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AI फॉर ऑल: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026

Lokesh Pal February 24, 2026 05:15 5 0

संदर्भ:

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया, साथ ही अवसंरचना और रणनीति से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों को भी उजागर किया।

शिखर सम्मेलन के बारे में

  • उच्च जन-भागीदारी: इस सम्मेलन में अभूतपूर्व भागीदारी देखी गई, जो भारत की डिजिटल रूप से जुड़ी जनसंख्या के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति प्रबल उत्साह को दर्शाती है।
  • वैश्विक स्थिति: संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा AI उपयोगकर्ता आधार बनकर उभरा है, जो उसके बढ़ते डिजिटल प्रभाव को दर्शाता है।
  • त्वरित अपनापन: जनरेटिव AI उपकरण जैसे ChatGPT, Gemini और Claude विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे हैं।

“AI का लोकतंत्रीकरण” घोषणा पत्र

  • विस्तृत अंतरराष्ट्रीय भागीदारी: इस सम्मेलन में 89 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर व्यापक वैश्विक सहभागिता को दर्शाता है।
  • स्वैच्छिक ढाँचा: प्रतिभागियों ने “AI का लोकतंत्रीकरण” शीर्षक से एक गैर-बाध्यकारी घोषणा का समर्थन किया, जो कानूनी रूप से बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं के बजाय सहयोगात्मक भावना को इंगित करता है।
  • मुख्य उद्देश्य: इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI के लाभ केवल तकनीकी रूप से उन्नत या संपन्न देशों तक सीमित न रहें, बल्कि वैश्विक स्तर पर लोगों के लिए समान रूप से सुलभ हों।

अवसंरचना और GPU अंतर

  • अवसंरचनात्मक असमानता: उच्च AI अपनाने के बावजूद, उन्नत डेटा केंद्र और उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग हार्डवेयर जैसी मूलभूत अवसंरचना मुख्यतः विकसित देशों में केंद्रित है, जिससे संरचनात्मक निर्भरता उत्पन्न होती है।
  • GPU की भूमिका: AI प्रणालियाँ ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) पर निर्भर करती हैं, जो मॉडल प्रशिक्षण के लिए आवश्यक विशाल गणितीय गणनाओं को समानांतर रूप से संसाधित करती हैं। इसके विपरीत, सीपीयू (CPU) कार्यों को क्रमिक रूप से संसाधित करता है।
  • निर्भरता और लागत संबंधी बाधाएँ: GPU महंगे होते हैं, कुछ वैश्विक कंपनियों जैसे Nvidia के प्रभुत्व में हैं, और इनके संचालन तथा शीतलन के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है, जिससे भारत में बड़े पैमाने पर AI विकास पूंजी और ऊर्जा-गहन बन जाता है।

AI सहभागिता के तीन स्तर

  • प्रशिक्षण: शून्य से आधारभूत AI मॉडल का निर्माण करने के लिए व्यापक संगणन शक्ति, बड़ी मात्रा में डेटा, और महत्वपूर्ण पूँजी निवेश की आवश्यकता होती है।
  • फाइन-ट्यूनिंग (Fine-tuning): पूर्व-प्रशिक्षित मॉडलों को विशिष्ट राष्ट्रीय या क्षेत्रीय अनुप्रयोगों के अनुरूप ढालना अपेक्षाकृत कम संसाधन-सघन है, लेकिन तकनीकी क्षमता की आवश्यकता बनी रहती है।
  • परिनियोजन (Deployment): निर्मित AI मॉडल्स को ऐप्स और सेवाओं में लागू करना सबसे कम संसाधन-गहन होता है और वर्त्तमान में यह भारत की AI गतिविधियों का मुख्य केंद्र है।

भारत के लिए रणनीतिक चिंता

  • प्रौद्योगिकीय निर्भरता का जोखिम: केवल परिनियोजन पर अत्यधिक ध्यान देने और आधारभूत मॉडल प्रशिक्षण में निवेश न करने से भारत केवल डेटा प्रदाता तक सीमित रह सकता है, तकनीकी निर्माता नहीं बन पाएगा, जिससे इसकी दीर्घकालिक IT प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर हो सकती है।

वैश्विक स्थिति और विनियमन

  • बाज़ार-उन्मुख दृष्टिकोण: भारत ने एक बाज़ार-आधारित, नवाचार-समर्थक वैश्विक ढाँचे का समर्थन किया है, जो अत्यधिक विनियमन से बचते हुए तीव्र AI विकास और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।
  • वैश्विक दक्षिण की चिंताएँ: सरल नियमन वाली प्रणाली बड़े AI निगमों के पक्ष में असमान लाभ पहुँचा सकती है, जबकि विकासशील देश डेटा दोहन, एल्गोरिदमिक पक्षपात और सामाजिक-आर्थिक विघटन के प्रति संवेदनशील रहते हैं।
  • इन्फेरेंस गैप: डिजिटल विभाजन के अतिरिक्त, कंप्यूटिंग क्षमता में असमानता “इन्फेरेंस गैप” उत्पन्न कर सकती है, जहाँ विकसित देश अधिक तेज और सक्षम AI प्रणालियाँ लागू करते हैं, जबकि संसाधन-सीमित राष्ट्र तकनीकी रूप से पीछे रह जाते हैं।

निष्कर्ष

यद्यपि भारत के पास विशाल उपभोक्ता आधार और मजबूत डिजिटल क्षमता है, फिर भी AI में दीर्घकालिक नेतृत्व के लिए उसे केवल परिनियोजन से आगे बढ़कर स्वदेशी मॉडल विकास में निवेश करना होगा तथा वैश्विक शासन ढाँचों के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी, ताकि AI समाज के लिए समग्र रूप से लाभकारी सिद्ध हो सके।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रति भारत का बढ़ता उत्साह अवसरों के साथ-साथ संरचनात्मक कमजोरियों को भी प्रस्तुत करता है। AI में प्रौद्योगिकीय संप्रभुता प्राप्त करने में भारत के समक्ष आने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए तथा समावेशी और उत्तरदायी AI शासन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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