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एक्स-बैंड रडार

Lokesh Pal October 15, 2024 01:16 223 0

संदर्भ 

हाल ही में केरल के वायनाड जिले में आई बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से भविष्य में निपटने के लिए, केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने वायनाड में एक्स-बैंड रडार (X-band Radar) की स्थापना को मंजूरी दी है।

संबंधित तथ्य

  • इस रडार का उद्देश्य भूस्खलन को बढ़ावा देने वाले पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी करके प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाना है।
  • वायनाड में स्थापित एक्स-बैंड रडार मृदा के कणों की गतिविधियों की निगरानी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो संभावित भूस्खलन के संकेतक हैं।
  • अपनी उच्च कालिक प्रतिचयन क्षमता के कारण, यह रडार पर्यावरण में तेजी से होने वाले परिवर्तनों का पता लगा सकता है, जिससे अधिक सटीक और समय पर आपदा चेतावनियाँ  दी जा सकती हैं।

डॉपलर रडार और मौसम विज्ञान में इसका अनुप्रयोग

  • डॉपलर रडार (रेडियो डिटेक्शन एंड रेंजिंग) वस्तुओं के स्थान, दिशा, ऊँचाई, तीव्रता और गति का पता लगाने के लिए माइक्रोवेव रेंज में विद्युत चुंबकीय तरंगों का उपयोग करता है।
  • डॉपलर रडार, डॉपलर प्रभाव पर आधारित है, जो स्रोत और पर्यवेक्षक के सापेक्ष गति में होने पर सिग्नल की आवृत्ति में परिवर्तन का वर्णन करता है।
    • यदि वस्तुएँ पास आती हैं, तो आवृत्ति बढ़ जाती है।
  • मौसम विज्ञान के अनुप्रयोगों में, डॉपलर रडार पूर्वानुमानकर्ताओं को वर्षा का निरीक्षण करने, बादलों के निर्माण को ट्रैक करने और वास्तविक समय में आने वाले चक्रवातों की निगरानी करने में मदद करते हैं। 
  • कणों की गति का पता लगाकर, वे चक्रवात की तीव्रता और वायु की दिशा पर मूल्यवान डेटा प्रदान कर सकते हैं।

रडार (RADAR) क्या है?

  • रडार ‘रेडियो डिटेक्शन एंड रेंजिंग’ का संक्षिप्त रूप है।
  • यह एक ऐसी तकनीक है, जो वस्तुओं का पता लगाने और उन वस्तुओं की सीमा, कोण या वेग को मापने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करती है।

रडार कैसे कार्य करता है?

  • रडार एक विशिष्ट दिशा में विद्युत चुंबकीय विकिरण की एक तरंग उत्सर्जित करके कार्य करता है।
  • जब यह तरंग किसी वस्तु से टकराती है, तो कुछ ऊर्जा रडार इकाई में वापस परावर्तित हो जाती है।
  • तरंग को वापस लौटने में लगने वाले समय और उसकी शक्ति को मापकर, रडार का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है कि कोई वस्तु कितनी दूर है, वह किस दिशा में आगे बढ़ रही है और यहाँ तक कि वह किस प्रकार की वस्तु है।

विद्युत चुंबकीय तरंगें क्या हैं?

  • विद्युत चुंबकीय तरंगें ऊर्जा तरंगें हैं, जो प्रकाश की गति से अंतरिक्ष में यात्रा करती हैं, जिसमें परिवर्तनशील विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र शामिल होते हैं। 
  • रडार लंबी दूरी की पहचान और मौसम की निगरानी के लिए माइक्रोवेव, एक प्रकार की विद्युत चुंबकीय तरंग का उपयोग करता है।

डॉप्लर रडार के प्रकार: L, S, C, X और K  बैंड

  • L-बैंड रडार: कम आवृत्ति (1-2 गीगाहर्ट्ज), उच्च तरंगदैर्ध्य (15-30 सेमी), बड़े पैमाने पर मौसम पैटर्न का पता लगाने के लिए उपयुक्त।
  • S-बैंड रडार: 8-15 सेमी. की तरंगदैर्ध्य के साथ 2-4 गीगाहर्ट्ज पर संचालित होता है। सिग्नल संकीर्णन के प्रतिरोध के कारण यह निकट और दूर दोनों मौसम का पता लगाने के लिए उपयोगी है।
  • C-बैंड रडार: 4-8 गीगाहर्ट्ज आवृत्ति और 4-8 सेमी. तरंगदैर्ध्य के भीतर कार्य करता है, मुख्य रूप से कम दूरी के मौसम अवलोकन के लिए उपयोग किया जाता है।
  • X-बैंड रडार: 8-12 गीगाहर्ट्ज आवृत्ति और 2-4 सेमी. तरंगदैर्ध्य के कारण छोटे कणों और कम दूरी की मौसम निगरानी पर ध्यान केंद्रित करता है।

X-बैंड रडार की भूमिका

  • छोटी तरंगदैर्ध्य के कारण एक्स-बैंड रडार छोटे कणों, जैसे कि बारिश की बूदों और मिट्टी का पता लगा सकता है, जिससे उच्च-रिजाल्यूशन इमेजिंग मिलती है।
  • हालाँकि, छोटी तरंगदैर्ध्य के कारण, एक्स-बैंड रडार की पहचान सीमा C-बैंड या S-बैंड जैसे अन्य रडार प्रकारों की तुलना में अपेक्षाकृत सीमित होती है।

भारत का बढ़ता रडार नेटवर्क

  • भारत के भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1950 के दशक में रडार तकनीक का उपयोग करना शुरू किया, वर्ष 1970 में अपना पहला स्वदेशी X-बैंड रडार स्थापित किया।
  • देश भर में X-बैंड और S-बैंड दोनों रडार का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है।
  • मिशन मौसम (Mission Mausam): भारत सरकार ₹2,000 करोड़ की ‘मिशन मौसम’ पहल के तहत अपने मौसम संबंधी बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण करते हुए 56 अतिरिक्त डॉपलर रडार जोड़ने की योजना बना रही है।
  • इसमें मौसम पूर्वानुमान में सुधार के लिए वर्ष 2026 तक 60 रडार तक की स्थापना शामिल है।

भविष्य की परियोजनाएँ

  • भारत, नासा के सहयोग से NISAR उपग्रह (NASA-ISRO सिंथेटिक अपर्चर रडार) विकसित कर रहा है, जिसके वर्ष 2025 में लॉन्च होने की उम्मीद है।
  • NISAR L-बैंड और S-बैंड रडार को मिलाकर पृथ्वी की सतह के उच्च-रिजॉल्यूशन वाले मानचित्र तैयार करेगा, जिससे भूमि विरूपण और पर्यावरणीय परिवर्तनों जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाओं को ट्रैक करने में सहायता मिलेगी।
  • यह उपग्रह भू-वैज्ञानिक गतिविधियों और मौसम संबंधी घटनाओं की निगरानी और प्रतिक्रिया करने की देश की क्षमता को बढ़ाएगा।

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