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भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति तथा वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट

Lokesh Pal January 01, 2025 03:31 191 0

संदर्भ

हाल ही में RBI ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के अंतर्गत भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति 2023-24 पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट, RBI की वार्षिक रिपोर्ट एवं वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report) जारी की।

भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति पर रिपोर्ट 2023-24

  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (Scheduled Commercial Banks- SCBs)
    • ऋण वृद्धि एवं लाभप्रदता: SCBs ने लगातार छठे वर्ष लाभप्रदता में सुधार दर्ज किया।
    • बेहतर संपत्ति गुणवत्ता: सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (NPAs) 13 वर्ष के निचले स्तर 2.5% (सितंबर 2024 तक) पर आ गईं।
    • मजबूत पूँजी स्थिति: पूँजी-से-जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात (Capital-to-Risk-Weighted Assets Ratio- CRAR) 16.8% रहा (नियामक न्यूनतम 9% है, बेसल-III मानदंड 8% अनिवार्य करते हैं)। 
  • शहरी सहकारी बैंक (Urban Co-operative Banks- UCBs): लगातार तीसरे वर्ष परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के साथ बैलेंस शीट का विस्तार हुआ।
  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ (Non-Banking Financial Companies- NBFCs): NBFCs ने दोहरे अंक की ऋण वृद्धि हासिल की एवं सितंबर 2024 तक उनका सकल NPA घटकर 3.4% हो गया।
  • तकनीकी प्रगति: छोटे व्यवसायों एवं व्यक्तियों के लिए ऋण पहुँच बढ़ाने के लिए यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (Unified Lending Interface- ULI) एवं ओपन क्रेडिट इनेबलमेंट नेटवर्क (Open Credit Enablement Network- OCEN) लॉन्च किया गया।
  • वित्तीय समावेशन: वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय रणनीति (National Strategy for Financial Inclusion- NSFI) वर्ष 2025-30 का उद्देश्य वित्तीय समावेशन को गहरा करना और उभरती चुनौतियों से निपटना है।

दिसंबर 2024 FSR से मुख्य निष्कर्ष

  • समष्टि अर्थशास्त्र संबंधी मजबूत बुनियादी सिद्धांत: भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी घटक मजबूत बने हुए हैं, जो वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन को समर्थन दे रहे हैं।
  • स्वस्थ बैंकिंग क्षेत्र: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (Scheduled Commercial Banks- SCBs) मजबूत लाभप्रदता और घटती गैर-निष्पादित आस्तियों (Non-Performing Assets- NPAs) को प्रदर्शित करते हैं, जबकि उनके पास पर्याप्त पूँजी और तरलता बफर्स ​​भी हैं। 
  • स्वस्थ NBFCs: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने बड़े पैमाने पर पूँजी बफर, मजबूत आय, मजबूत ब्याज मार्जिन तथा बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता बनाए रखा।
  • बीमा क्षेत्र की स्थिरता: बीमा क्षेत्र ने आवश्यक न्यूनतम से अधिक समेकित शोधन क्षमता अनुपात को बरकरार रखा, जिससे लचीलापन सुनिश्चित हुआ।
  • व्यापक आर्थिक एवं वित्तीय लचीलापन: वैश्विक कमजोरियों के बावजूद, भारत की वित्तीय प्रणाली मजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी ढाँचे, स्वस्थ बैलेंस शीट और वित्तीय संस्थानों में पर्याप्त पूँजी बफर पर आधारित है।
  • वैश्विक जोखिम: रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक मंदी की संभावना जैसे मौजूदा वैश्विक जोखिमों को स्वीकार किया गया है।

वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report- FSR) के बारे में

  • वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (FSR) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी एक द्विवार्षिक रिपोर्ट है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • वित्तीय प्रणाली का आकलन: FSR भारतीय वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन का व्यापक मूल्यांकन प्रदान करता है।
    • जोखिमों की पहचान: यह घरेलू एवं वैश्विक दोनों तरह से वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित जोखिमों की पहचान एवं विश्लेषण करता है।
    • व्यापक आर्थिक विश्लेषण: रिपोर्ट में उन समष्टि आर्थिक कारकों का विश्लेषण शामिल है, जो वित्तीय प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
    • तनाव परीक्षण: यह विभिन्न परिदृश्यों के तहत उनके लचीलेपन का आकलन करने के लिए वित्तीय प्रणाली के विभिन्न क्षेत्रों पर तनाव परीक्षण करता है।
  • महत्त्व
    • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: FSR संभावित वित्तीय संकटों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
    • नीति मार्गदर्शन: यह नीति निर्माताओं, नियामकों एवं बाजार सहभागियों को मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
    • पारदर्शिता एवं जवाबदेही: यह वित्तीय प्रणाली के भीतर पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ाता है।
  • हालिया FSR: दिसंबर 2024 में जारी नवीनतम FSR ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन पर प्रकाश डाला।

RBI द्वारा अपनी हालिया रिपोर्ट (2024) में उठाई गई चिंताएँ

  • बढ़ती बैंकिंग धोखाधड़ी: धोखाधड़ी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, अप्रैल-सितंबर 2024 के दौरान ₹21,367 करोड़ की राशि के 18,461 मामले सामने आए, जबकि पिछले वर्ष ₹2,623 करोड़ की राशि के 14,480 मामले थे।
  • साइबर सुरक्षा खतरे: डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के कारण साइबर धोखाधड़ी में वृद्धि हुई है, जिससे मजबूत उपायों, सार्वजनिक जागरूकता एवं म्यूल खातों की पहचान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।
  • वैश्विक आर्थिक कमजोरियाँ: लगातार मध्यम अवधि के जोखिम जैसे कि परिसंपत्ति मूल्यांकन में वृद्धि, उच्च सार्वजनिक ऋण, भू-राजनीतिक तनाव और उभरती प्रौद्योगिकी जोखिम को वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित चुनौतियों के रूप में देखा गया।
  • परिचालन एवं प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम: बढ़ते धोखाधड़ी के मामले और तकनीकी खतरे वित्तीय संस्थाओं की प्रतिष्ठा और परिचालन अखंडता के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं, जिसके लिए गहन नियामक सतर्कता की आवश्यकता होती है।
  • उभरते प्रौद्योगिकी जोखिम: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने के लिए संबंधित सुरक्षा और प्रणालीगत जोखिमों का समाधान करना आवश्यक है।

रिपोर्ट में RBI द्वारा सुझाए गए उपाय (2024)

  • साइबर सुरक्षा बढ़ाना
    • साइबर धोखाधड़ी के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर निवारक जागरूकता अभियान चलाएँ।
    • धोखाधड़ी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने वाले म्यूल खातों की पहचान करने और उन्हें समाप्त करने के प्रयासों को मजबूत करना।
  • वित्तीय मध्यस्थों को सुदृढ़ बनाना
    • बैंकों, NBFCs और अन्य वित्तीय संस्थाओं के लिए जोखिम प्रबंधन ढाँचे को बेहतर बनाकर लचीलापन बढ़ाना।
    • मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट द्वारा मान्य पूँजी पर्याप्तता और तरलता मानदंडों का पालन सुनिश्चित करना।
  • नियामक सतर्कता एवं अनुकूलनशीलता
    • परिचालन और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिमों को कम करने के लिए निगरानी और विनियामक तंत्र को सुदृढ़ बनाना।
    • उभरते वित्तीय परिदृश्यों और उभरती तकनीकी चुनौतियों के प्रति अनुकूलनशीलता को बढ़ावा देना।
  • धोखाधड़ी की रोकथाम एवं उपभोक्ता संरक्षण
    • उन्नत तकनीकी उपकरणों का लाभ उठाकर धोखाधड़ी की रोकथाम के उपायों को तेज करना।
    • ग्राहक जागरूकता बढ़ाएँ और वित्तीय नुकसान के विरुद्ध मजबूत सुरक्षा तंत्र सुनिश्चित करना।
  • वित्तीय स्थिरता पर ध्यान देना
    • उच्च सार्वजनिक ऋण और भू-राजनीतिक जोखिम जैसी मध्यम अवधि की कमजोरियों को संबोधित करके वित्तीय प्रणालियों में लचीलापन बढ़ाना।
    • म्यूचुअल फंड और क्लियरिंग कॉरपोरेशन सहित सभी क्षेत्रों में प्रणालीगत स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तनाव परीक्षण जारी रखना।

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