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नमस्ते योजना के तहत अपशिष्ट संग्राहकों की गणना

Lokesh Pal February 05, 2026 03:26 10 0

संदर्भ

केंद्र सरकार ने नमस्ते योजना के अंतर्गत अपशिष्ट संग्राहकों (Waste Pickers) की संचालित गणना संबंधी राष्ट्रीय-स्तरीय आँकड़े जारी किए हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2016 के अनुसार अपशिष्ट संग्राहक की परिभाषा:

  • “अपशिष्ट संग्राहक” से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह से है, जो अनौपचारिक रूप से सड़कों, कूड़ेदानों, सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाओं, प्रसंस्करण एवं अपशिष्ट निपटान सुविधाओं से पुनः उपयोग योग्य एवं पुनर्चक्रण योग्य ठोस अपशिष्ट का संग्रह एवं पुनर्प्राप्ति करते हैं तथा प्रत्यक्ष या मध्यस्थों के माध्यम से पुनर्चक्रकों को बेचकर अपनी आजीविका अर्जित करते हैं।

राष्ट्रीय-स्तरीय निष्कर्ष

  • सामाजिक संरचना
    • 84.5%: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) (हाशिए पर स्थित समुदाय)।
    • 10.7%: सामान्य वर्ग।
  • लैंगिक प्रोफाइल
    • 48.7% महिलाएँ, 51.3% पुरुष, 0.007% ट्रांसजेंडर।
    • लगभग लैंगिक संतुलन, न्यूनतम ट्रांसजेंडर प्रतिनिधित्व।
  • राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश-स्तरीय विविधताएँ
    • दिल्ली एवं गोवा: सामान्य वर्ग के अपशिष्ट संग्राहक SC, ST एवं OBC समुदायों की संयुक्त संख्या से अधिक हैं, जो राष्ट्रीय पैटर्न से स्पष्ट रूप से भिन्न है।
    • पश्चिम बंगाल: कुल अपशिष्ट संग्राहकों में से 42.4% सामान्य वर्ग से संबंधित हैं, जिससे यह एक अन्य उल्लेखनीय अपवाद बनता है।
    • क्षेत्रीय असमानता संकेतक: ये राज्य-स्तरीय विविधताएँ दर्शाती हैं कि अपशिष्ट संग्राहकों की सामाजिक प्रोफाइल क्षेत्रीय श्रम बाजारों, प्रवासन पैटर्न तथा शहरी सामाजिक-आर्थिक संरचनाओं से प्रभावित होती है।
  • स्वच्छता संबंधी गतिविधियों से मृत्यु: वर्ष 2014 से अब तक सीवर एवं सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के कारण 859 मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें वर्ष 2025 में 43 मौतें शामिल हैं, जो यंत्रीकरण एवं श्रमिक सुरक्षा की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

अपशिष्ट संग्राहक ठोस अपशिष्ट के संग्रह एवं पृथक्करण में संलग्न होते हैं, जबकि मैनुअल स्कैवेंजर मानव मलमूत्र का निपटान करते हैं; दोनों कानूनी एवं कार्यात्मक रूप से अलग श्रेणियाँ हैं, यद्यपि दोनों ही व्यावसायिक संवेदनशीलता का सामना करते हैं।

नमस्ते योजना (यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना) के बारे में

  • अवलोकन: नमस्ते योजना एक मानव-केंद्रित राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य पूर्ण यंत्रीकरण को बढ़ावा देकर तथा सुरक्षा, गरिमा और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करके सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई में स्वच्छता कर्मियों की मैनुअल भागीदारी को समाप्त करना है।
  • प्रारंभ और कार्यान्वयन: यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ की गई है तथा इसका कार्यान्वयन राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा किया जा रहा है।
  • प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना
  • बजट आवंटन: वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2025-26 तक की तीन वर्षों की अवधि के लिए 349.73 करोड़ रुपये।
  • लक्षित लाभार्थी: यह योजना शहरी भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों को लक्षित करती है, जिसमें लगभग 4,800 शहरी स्थानीय निकायों को कवर करते हुए एक लाख से अधिक स्वच्छता कर्मियों की प्रोफाइलिंग का अनुमान है।
  • सतत् विकास लक्ष्यों के साथ संरेखण: यह योजना संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्यों के अंतर्गत वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है, विशेष रूप से—
    • सतत् विकास लक्ष्य-6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता),
    • सतत् विकास लक्ष्य-8 (सम्मानजनक कार्य और आर्थिक वृद्धि), और
    • सतत् विकास लक्ष्य-10 (असमानताओं में कमी)।
  • नमस्ते योजना के उद्देश्य
    • औपचारीकरण और सशक्तीकरण: यह योजना सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों तथा अपशिष्ट संग्राहकों को एक सुरक्षित, यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत करके उन्हें औपचारिक बनाने, पुनर्वास करने और सशक्त बनाने का लक्ष्य रखती है।
    • सुरक्षा और गरिमा: नमस्ते योजना यंत्रीकृत सफाई और प्रमाणित सुरक्षा प्रथाओं को बढ़ावा देकर यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी स्वच्छता कर्मी मानव अपशिष्ट के सीधे संपर्क में न आए।
    • शून्य मृत्यु लक्ष्य: यह योजना प्रशिक्षित कर्मियों, सुदृढ़ आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के माध्यम से स्वच्छता कार्यों में शून्य मृत्यु दर प्राप्त करने का प्रयास करती है।
    • सैनिप्रेन्योरशिप को बढ़ावा: स्वच्छता कर्मियों को स्वयं सहायता समूह और स्वच्छता उद्यम बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उद्यमिता और दीर्घकालिक आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

कानूनी और संवैधानिक ढाँचा

  • मैनुअल स्कैवेंजिंग को मैनुअल स्कैवेंजर्स के नियोजन का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के अंतर्गत प्रतिबंधित किया गया है।
  • संविधान का अनुच्छेद-17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है, जो जाति-आधारित स्वच्छता श्रम के उन्मूलन का संवैधानिक आधार प्रदान करता है।

नमस्ते योजना के प्रमुख घटक

  • स्वच्छता कर्मियों की डिजिटल प्रोफाइलिंग: सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों की पहचान और प्रोफाइलिंग एक समर्पित डिजिटल अनुप्रयोग के माध्यम से की जाती है, ताकि समावेशन, निगरानी और लक्षित लाभ वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
    • अपशिष्ट संग्राहक गणना अनुप्रयोग: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जून 2025 में प्रारंभ किया गया।
  • स्वास्थ्य बीमा कवरेज: सभी पहचाने गए स्वच्छता कर्मियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है।
  • व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण: यंत्रीकृत स्वच्छता संचालन की सुरक्षित प्रक्रिया सुनिश्चित करने हेतु संरचित व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • यंत्रीकरण हेतु पूँजी सब्सिडी: स्वच्छता-संबंधी वाहनों और यंत्रीकृत उपकरणों की खरीद हेतु पात्र कर्मियों या समूहों को पाँच लाख रुपये तक की पूँजी सब्सिडी प्रदान की जाती है।
  • व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण: स्वच्छता कार्यों के दौरान व्यावसायिक जोखिमों से सुरक्षा हेतु व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण किट वितरित की जाती हैं।
  • आपातकालीन स्वच्छता प्रतिक्रिया इकाइयों के लिए सुरक्षा उपकरण: स्वच्छता-संबंधी आपात स्थितियों के दौरान सुरक्षित और त्वरित प्रतिक्रिया सक्षम करने हेतु सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • सूचना, शिक्षा और संचार अभियान: स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, गरिमा तथा मैनुअल स्कैवेंजिंग के उन्मूलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु अभियान संचालित किए जाते हैं।
  • अपशिष्ट संग्राहकों के लिए ( वर्ष 2024 में जोड़ा गया): अपशिष्ट संग्राहकों की गणना और प्रोफाइलिंग की जाती है, उन्हें मौसमी और आवश्यकता-आधारित व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण किट प्रदान की जाती हैं, व्यावसायिक सुरक्षा और कौशल विकास संबंधी प्रशिक्षण दिया जाता है, तथा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत कवर किया जाता है।

योजना अभिसरण: नमस्ते योजना, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के साथ कर्मचारी सुरक्षा और यंत्रीकरण आयाम को संबोधित करते हुए पूरक रूप से कार्य करती है।

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