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Lokesh Pal
March 25, 2026 05:46
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पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक चिंता का विषय बनकर उभरा है, और सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्गों, प्रवासी सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति, मुद्रास्फीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रत्यक्ष प्रभावों को उजागर किया है।




पश्चिम एशिया का संकट केवल विदेश नीति की चुनौती नहीं है, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की एक व्यापक परीक्षा है, जो ऊर्जा, खाद्य, समुद्री क्षेत्र, प्रवासी समुदाय और आर्थिक सुरक्षा के बीच गहरे अंतर्संबंधों को उजागर करती है। इससे मिलने वाला स्थायी सबक यह है कि लचीलापन बार-बार आने वाले झटकों से निपटने में नहीं, बल्कि विद्युतीकरण, विविधीकरण, घरेलू क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक रणनीतिक दूरदर्शिता के माध्यम से बाहरी निर्भरता को व्यवस्थित रूप से कम करने में निहित है।
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