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AI मैराथन: वैश्विक AI प्रतिस्पर्द्धा में भारत

Lokesh Pal March 20, 2025 04:55 44 0

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित भारत AI मिशन ने स्वदेशी AI मॉडल [विशेष रूप से लार्ज लैंग्वेज मॉडल (Large Language Models-LLM)] के प्रशिक्षण के लिए इसके डेटा तक पहुँच के लिए संसद के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

  • भारत ने भविष्य के आर्थिक एवं तकनीकी नेतृत्व के लिए AI के रणनीतिक महत्त्व को पहचानते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण के लिए अपने प्रयासों को तेज कर दिया है।

AI विकास में सरकारी पहल

  • भारत AI मिशन
    • संसद के विशाल डेटासेट, जिसमें संसदीय बहस, चर्चाएँ और कानून शामिल हैं, को स्वदेशी AI मॉडल के लिए एक महत्त्वपूर्ण प्रशिक्षण संसाधन के रूप में उपयोग करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
    • व्यापक AI प्रशिक्षण के लिए दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो से अतिरिक्त डेटासेट की पहचान की गई।

  • AI इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास
    • 14,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) के साथ एक कॉमन कंप्यूट सुविधा की स्थापना की, जो उच्च-प्रदर्शन AI कंप्यूटेशन को निष्पादित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • शिक्षा क्षेत्र एवं उद्योग के साथ सहयोग
    • भारत के विविध भाषायी और सामाजिक संदर्भ के अनुरूप स्वदेशी LLM का सह-निर्माण करने के लिए विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और स्टार्ट-अप्स के साथ साझेदारी शुरू करना।

स्वदेशी AI क्षमताओं का महत्त्व

  • रणनीतिक स्वायत्तता
    • हाल के वैश्विक अनुभव बाहरी AI प्लेटफॉर्म (जैसे OpenAI मॉडल पर प्रतिबंध) पर निर्भर होने पर जोखिम की संभावना बनी रहती है। स्वदेशी AI विकसित करने से तकनीकी संप्रभुता और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्वामित्व वाली तकनीक
    • वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, भारत का दृष्टिकोण सहयोग (विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ, पूरक शक्तियों का लाभ उठाते हुए) पर जोर देता है।
      • स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय भारत को केंद्रित AI प्रतिभा का सबसे बड़ा केंद्र मानता है, जो सहयोग की विशाल क्षमता का संकेत देता है।

भारत में AI अनुप्रयोग के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र

  • कृषि: महाराष्ट्र के बारामती जिले में AI-संचालित परामर्श प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप किसानों ने परिशुद्ध कृषि के माध्यम से गन्ने की पैदावार में तीन गुना वृद्धि हासिल की।
  • स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा: सेवा वितरण और दक्षता में सुधार के लिए AI-सक्षम निदान, पूर्वानुमान विश्लेषण, व्यक्तिगत शिक्षण प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कक्षाएँ सर्वोच्च प्राथमिकताएँ बनी हुई हैं।
  • मौसम पूर्वानुमान: AI उपकरणों का उपयोग करके मौसम पूर्वानुमान का उन्नत विश्लेषण आपदा जोखिमों को काफी कम कर सकती है, जिससे कृषि नियोजन एवं आपदा प्रबंधन को लाभ मिल सकता है।
  • औद्योगिक रखरखाव: कंपनियाँ AI-आधारित दृश्य निरीक्षण प्रणालियों का उपयोग करती हैं तथा विसंगतियों का पता लगाने और कठिन पहुँच वाली मशीनरी में उपकरण विफलता का पूर्वानुमान लगाने के लिए कंप्यूटर विजन कैमरों का उपयोग करती हैं।

भारत में AI विकास की चुनौतियाँ

  • कौशल अंतराल: पुराने पाठ्यक्रम और अपर्याप्त उद्योग-अकादमिक एकीकरण के कारण AI-प्रशिक्षित पेशेवरों की सीमित उपलब्धता है।
  • आयात निर्भरता: आयातित GPU और सेमीकंडक्टर पर भारी निर्भरता, स्वदेशी विकास को महंगा और रणनीतिक रूप से कमजोर बनाती है।
  • नैतिक एवं विनियामक चिंताएँ: गोपनीयता उल्लंघन, डेटा दुरुपयोग और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह से संबंधित जोखिमों के लिए एक मजबूत नैतिक और विनियामक ढाँचे की आवश्यकता होती है।

आगे की राह

  • क्षमता एवं कौशल विकास: सरकार का लक्ष्य देश भर के विश्वविद्यालयों में AI-केंद्रित प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना करके सेमीकंडक्टर और 5G प्रौद्योगिकी पहलों के सफल मॉडलों को दोहराना है।
    • उदाहरण: 100 5G प्रयोगशालाएँ और 240 सेमीकंडक्टर शैक्षणिक संस्थान।
  • शिक्षा सुधार: व्यावहारिक AI कौशल को शामिल करने के लिए विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में संशोधन करना, AI-संचालित क्षेत्रों में विकास को बनाए रखने के लिए कुशल पेशेवरों का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करना।
  • स्वदेशी हार्डवेयर विनिर्माण को बढ़ावा देना: GPU विनिर्माण और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए स्थानीय क्षमताओं का विकास करना ताकि विदेशी निर्भरता को कम किया जा सके और एक आत्मनिर्भर AI पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जा सके।
  • वैश्विक सहयोग: भारत को संयुक्त रूप से अत्याधुनिक AI तकनीक विकसित करने के लिए अमेरिका जैसे देशों के साथ तकनीकी संबंधों को गहरा करना चाहिए, आपसी क्षमता एवं विश्वास-आधारित साझेदारी का लाभ उठाना चाहिए।

निष्कर्ष

वैश्विक AI प्रतिस्पर्द्धा में भारत का प्रवेश रणनीतिक एवं समयानुकूल है, जो सक्रिय सरकारी पहलों, उद्योग सहयोग और शैक्षिक सुधारों द्वारा संचालित है। हालाँकि चुनौतियाँ बनी हुई हैं, स्वदेशी AI क्षमताओं के निर्माण में भारत के रणनीतिक प्रयास इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता में एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक हितधारक बनने के लिए एक आशाजनक प्रक्षेपवक्र पर रखते हैं, जो न केवल देश के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में बल्कि वैश्विक तकनीकी प्रगति में भी सकारात्मक योगदान देता है।

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