करने के लिए सरकारी अधिकारियों को संरचित AI प्रशिक्षण प्रदान करता है।
  • सर्वम् AI फॉर आधार सर्विसेज: सर्वम् AI, जनरेटिव AI का उपयोग करके आधार सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए UIDAI के साथ कार्य कर रहा है।
    • अप्रैल 2025 में, इसे सार्वजनिक सेवा वितरण और डिजिटल विश्वास को बेहतर बनाने के लिए भारत का संप्रभु ओपन-सोर्स लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) इकोसिस्टम बनाने की मंजूरी मिली।
  • भाषिनी फॉर डिजिटल इंक्लूजन
    • भाषिनी भारतीय भाषाओं में अनुवाद और वाक् उपकरण उपलब्ध कराता है ताकि नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाएँ आसान हो सकें।
    • जून 2025 में, भाषिनी और CRIS ने रेलवे प्लेटफॉर्मों पर बहुभाषी AI समाधान तैनात करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
    • भाषिनी 20 भाषाओं में कार्य करता है और 350 से अधिक AI मॉडल को एकीकृत करता है।
  • भारतजेन AI
    • 2 जून 2025 को लॉन्च किया गया, भारतजेन AI भारत का पहला सरकारी वित्तपोषित मल्टीमॉडल LLM है।
    • यह 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है और भारत-विशिष्ट डेटासेट का उपयोग करके पाठ, भाषण और छवि को समझने में सक्षम बनाता है।

दैनिक जीवन में AI (भारत में)

  • स्वास्थ्य देखभाल
    • नैदानिक ​​सहायता: AI प्रारंभिक निदान, स्कैन विश्लेषण और व्यक्तिगत उपचार में सुधार करता है। AI-सक्षम टेलीमेडिसिन ग्रामीण रोगियों को विशेषज्ञों से जोड़ता है।
    • ICMR तथा इंडियाAI के सहयोग से सुरक्षित और नैतिक स्वास्थ्य सेवा नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
  • कृषि
    • निर्णय सहायता: मौसम पूर्वानुमान, कीट चेतावनी, सिंचाई/बुवाई का समय।
    • सरकारी उपकरण: योजनाओं तक पहुँच के लिए किसान ई-मित्र वर्चुअल असिस्टेंट जैसे उपकरण (उदाहरण के लिए, पीएम-किसान)
    • निगरानी: उपग्रह, मौसम संबंधी जानकारी और मृदा विश्लेषण का उपयोग करके राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य निगरानी।
  • शिक्षा एवं कौशल विकास
    • CBSE एकीकरण: CBSE कक्षा VI से एक मॉड्यूल के माध्यम से और कक्षा IX से XII तक एक वैकल्पिक AI विषय के रूप में AI शिक्षण प्रदान करता है।
    • दीक्षा में कीवर्ड सर्च और पढ़कर सुनाने जैसे AI फीचर शामिल हैं।
    • युवाAI कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को कृषि, आरोग्य, शिक्षा और स्मार्ट सिटी जैसे आठ विषयों पर प्रशिक्षित करता है।
  • शासन एवं न्याय वितरण
    • ई-कोर्ट्स चरण III: ई-कोर्ट्स चरण III के अंतर्गत अनुवाद, समय-निर्धारण, प्रशासनिक दक्षता और चैटबॉट के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपकरणों को एकीकृत किया जा रहा है।
    • स्थानीय भाषा में पहुँच: उच्च न्यायालय निर्णयों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कर रहे हैं, जिससे न्याय वितरण अधिक समावेशी हो रहा है।
  • मौसम एवं जलवायु सेवाएँ
    • पूर्वानुमान: अंतरराष्ट्रीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) वर्षा, बिजली गिरने, कोहरे, आग और चक्रवात की तीव्रता का पूर्वानुमान लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करता है।
    • चक्रवात आकलन: उन्नत ड्वोरक तकनीक (Advanced Dvorak Technique) जैसे उपकरण चक्रवात आकलन में सहायक होते हैं।
    • मौसमजीपीटी को मौसम संबंधी सलाह देने वाले चैटबॉट के रूप में विकसित किया जा रहा है।

भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए AI द्वारा प्रदत्त प्रमुख अवसर

  • उत्पादकता आधारित आर्थिक विकास
    • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दोहराए जाने वाले कार्यों को स्वचालित करके, निर्णय लेने की क्षमता में सुधार करके और आपूर्ति शृंखलाओं को अनुकूलित करके विनिर्माण, सेवा और लघु एवं मध्यम उद्यमों में उत्पादकता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकती है।
    • भारत जैसी श्रम-प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए, AI रोजगार में कमी किए बिना ‘प्रति श्रमिक अधिक उत्पादन’ का मार्ग प्रशस्त करती है।
    • AI-संचालित स्वचालन कृषि में दक्षता में सुधार करता है; परिशुद्ध कृषि, AI-सक्षम आपूर्ति शृंखलाएँ और स्मार्ट उत्पादन प्रणालियाँ लागत कम करती हैं और उत्पादन बढ़ाती हैं।
    • AI वर्ष 2035 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 1.7 ट्रिलियन डॉलर का योगदान दे सकती है।
  • आईटी और ज्ञान सेवाओं का विस्तार
    • भारतीय आईटी कंपनियां क्लाउड सेवाओं, साइबर सुरक्षा और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में AI का उपयोग कर रही हैं।
    • वैश्विक AI सेवा बाजार के वर्ष 2027 तक 297 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियाँ बड़े पैमाने पर AI परियोजनाओं का नेतृत्व कर रही हैं।
  • शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक गुणक के रूप में कार्य करना
    • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेहतर लक्ष्यीकरण, निगरानी और सेवा वितरण के माध्यम से त्वरित, डेटा-आधारित शासन को सक्षम बनाती है।
    • भविष्यवाणी विश्लेषण कल्याणकारी योजनाओं में होने वाले नुकसान को कम कर सकता है, जबकि AI-संचालित शिकायत निवारण प्रणाली प्रशासनिक जवाबदेही को बढ़ा सकती है।
  • भाषा और वॉइस AI के माध्यम से समावेशन
    • भारत की भाषायी बहुलता के कारण डिजिटल शासन समावेशी नहीं रह पाता।
    • भाषिणी और भारतजेन जैसी वॉइस-फर्स्ट और बहुभाषी AI प्रणालियाँ नागरिकों को उनकी मातृभाषाओं में सेवाओं तक पहुँचने की सुविधा प्रदान करती हैं।
    • यह AI को डिजिटल समावेशन के एक साधन के रूप में स्थापित करता है, विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और अनौपचारिक श्रमिकों के लिए।
  • जलवायु लचीलापन और आपदा प्रबंधन
    • AI मौसम पूर्वानुमान, आपदा पूर्वानुमान और बाढ़, चक्रवात, लू और वनाग्नि के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में सुधार करता है।
    • भारत जैसे जलवायु-संवेदनशील देश में, ऐसी पूर्वानुमान क्षमता जीवन की हानि और आर्थिक नुकसान को कम कर सकती है।
  • व्यापक स्तर पर स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच
    • AI शीघ्र निदान, व्यक्तिगत उपचार और दूरस्थ स्वास्थ्य सेवा वितरण में सहायता करता है।
    • टेलीमेडिसिन और AI-सहायता प्राप्त निदान ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य सेवा अंतर को पाट सकते हैं और तृतीयक अस्पतालों पर दबाव कम कर सकते हैं।
  • वैश्विक AI सेवाएँ और नवाचार केंद्र
    • सॉफ्टवेयर सेवाओं में भारत की क्षमता, लागत-कुशल प्रतिभा और अनुप्रयोग-स्तरीय नवाचार इसे एक वैश्विक AI सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करते हैं।
    • विकासशील देशों के लिए तैयार किए गए AI समाधानों का निर्यात रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव का एक नया स्रोत बन सकता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था के सामने प्रस्तुत की जाने वाली चुनौतियाँ

  • डेटा गोपनीयता और विश्वास की कमी
    • AI प्रणालियाँ बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत और व्यवहार संबंधी डेटा पर निर्भर करती हैं।
    • कमजोर सहमति तंत्र तथा निम्न डिजिटल साक्षरता की स्थिति में डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अंतर्गत प्रवर्तन संबंधी कमियाँ सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करने का जोखिम उत्पन्न करती हैं।
    • विश्वास के बिना, शासन और सार्वजनिक सेवाओं में AI को अपनाने में प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा।
  • डिजिटल विभाजन और असमान पहुँच
    • AI का उपयोग शहरी, उच्च आय वाले और औपचारिक क्षेत्रों तक ही सीमित है।
    • ग्रामीण और अनौपचारिक क्षेत्रों में सीमित इंटरनेट पहुँच, उपकरणों की उपलब्धता और डिजिटल कौशल की कमी AI के समावेशी प्रसार को बाधित करती है। इससे मौजूदा सामाजिक और क्षेत्रीय असमानताओं के और गहराने का खतरा है।
  • पूँजी का केंद्रीकरण
    • उन्नत AI विकास के लिए महँगे GPU, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर और पूँजी की आवश्यकता होती है।
    • विदेशी AI प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता: गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनAI जैसी वैश्विक कंपनियों की AI प्रौद्योगिकियों पर भारत की निर्भरता तकनीकी संप्रभुता, विदेशी मुद्रा बहिर्वाह और रणनीतिक निर्भरता को लेकर चिंताएँ पैदा करती है।
    • इससे स्टार्ट-अप, शोधकर्ताओं और सार्वजनिक संस्थानों के लिए प्रवेश बाधाएँ उत्पन्न होती हैं, जिससे नवाचार विविधता सीमित हो जाती है।
  • कौशल ध्रुवीकरण और श्रम विस्थापन का खतरा
    • भारत का कौशल विकास तंत्र खंडित और औपचारिक क्षेत्रों की ओर झुका हुआ है।
    • कौशल की कमी: भारत के कार्यबल में AI-केंद्रित प्रशिक्षण की पर्याप्त कमी है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, केवल 51% स्नातक ही रोजगार योग्य हैं।
    • समय पर कौशल विकास के अभाव में, AI आय असमानता और नौकरी की असुरक्षा में वृद्धि कर सकता है।
  • पारंपरिक व्यापार मॉडलों में व्यवधान
    • AI-संचालित डिजिटल प्लेटफॉर्म खुदरा, कृषि और लघु विनिर्माण को नया रूप दे रहे हैं।
    • स्थानीय व्यापारी, कारीगर और छोटे उत्पादक AI-सक्षम ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्वचालित आपूर्ति शृंखलाओं के कारण प्रतिस्पर्द्धात्मकता खो रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था का आधार माने जाने वाले छोटे व्यवसायों की स्थिरता खतरे में पड़ रही है।
  • एल्गोरिथम पूर्वाग्रह और अस्पष्टता
    • पूर्वाग्रही या अपूर्ण डेटासेट पर प्रशिक्षित AI मॉडल सामाजिक भेदभाव को पुन: उत्पन्न कर सकते हैं।
    • अपारदर्शी ‘ब्लैक-बॉक्स’ प्रणालियाँ न्याय, पुलिसिंग और कल्याणकारी वितरण जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में जवाबदेही को कम करती हैं।
    • यह समानता और उचित प्रक्रिया के संवैधानिक मूल्यों को चुनौती देता है।
  • साइबर सुरक्षा जोखिम
    • जैसे-जैसे पारंपरिक क्षेत्र AI को एकीकृत करते हैं, साइबर खतरों के प्रति उनका जोखिम बढ़ता जाता है। कई छोटे व्यवसायों में AI सिस्टम और डेटा को सुरक्षित करने की तकनीकी क्षमता का अभाव है।
    • CERT-In द्वारा प्राप्त और ट्रैक की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में साइबर सुरक्षा संबंधी 20,41,360 घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जिससे पारंपरिक उद्योगों में AI को अपनाने के प्रति विश्वास, डेटा सुरक्षा और लचीलेपन को लेकर चिंताएँ बढ़ गईं।
  • नियामक और संस्थागत पिछड़ापन
    • AI कानूनों, मानकों और निगरानी तंत्रों की तुलना में तेजी से विकसित हो रहा है।
    • भारत में वर्तमान में एकीकृत AI नियामक ढांचा और स्वतंत्र लेखापरीक्षा संस्थान मौजूद नहीं हैं।
    • विलंबित विनियमन से अति-विनियमन और अपर्याप्त सुरक्षा दोनों का जोखिम है।

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेरोजगारी बढ़ेगी?

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अक्सर नौकरियों के लिए खतरा माना जाता है, लेकिन यह नए अवसर भी पैदा कर रही है।
  • नैसकॉम की रिपोर्ट ‘एडवांसिंग इंडियाज AI स्किल्स’ (अगस्त 2024) के अनुसार, भारत में AI क्षेत्र के पेशेवरों की संख्या वर्ष 2027 तक लगभग 6-6.5 लाख से बढ़कर 12.5 लाख हो जाएगी।
  • डेटा साइंस, AI इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स और डेटा क्यूरेशन जैसे क्षेत्रों में माँग बढ़ रही है।
  • कार्यबल को तैयार करने के लिए, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 10 उभरती प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास हेतु FutureSkills PRIME कार्यक्रम शुरू किया।
  • अगस्त 2025 तक, 18.56 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 3.37 लाख से अधिक ने पाठ्यक्रम पूरा कर लिया था।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लाभ उठाने के लिए भारत द्वारा उठाए जा सकने वाले कदम

इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए बुनियादी ढांचे, कौशल, शासन और समावेश को शामिल करते हुए एक समन्वित रणनीति की आवश्यकता है।

  • संप्रभु और स्केलेबल AI अवसंरचना का निर्माण
    • भारत को सार्वजनिक AI कंप्यूटिंग क्षमता में निवेश करना चाहिए, जिसमें GPU, क्लाउड अवसंरचना और स्टार्ट-अप, अकादमिक संस्थानों और राज्यों के लिए सुलभ उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग शामिल हैं।
    • इससे विदेशी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर निर्भरता कम होती है और AI क्षमताओं का कुछ निजी संस्थाओं में केंद्रीकरण रोका जा सकता है।
  • डेटा गवर्नेंस और डेटा गुणवत्ता को मजबूत करना
    • AI का प्रदर्शन डेटा की गुणवत्ता, विविधता और प्रतिनिधित्व पर निर्भर करता है।
    • भारत को सभी क्षेत्रों में डेटा संग्रह, गुमनामीकरण, अंतरसंचालनीयता और सहमति तंत्र को मानकीकृत करना चाहिए।
    • AIकोष (AIKosh) जैसे प्लेटफॉर्मों को विश्वसनीय, पूर्वाग्रह-नियंत्रित और भारत-विशिष्ट डेटासेट को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • कुशल और अनुकूलनीय कार्यबल विकसित करना
    • भारत को संकीर्ण तकनीकी कौशल से आगे बढ़कर समाज में AI साक्षरता को बढ़ावा देना चाहिए।
    • इसमें स्कूली शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अनौपचारिक तथा गिग श्रमिकों के लिए पुनर्कौशल कार्यक्रमों में AI अवधारणाओं को एकीकृत करना शामिल है।
    • ध्यान केवल कोडिंग कौशल पर नहीं, बल्कि मानव-AI सहयोग पर होना चाहिए।
  • अनुप्रयोग-आधारित और समस्या-केंद्रित AI को बढ़ावा देना
    • भारत का तुलनात्मक लाभ वास्तविक विकासात्मक चुनौतियों के लिए AI के अनुप्रयोग में निहित है।
    • नीति को कृषि, स्वास्थ्य सेवा, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, शिक्षा और शासन के लिए AI समाधानों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
    • इससे यह सुनिश्चित होता है कि AI का उपयोग केवल प्रौद्योगिकी-आधारित होने के बजाय संदर्भ-संवेदनशील और सामाजिक रूप से प्रासंगिक बना रहे।
  • जिम्मेदार और नैतिक AI तैनाती सुनिश्चित करना
    • भारत को AI प्रणालियों में निष्पक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवीय निगरानी के सिद्धांतों को डिजाइन चरण से ही शामिल करना चाहिए।
    • स्वतंत्र ऑडिट, व्याख्या की आवश्यकताएँ और शिकायत निवारण तंत्र को संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए।
  • स्टार्ट-अप, MSMEs और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करना
    • लक्षित वित्तपोषण, नियामक सुगमता और सार्वजनिक कंप्यूटरों तक पहुँच स्टार्ट-अप और एमएसएमई को AI का उपयोग करके नवाचार करने में सक्षम बना सकती है।
    • भारतीय AI समाधानों के लिए प्रारंभिक बाजार निर्माण हेतु सार्वजनिक खरीद नीतियों का लाभ उठाया जा सकता है। इससे घरेलू नवाचार और रोजगार सृजन को मजबूती मिलती है।
  • AI-आधारित जलवायु लचीलापन ढाँचा विकसित करना
    • AI वायु गुणवत्ता, जल संसाधनों और नवीकरणीय ऊर्जा की वास्तविक समय की निगरानी के माध्यम से जलवायु अनुकूलन में सहायता कर सकता है।
    • जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) में AI को एकीकृत करने से स्मार्ट ग्रिड के माध्यम से आपदा पूर्वानुमान और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो सकता है।
  • पर्यटन विकास में AI का उपयोग करना
    • AI-संचालित पर्यटन प्लेटफॉर्म यात्रा अनुभवों को वैयक्तिकृत कर सकते हैं, पर्यटक प्रवाह का प्रबंधन कर सकते हैं और विरासत को बढ़ावा दे सकते हैं।
    • ‘देखो अपना देश’ जैसी पहलों में AI को एकीकृत करने से स्मार्ट सेवाओं और आकर्षक तकनीकों के माध्यम से घरेलू पर्यटन को मजबूत किया जा सकता है।

निष्कर्ष

यदि बुद्धिमानी से संचालित किया जाए, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत का सबसे शक्तिशाली विकास कारक बन सकती है, जो राज्य की क्षमता को बढ़ाएगी, नागरिकों को सशक्त बनाएगी और समानता, विश्वास या लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता किए बिना दीर्घकालिक विकास को बनाए रखेगी।

अभ्यास प्रश्न

भारत वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मुख्य रूप से मौजूदा IT, वित्तीय और डेटा संरक्षण कानूनों के माध्यम से नियंत्रित करता है। भारत के AI पारिस्थितिकी तंत्र के लिए इससे उत्पन्न होने वाली प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

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