100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

वेनेजुएला पर अमेरिका का हमला

Lokesh Pal January 06, 2026 04:32 144 0

संदर्भ

हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका ने ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ संचालित किया, जिसके तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को कराकस, वेनेजुएला में गिरफ्तार कर सत्ता से अपदस्थ कर दिया गया।

  • अमेरिका का यह कदम राजनयिक दबाव के बजाय प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप पर आधारित था। अमेरिका ने वेनेजुएला पर अस्थायी नियंत्रण की घोषणा की और उसके तेल को बेचने की योजना बनाई, जिससे क्षेत्रीय भू-राजनीति में नया बदलाव आया।

वेनेजुएला और इसका वैश्विक महत्त्व

  • वेनेजुएला, जिसका आधिकारिक नाम बोलिवेरियन गणराज्य वेनेजुएला है, दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर अवस्थित है।
  • प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध और रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण स्थान पर अवस्थित, वेनेजुएला ने ऐतिहासिक रूप से वैश्विक ऊर्जा बाजारों एवं भू-राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • हालिया वर्षों में यह देश क्षेत्रीय अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक वार्ताओं का केंद्र रहा है।

मुख्य विशेषताएँ और वैश्विक महत्त्व

  • ऊर्जा महाशक्ति: यहाँ विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार (लगभग 300 अरब बैरल) और ‘ओरिनोको’ बेल्ट में महत्त्वपूर्ण गैस भंडार मौजूद है; ओपेक का एक प्रमुख सदस्य होने के कारण, वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है।
  • भू-राजनीतिक महत्त्व: कैरेबियन क्षेत्र में, अमेरिका के निकट रणनीतिक रूप से स्थित होने के कारण, एक भू-राजनीतिक धुरी के रूप में कार्य करता है; रूस, चीन, तुर्किए और ईरान के साथ गठबंधन, क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देते हैं।
  • क्षेत्रीय प्रभाव और स्थिरता: ‘बोलिवेरियन एलायंस फॉर द पीपल्स ऑफ अवर अमेरिका’ (ALBA), ‘यूनियन ऑफ साउथ अमेरिकन नेशंस’ (UNASUR) और ‘कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरेबियन स्टेट्स’ (CELAC) के माध्यम से लैटिन अमेरिकी राजनीति में सक्रिय घरेलू संकटों के कारण बड़े पैमाने पर पलायन (लगभग 7 मिलियन) होता है, जो पड़ोसी देशों, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करता है।
  • आर्थिक और मानवीय चुनौतियाँ: अति मुद्रास्फीति, राजनीतिक अस्थिरता और मानवीय संकट वैश्विक तेल बाजारों, निवेश प्रवाह तथा मानवीय सहायता चैनलों को प्रभावित करते हैं।
  • कूटनीतिक तनाव का केंद्र: वेनेजुएला का राजनीतिक संकट अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता के मानदंडों और बहुपक्षीय कूटनीति के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रहा है।
  • वैश्विक प्रभाव: तेल उत्पादन में परिवर्तन, प्रतिबंध या आंतरिक अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा कीमतों, मुद्रास्फीति, प्रवासन पैटर्न और भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं।

अमेरिका ने निकोलस मादुरो को क्यों गिरफ्तार किया?

  • ‘डॉन-रो सिद्धांत’ (Don-roe Doctrine) का क्रियान्वयन: अमेरिकी हस्तक्षेप ने ट्रंप द्वारा नए रूप में प्रस्तुत मुनरो सिद्धांत (Monroe Doctrine) को क्रियान्वित किया, जिसमें कूटनीति के बजाय प्रत्यक्ष कार्रवाई के माध्यम से पश्चिमी गोलार्द्ध में अमेरिकी प्रभुत्व स्थापित किया गया।
  • ‘नारको-स्टेट’ (Narco-State) का औचित्य: अमेरिकी न्याय विभाग ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक नार्को-स्टेट का मुखिया बताया और उन्हें ‘ट्रेन डे अरागुआ नेटवर्क’ (Tren de Aragua network) से संबंधित आपराधिक अभियोगों एवं अमेरिका में कोकीन तथा फेंटानिल की तस्करी की कथित साजिशों में संलिप्त होने का हवाला दिया।
    • अमेरिका का तर्क है कि मादुरो के शासनकाल में संगठित मादक पदार्थों की तस्करी राष्ट्र संरचनाओं में समाहित हो गई और अवैध राजस्व से शासन का अस्तित्व बना रहा तथा राष्ट्र की नीतियों पर प्रभाव पड़ा, इस घटना को आमतौर पर नार्को-आतंकवाद के रूप में वर्णित किया जाता है।

  • नार्को-आतंकवाद: यह एक ऐसी स्थिति को संदर्भित करता है, जहाँ संगठित मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क व्यवस्थित रूप से राष्ट्र संस्थाओं को वित्तपोषित करते हैं, उन्हें प्रभावित करते हैं या उनमें हस्तक्षेप कर लेते हैं, जिससे आपराधिक गतिविधि और राजनीतिक सत्ता के बीच की रेखा अस्पष्ट हो जाती है।
  • फेंटानिल: यह एक ‘सिंथेटिक ओपिओइड’ है, जो मॉर्फिन से 50-100 गुना अधिक शक्तिशाली है। इसका कानूनी रूप से दर्द निवारक के रूप में उपयोग किया जाता है, लेकिन इसकी अवैध तस्करी तेजी से बढ़ रही है, जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका में गंभीर ओवरडोज का संकट उत्पन्न हो रहा है।
  • अमेरिका में फेंटानिल एक सार्वजनिक चिंता का विषय क्यों है?
    • अमेरिका में फेंटानिल की तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे के रूप में देखा जा रहा है, न कि केवल एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में, क्योंकि यह बड़े पैमाने पर ओवरडोज से होने वाली मौतों और संगठित अपराध नेटवर्क को वित्तपोषण करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संसाधन अभिशाप सिद्धांत (Resource Curse Theory)

  • संसाधन अभिशाप सिद्धांत यह तर्क देता है कि प्राकृतिक संसाधनों (तेल, गैस और खनिज) से समृद्ध देशों में व्यापक विकास के बजाय प्रायः धीमी आर्थिक वृद्धि, कमजोर संस्थाएँ, तानाशाही, भ्रष्टाचार, संघर्ष, बाहरी हस्तक्षेप, अस्थिरता और शासन परिवर्तन जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैं।
    • ऐतिहासिक उदाहरण: इराक, लीबिया, वेनेजुएला।

  • प्रतिबंधों और कूटनीति की विफलता: वर्षों से चले आ रहे आर्थिक प्रतिबंध, कूटनीतिक अलगाव और विपक्ष के समर्थन के बावजूद मादुरो को सत्ता से हटाना संभव नहीं था, जिसके चलते सत्ता परिवर्तन के लिए जबरन हस्तक्षेप का रास्ता अपनाया गया।
  • ऊर्जा साम्राज्यवाद और तेल नियंत्रण: वेनेजुएला के 300 अरब बैरल से अधिक के तेल भंडार महत्त्वपूर्ण थे। अमेरिका ने खुले तौर पर वेनेजुएला पर अस्थायी रूप से शासन करने, उसके तेल क्षेत्र का पुनर्निर्माण करने और अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को आपूर्ति सुलभ कराने का इरादा जताया।
    • वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा कच्चा तेल भंडार है, जो सऊदी अरब से भी अधिक है, जिससे वैश्विक तेल बाजारों और भू-राजनीति के लिए उसके ऊर्जा क्षेत्र पर नियंत्रण रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हो जाता है।
  • महाशक्तियों के बीच आपसी प्रतिस्पर्द्धा का मुकाबला: मादुरो को हटाने का उद्देश्य चीन और रूस के रणनीतिक आधार को समाप्त करना था, जिन्होंने कराकास के साथ सैन्य, आर्थिक और तकनीकी संबंध मजबूत कर लिए थे।
  • क्षेत्रीय स्थिरता का दृष्टिकोण: इस कदम को लैटिन अमेरिका में प्रसारित हो रहे सत्ता के पतन, शरणार्थी प्रवाह, संगठित अपराध और अस्थिरता जैसे मुद्दों से निपटने के लिए आवश्यक बताया गया।

मुनरो सिद्धांत (Monroe Doctrine)

  • उत्पत्ति और मूल सिद्धांत (1823): राष्ट्रपति जेम्स मुनरो के नाम पर नामित यह सिद्धांत अमेरिका में नए या विस्तारित यूरोपीय उपनिवेशीकरण का विरोध करता था और पश्चिमी गोलार्द्ध को एक अलग राजनीतिक क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करता था।
  • प्रारंभिक रूप से प्रतीकात्मक: शुरुआत में, यह अत्यधिक सीमा तक एक घोषणात्मक नीति थी, जिसकी प्रवर्तन क्षमता सीमित थी और यह अमेरिकी सैन्य शक्ति के बजाय ब्रिटिश नौसेना शक्ति और नैतिक संकेत पर निर्भर थी।
  • गोलार्द्ध प्रभुत्व का विस्तार: समय के साथ, अमेरिका ने इस सिद्धांत की पुनर्व्याख्या करते हुए लैटिन अमेरिका को रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना और मध्य एवं दक्षिण अमेरिका पर अनन्य प्रभाव का दावा किया।
  • हस्तक्षेपवाद का संस्थागतकरण: रूजवेल्ट कोरोलरी (1904) और शीतयुद्ध की नीतियों के माध्यम से, इस सिद्धांत ने प्रायः कथित वैचारिक खतरों का मुकाबला करने के लिए प्रत्यक्ष सैन्य और राजनीतिक हस्तक्षेपों को उचित ठहराया।
  • व्यापक ऐतिहासिक उपयोग: वर्ष 1898 और वर्ष 1994 के बीच, प्रायः राष्ट्रीय सुरक्षा और साम्यवाद-विरोधी तर्कों का हवाला देते हुए अमेरिका ने लैटिन अमेरिका में सरकारों को बदलने के लिए कम-से-कम 41 बार हस्तक्षेप किया।
  • शीतयुद्ध के बाद ‘मुनरो सिद्धांत’ का प्रभाव कम होना: हालिया अमेरिकी प्रशासन ने नव-साम्राज्यवाद और क्षेत्रीय अविश्वास से इसके जुड़ाव को स्वीकार करते हुए, मुनरो सिद्धांत पर वार्ता करना कम किया।
  • समकालीन पुनरुद्धार (‘मुनरो सिद्धांत’): ट्रंप के शासनकाल में, इस सिद्धांत को एक दमनकारी रूप में पुनर्स्थापित किया गया है, जिसमें सैन्य कार्रवाई, संसाधनों पर नियंत्रण और प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के बहिष्कार पर जोर दिया गया है, जैसा कि वेनेजुएला में देखा गया है।

‘डॉन-रो सिद्धांत’ की सीमाएँ – घरेलू विरोध

  • MAGA सिद्धांत के साथ विरोधाभास: ट्रंप का ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) स्लोगन ‘फारएवर वार्स’ (Forever Wars) को समाप्त करने और विदेशी मामलों में हस्तक्षेप करने से बचने पर आधारित था।
    • उनका यह बयान कि अमेरिका, सत्ता हस्तांतरण होने तक वेनेजुएला पर राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखेगा, अनिश्चितकालीन हस्तक्षेप का संकेत देता है, जिससे उनके अपने राजनीतिक आधार में अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।
  • उभरता असंतोष: MAGA समर्थक प्रमुख हस्तियों ने सार्वजनिक रूप से इस हस्तक्षेप की आलोचना करते हुए इसे अमेरिकी करदाताओं के पैसे से वित्तपोषित अमेरिकी सैन्य-औद्योगिक राजनीति की निरंतरता बताया।
  • वैचारिक विभाजन: प्रमुख हस्तियों ने कानूनी तर्क (नशीले पदार्थों से संबंधित आतंकवाद के अभियोग) और ट्रंप के राजनीतिक औचित्य (तेल की पुनर्प्राप्ति और फेंटानिल नियंत्रण) के बीच विसंगतियों को भी उजागर किया, जिससे रणनीतिक असंगति सामने आई।
  • स्थिरता पर प्रभाव: इस प्रकार का घरेलू प्रतिरोध अमेरिकी भागीदारी की अवधि, वित्तपोषण और वैधता को सीमित कर सकता है, जिससे जल्दबाजी या अस्थिर वापसी का जोखिम बढ़ सकता है।

ऐतिहासिक संदर्भ

  • वर्ष 2024 के चुनाव का कारण: वेनेजुएला में वर्ष 2024 के विवादित राष्ट्रपति चुनावों के बाद संकट और बढ़ गया, जिसमें विपक्षी नेताओं ने जीत के सुबूत प्रस्तुत किए।
    • राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पद छोड़ने से इनकार करने के कारण बारबाडोस समझौता पूरी तरह से विफल हो गया, जिससे वार्ता के माध्यम से लोकतांत्रिक सत्ता हस्तांतरण की सभी संभावनाएँ समाप्त हो गईं।

बारबाडोस समझौता

  • परिचय: यह नॉर्वे की मध्यस्थता और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के समर्थन से अक्टूबर 2023 में वेनेजुएला सरकार और विपक्ष के बीच हुए राजनीतिक एवं चुनावी समझौतों के एक समूह को संदर्भित करता है।
  • उद्देश्य: इस समझौते का उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय राष्ट्रपति चुनाव सुनिश्चित करना था, जिसमें विपक्षी उम्मीदवारों पर लगे प्रतिबंध हटाने, अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षकों को अनुमति देने और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए परिस्थितियाँ बनाने की प्रतिबद्धताएँ शामिल थीं।
  • समझौते का टूटना: हालाँकि, मादुरो सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं पर प्रतिबंध और विवादित चुनावी प्रक्रियाओं सहित प्रमुख प्रावधानों को लागू करने में विफल रहने के बाद समझौता टूट गया, जिससे वार्ता के माध्यम से राजनीतिक समाधान की संभावनाएँ समाप्त हो गईं।

  • वर्ष 2025 की सैन्य शक्ति वृद्धि: वर्ष 2025 के मध्य तक, अमेरिका ने कैरेबियाई क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति का विस्तार किया और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क और अवैध तेल शिपमेंट के खिलाफ पूर्व-निवारक कार्रवाई की।
    • इसका उद्देश्य वेनेजुएला शासन की गुप्त अर्थव्यवस्था को निष्क्रिय करना था और यह प्रतिबंधों पर आधारित दबाव से सैन्य बल प्रयोग की ओर एक परिवर्तन का संकेत था।
  • पीढ़ीगत और वैचारिक प्रतिद्वंद्विता: यह टकराव ह्यूगो चावेज की वर्ष 1999 की बोलिवेरियन क्रांति से शुरू हुआ, जिसने अमेरिका समर्थित उदार लोकतांत्रिक मॉडल को साम्राज्यवाद-विरोधी समाजवादी व्यवस्था से बदल दिया।
    • इस वैचारिक बदलाव के परिणामस्वरूप अमेरिका और वेनेजुएला के बीच दशकों तक प्रतिबंध, राजनयिक अलगाव और रणनीतिक शत्रुता बनी रही।

संयुक्त राज्य अमेरिका-वेनेजुएला संबंध (26 वर्षों का अवलोकन)

  • चावेज युग (1999-2013): ह्यूगो चावेज ने बोलिवेरियन क्रांति शुरू की, तेल क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण किया और अमेरिका-विरोधी वामपंथी विदेश नीति अपनाई, जिसके तहत उन्होंने रूस, चीन और ईरान के साथ संबंध मजबूत किए।
    • तानाशाही के आरोपों, अमेरिका समर्थित गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के निष्कासन और वर्ष 2002 के तख्तापलट के प्रयास के कारण अमेरिका तथा वेनेजुएला के बीच आपसी संबंध बिगड़ गए, जिसके लिए वेनेजुएला ने अमेरिका को दोषी ठहराया।

  • मादुरो का उदय और प्रारंभिक तनाव (2013-2019): निकोलस मादुरो ने आर्थिक गिरावट और भ्रष्टाचार घोटालों के बीच सत्ता सँभाली।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका ने अधिकारियों और प्रमुख क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगाए।
    • अत्यधिक मुद्रास्फीति, भोजन और दवाओं की कमी और बड़े पैमाने पर पलायन बढ़ गया।
    • वर्ष 2018 के विवादित चुनावों ने राजनीतिक संकट को उत्पन्न किया; विपक्षी नेता जुआन गुआइदो को संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों से मान्यता प्राप्त हुई।
  • ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान तनाव में वृद्धि (2025)
    • सैन्य तैनाती: संयुक्त राज्य अमेरिका ने कैरेबियन सागर के पास अपनी नौसैनिक क्षमता में वृद्धि की।
    • ‘कार्टेल डे लॉस सोल्स’ का नामकरण: संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया और मादुरो पर इसका नेतृत्व करने का आरोप लगाया।
    • केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) के अभियान और प्रतिबंध: ट्रंप ने CIA के गुप्त अभियानों को अधिकृत किया, तेल प्रतिबंधों को बढ़ाया और फेडरल एविएशन  एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) द्वारा यात्रा संबंधी एडवाइजरी  जारी की।
    • वेनेजुएला की प्रतिक्रिया: मादुरो ने संयुक्त राज्य अमेरिका की कार्रवाइयों की निंदा की और देशव्यापी सैन्य अभ्यास किए, जिससे तनाव और बढ़ गया।

वर्तमान परिस्थितियाँ और प्रमुख संवेदनशील बिंदु (2026)

  • नेतृत्व का गतिरोध: मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद, वेनेजुएला के सर्वोच्च न्यायालय ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम नेता नियुक्त किया।
  • लोकतांत्रिक आशाएँ बनाम बाहरी नियंत्रण: निर्वासन में रह रही विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने नागरिक नेतृत्व वाले लोकतांत्रिक परिवर्तन का आह्वान किया है। इसे बाहरी सैन्य हस्तक्षेप और घरेलू लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच संभावित टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
  • उभरता सुरक्षा संकट: सरकार समर्थक मिलिशिया (कोलेक्टिवोस) की सक्रियता और क्यूबा की सुरक्षा एजेंसियों की संभावित संलिप्तता से असममित विद्रोह का डर उत्पन्न होता है, जिससे वेनेजुएला के दीर्घकालिक संघर्ष में फँसने का खतरा है।

वर्ष 2026 के संकट में विभिन्न दृष्टिकोणों की तुलना

मुद्दा संयुक्त राज्य अमेरिका का रुख वेनेजुएला सरकार का रुख
कानूनी आधार मादक पदार्थों से संबंधित आतंकवाद के लिए आपराधिक अभियोगों का प्रवर्तन। सत्ताधारी राष्ट्राध्यक्ष को अवैध रूप से बंधक बनाकर राज्य आतंकवाद फैलाना।
अंतरराष्ट्रीय कानून सुरक्षा की जिम्मेदारी (R2P) का आह्वान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की रोकथाम। संप्रभुता और बल प्रयोग संबंधी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-2(4) का उल्लंघन।
तेल प्रबंधन बुनियादी ढाँचे को पुनर्जीवित करने के लिए अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को तैनात करके ‘पुनर्निर्माण’ किया जा रहा है। संप्रभु राष्ट्रीय संपदा की ‘चोरी’ और लूट।

भारतीय परिप्रेक्ष्य

  • संप्रभुता के प्रति सैद्धांतिक प्रतिबद्धता: भारत की प्रतिक्रिया राष्ट्र की संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति उसके दीर्घकालिक समर्थन को दर्शाती है, जो उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और संयुक्त राष्ट्र-केंद्रित कूटनीति के अनुरूप है।
    • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-2(7) में निहित गैर-हस्तक्षेप का सिद्धांत संप्रभु राज्यों के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को प्रतिबंधित करता है और उत्तर-औपनिवेशिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक आधार स्तंभ बना हुआ है।
    • पूर्ववर्ती शासन परिवर्तन और उसके चयनात्मक अनुप्रयोग के जोखिमों को देखते हुए, भारत बाहरी रूप से थोपे गए शासन परिवर्तन के प्रति सतर्क है।
  • संयमित कूटनीतिक संकेत: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पूरे घटनाक्रम पर ‘गहरी चिंता’ व्यक्त की और सभी पक्षों से संप्रभुता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने का आग्रह किया।
    • यह संतुलित वक्तव्य भारत-अमेरिका रणनीतिक समन्वय और चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं को बनाए रखने की आवश्यकता को भी दर्शाता है।
  • ऊर्जा एवं आर्थिक हित: वेनेजुएला भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण बना हुआ है।
    • ऐतिहासिक रूप से, भारत प्रतिवर्ष 6-7 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का वेनेजुएला का कच्चा तेल आयात करता था, हालाँकि अमेरिकी प्रतिबंधों ने आयात को कम कर दिया था, जिसके कारण रूस, खाड़ी देशों, संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब और इराक की ओर विविधीकरण को बढ़ावा मिला।
    • ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) का वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में, जिनमें सैन क्रिस्टोबल परियोजनाएँ भी शामिल हैं, पर्याप्त निवेश है, जो सत्ता परिवर्तन या लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की स्थिति में जोखिम में पड़ सकता है।
    • दक्षिण अमेरिकी भू-राजनीतिक तनाव में लगातार वृद्धि से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे भारत के तेल आयात बिल पर असर पड़ेगा; हालाँकि, जब तक कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बनी रहती हैं, आयात के विविध स्रोतों के कारण राजकोषीय प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।
    • अमेरिकी हस्तक्षेप एक ऐतिहासिक भू-राजनीतिक बदलाव भी दर्शाता है, जिससे लैटिन अमेरिका में अमेरिका का रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र बढ़ रहा है और तेल अवसंरचना की सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला में संभावित व्यवधान तथा वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।
  • ‘ग्लोबल साउथ’ का नेतृत्व: ‘ग्लोबल साउथ’ के एक प्रमुख देश के रूप में, भारत इस बात को प्रमुखता से उठाता है कि एकतरफा हस्तक्षेप किस प्रकार दक्षिण-दक्षिण एकजुटता और जबरन सत्ता परिवर्तन के विरुद्ध मानदंडों को प्रभावित करते हैं, विशेषकर संसाधन संपन्न विकासशील देशों में।
  • बहुपक्षीय मध्यस्थता की भूमिका: भारत ब्रिक्स या संयुक्त राष्ट्र के मंचों के माध्यम से नागरिक नेतृत्व वाले, समावेशी राजनीतिक परिवर्तन की वकालत करता है।
  • वाणिज्य दूतावास और मानवीय प्राथमिकताएँ: भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानवीय सहायता तक पहुँच को सुगम बनाना हमारी तात्कालिक परिचालन संबंधी चिंताएँ हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ

क्षेत्र/हितधारक प्रतिक्रिया
लैटिन अमेरिका मिश्रित प्रतिक्रियाएँ: कोलंबिया, ब्राजील और पनामा ने सावधानीपूर्वक अमेरिकी प्रभाव को स्वीकार किया; क्यूबा, ​​निकारागुआ, बोलीविया और मैक्सिको ने इस हस्तक्षेप की निंदा करते हुए इसे अवैध हस्तक्षेप बताया।
रूस और चीन दोनों देशों ने इस कार्यवाही को अमेरिकी साम्राज्यवाद करार दिया गया और पश्चिमी गोलार्द्ध में आगे सैन्य अतिक्रमण के खिलाफ चेतावनी दी गई; वेनेजुएला को समर्थन देने का वादा किया गया।
यूरोपीय संघ संयम, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन का आह्वान किया गया; ऊर्जा और रणनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका की स्पष्ट निंदा नहीं की।
संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने संप्रभुता के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की; सुरक्षा परिषद में संभावित बहस की उम्मीद है, जिसमें अमेरिका द्वारा वीटो शक्ति का प्रयोग किए जाने की संभावना है।
ग्लोबल साउथ मुख्य रूप से इसकी आलोचना की गई और इसे गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले जबरदस्ती हस्तक्षेप का एक उदाहरण बताया गया।

मादुरो पर अमेरिकी नियंत्रण का वैश्विक प्रभाव

  • हस्तक्षेप के मानदंडों में परिवर्तन: यह अभियान किसी राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ सीधे सैन्य हस्तक्षेप की ओर पारंपरिक राजनयिक और आर्थिक दबाव से एक महत्त्वपूर्ण विचलन को दर्शाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संप्रभुता मानदंडों के हनन की चिंताएँ बढ़ रही हैं।
  • ऊर्जा बाजार में अस्थिरता: वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार (300 अरब बैरल से अधिक) है। इन भंडारों पर अमेरिकी नियंत्रण और नियोजित दोहन वैश्विक तेल कीमतों को नया आकार दे सकता है, ओपेक की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है और विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर असर डाल सकता है।
  • महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता में तीव्रता: इस नियंत्रण से लैटिन अमेरिका में रूस और चीन का प्रभाव बाधित होता है, जहाँ दोनों देशों ने आर्थिक, सैन्य और तकनीकी रूप से मजबूत पकड़ बना रखी थी। इससे क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई या रणनीतिक सक्रियता में वृद्धि हो सकती है।
  • ‘ग्लोबल साउथ’ और बहुपक्षवाद: ग्लोबल साउथ के कई देश इस हस्तक्षेप को संप्रभुता का उल्लंघन मानते हैं, जिससे संयुक्त राष्ट्र आधारित संघर्ष समाधान तंत्र कमजोर हो सकते हैं और शक्तिशाली देशों द्वारा एकतरफा दृष्टिकोण को बढ़ावा मिल सकता है।
  • सुरक्षा और प्रवासन के परिणाम: राजनीतिक अस्थिरता शरणार्थियों के प्रवाह, मानव तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी को बढ़ा सकती है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा संरचनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।
  • ताइवान और रणनीतिक संकेत
    • हस्तक्षेप के मानदंडों में बदलाव: वेनेजुएला में अमेरिकी अभियान एकतरफा कार्रवाई करने की तत्परता को दर्शाता है, जो इस बात का संकेत है कि पारंपरिक प्रतिरोध और राजनयिक दबाव को प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से दरकिनार किया जा सकता है।
    • प्रतिरोध बनाम प्रोत्साहन: विश्लेषकों का मानना है कि चीन, ताइवान के खिलाफ कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए वेनेजुएला के उदाहरण का हवाला दे सकता है।
    • महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता का तीव्र होना: यह अभियान हिंद-प्रशांत जैसे रणनीतिक क्षेत्रों सहित वैश्विक स्तर पर चीनी प्रभाव का मुकाबला करने के अमेरिकी संकल्प को रेखांकित करता है, जिससे ताइवान पर अमेरिकी प्रभाव और भी मजबूत हो जाता है।
    • चीनी महत्त्वाकांक्षाओं पर प्रभाव: चीन की बेल्ट एंड रोड पहल और विदेशी प्रभाव के विस्तार की सीमाएँ तय हो रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिकी कार्रवाई चीन की रणनीतिक गणनाओं को बाधित कर सकती है।

वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप से उत्पन्न चुनौतियाँ और चिंताएँ

  • संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून: किसी विदेशी सेना द्वारा सत्ताधारी राष्ट्राध्यक्ष को बंदी बनाना अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में असामान्य वृद्धि का प्रतीक है, जिससे कानून प्रवर्तन, सत्ता परिवर्तन और सशस्त्र हस्तक्षेप के बीच की सीमाएँ अस्पष्ट हो जाती हैं।
    • संप्रभुता का उल्लंघन: सत्ताधारी राष्ट्राध्यक्ष को बंदी बनाना, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-2(4) को कमजोर करते हुए, सीमा से बाहर सैन्य हस्तक्षेपों के लिए एक उदाहरण कायम करता है।
    • अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का क्षरण: इससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि शक्तिशाली देश कूटनीति या सुरक्षा परिषद की मंजूरी को दरकिनार कर सकते हैं, जिससे बहुपक्षीय संघर्ष-समाधान तंत्र कमजोर हो जाते हैं।
  • क्षेत्रीय स्थिरता के जोखिम: राज्य नियंत्रण में व्यवधान से मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध बढ़ सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
    • असममित संघर्ष: सरकार समर्थक मिलिशिया (कोलेक्टिवोस) का गठजोड़ और क्यूबा की संभावित संलिप्तता से दीर्घकालिक विद्रोह का खतरा बढ़ जाता है।
    • शरणार्थी प्रवाह: राजनीतिक अस्थिरता पड़ोसी देशों में बड़े पैमाने पर पलायन को बढ़ावा दे सकती है, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है और मानवीय संकट उत्पन्न हो सकता है।
  • ऊर्जा एवं आर्थिक चिंताएँ: वेनेजुएला के 300 अरब बैरल से अधिक कच्चे तेल पर अमेरिकी नियंत्रण से कीमतों में विकृति आ सकती है और ओपेक की कार्य प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
    • विकासशील देशों के लिए पहुँच: भारत और चीन जैसे देशों को वेनेजुएला के तेल तक सीमित पहुँच का सामना करना पड़ सकता है, जिससे ऊर्जा विविधीकरण रणनीतियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
  • क्षेत्रीय स्थिरता के जोखिम: राज्य नियंत्रण में व्यवधान से मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध बढ़ सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
    • असममित संघर्ष: सरकार समर्थक मिलिशिया (कोलेक्टिवोस) का गठजोड़ और क्यूबा की संभावित संलिप्तता से दीर्घकालिक विद्रोह का खतरा बढ़ जाता है।
    • शरणार्थी प्रवाह: राजनीतिक अस्थिरता पड़ोसी देशों में बड़े पैमाने पर पलायन को बढ़ावा दे सकती है, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है और मानवीय संकट उत्पन्न हो सकता है।
  • ऊर्जा और आर्थिक चिंताएँ: वेनेजुएला के 300 अरब बैरल से अधिक कच्चे तेल पर अमेरिकी नियंत्रण से कीमतों में विकृति आ सकती है और ओपेक की कार्य प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
    • विकासशील देशों के लिए पहुँच: भारत और चीन जैसे देशों को वेनेजुएला के तेल तक सीमित पहुँच का सामना करना पड़ सकता है, जिससे ऊर्जा विविधीकरण रणनीतियाँ प्रभावित हो सकती हैं।

आगे की राह 

  • बहुपक्षीय निगरानी की ओर संक्रमण: अमेरिका को वेनेजुएला पर प्रत्यक्ष नियंत्रण छोड़ने के बजाय यूनाइटेड नेशंस-आर्गेनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स (UN-OAS) द्वारा निगरानी किए जाने वाले ढाँचे को अपनाना होगा, जिससे समावेशी चुनाव सुनिश्चित हो सकें और राजनीतिक प्रक्रिया को वैधता मिल सके।
  • संस्थागत पुनर्निर्माण: औपनिवेशिक शैली के नियंत्रण को रोकने के लिए नेशनल असेंबली के अधिकार की बहाली अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
    • कानून के शासन और सतत् शासन को सुनिश्चित करने के लिए घरेलू संस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
  • समावेशी संवाद और सुलह: यदि ‘चाविस्टा’ समर्थकों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया जाता है तो स्थिरता प्राप्त नहीं की जा सकती है।
    • चाविस्टा से तात्पर्य चाविस्मो के समर्थक से है, जो वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज से जुड़ी राजनीतिक विचारधारा है।
    • सामाजिक विभाजन को दूर करने, विद्रोह को रोकने और पूर्व शासन के समर्थकों को एक शांतिपूर्ण राजनीतिक ढाँचे में एकीकृत करने के लिए दक्षिण अफ्रीका की शैली का सत्य और सुलह दृष्टिकोण आवश्यक हो सकता है।
  • सुरक्षा एवं मानवीय उपाय: तत्काल उपायों में नागरिकों, शरणार्थियों और विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, सशस्त्र मिलिशिया (कोलेक्टिवोस) को निरस्त्र करना और उन्हें एकीकृत करना शामिल होना चाहिए।
    • राजनीतीकरण से बचने के लिए मानवीय सहायता बहुपक्षीय चैनलों के माध्यम से दी जानी चाहिए।
  • ऊर्जा एवं आर्थिक स्थिरीकरण: वेनेजुएला के तेल क्षेत्र का प्रबंधन पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए और वैश्विक बाजारों तक समान पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी एक शक्ति का एकाधिकार न हो सके।
    • आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना राजनीतिक परिवर्तन और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष

वर्ष 2026 में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी, एकतरफा हस्तक्षेप का एक चुनौतीपूर्ण उदाहरण कायम करती है। भारत के लिए संप्रभुता, संवाद और बहुपक्षवाद रणनीतिक अनिवार्यताएँ हैं, हालाँकि समावेशी परिवर्तन तथा नागरिक सुरक्षा वेनेजुएला की वैधता एवं स्थिरता को पुनर्स्थापित करने की कुंजी हैं।

अभ्यास प्रश्न  हाल ही में वेनेजुएला में हुए अमेरिकी हस्तक्षेप के संदर्भ में, अंतरराष्ट्रीय निष्क्रियता से एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था को सामान्य बनाने का जोखिम है, जहाँ संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून के बजाय अमेरिका के रणनीतिक हितों के अधीन हो जाती है। इस संदर्भ में, ऐसे एकतरफा हस्तक्षेपों के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए आगे की राह सुझाइए। 

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.