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भारत में AI के उपयोग संबंधी आधारभूत आचरण

Lokesh Pal January 30, 2026 05:15 14 0

संदर्भ:

जैसे-जैसे AI का उपयोग बढ़ रहा है, इस बात पर चर्चा हो रही है कि भारत नवाचार को बाधित किए बिना विस्तृत विनियमन, उपयोगकर्ता सुरक्षा और घरेलू AI क्षमता के विकास को किस प्रकार संतुलित कर सकता है।

AI के प्रति भारत का वर्तमान विनियामक दृष्टिकोण:

  • मौजूदा कानूनों के माध्यम से विनियमन: भारत वर्तमान में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और IT नियमों के तहत प्लेटफॉर्म्स को ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) रखने की आवश्यकता के माध्यम से AI के उपयोग को विनियमित करता है।
    • AI का उपयोग डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के साथ-साथ RBI और SEBI के क्षेत्र-विशिष्ट वित्तीय नियमों द्वारा भी शासित होता है।
    • वर्तमान कानून प्रमुख जोखिमों (जैसे- धोखाधड़ी, गोपनीयता आदि) को विनियमित करते हैं।
  • स्पष्ट ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ का अभाव: भारत ने AI से संबंधित मनोवैज्ञानिक हानि के संबंध में ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ (देखभाल का कर्तव्य) को परिभाषित नहीं किया है। यह विस्तृत AI स्वीकृति के बावजूद उपभोक्ता संरक्षण में विनियामक अंतराल उत्पन्न करता है।

चीन का AI सुरक्षा ढाँचा:

  • भावनात्मक रूप से संवादात्मक सेवाओं पर ध्यान: चीन ने हाल ही में भावनात्मक रूप से संवादात्मक AI सेवाओं को लक्षित करने वाले मसौदा नियम प्रस्तुत किए हैं।
    • ये नियम प्रस्ताव देते हैं, कि कंपनियों को उपयोगकर्ताओं को अत्यधिक उपयोग के खिलाफ चेतावनी देनी चाहिए तथा अत्यधिक भावनात्मक स्थिति के लक्षण प्रदर्शित करने पर हस्तक्षेप करना चाहिए।
  • औचित्य और जोखिम: ये नियम मनोवैज्ञानिक निर्भरता को संबोधित करने में उचित प्रतीत होते हैं, जिसे सामान्य सामग्री विनियमन पर्याप्त रूप से कवर नहीं करता है।
    • हालाँकि, कंपनियों को उपयोगकर्ताओं की भावनात्मक स्थितियों की पहचान करने हेतु बाध्य करना कठिन हो सकता है, क्योंकि यह अधिक निजी और हस्तक्षेप युक्त निगरानी को प्रोत्साहित कर सकता है।

भारत बनाम चीन का दृष्टिकोण:

  • भारत का दृष्टिकोण: भारत का दृष्टिकोण कम दखल देने वाला है, क्योंकि यह भावनाओं की निगरानी नहीं करता है। हालाँकि, यह अधूरा है क्योंकि यह व्यापक रूप से मौजूदा कानूनों पर निर्भर है। भारत के पास वर्तमान में एक विशिष्ट AI सुरक्षा जाल की कमी है।
  • चीन का दृष्टिकोण: यह एक हस्तक्षेप आधारित दृष्टिकोण अपनाता है, जो सक्रिय रूप से भावनाओं की निगरानी करता है। यह इस उद्देश्य के लिए एक विशिष्ट सुरक्षा व्यवस्था निर्मित करता है, तथा राज्य स्पष्ट रूप से उपयोगकर्ताओं के प्रति “ड्यूटी ऑफ केयर” ग्रहण करता है।

AI के क्षेत्रीय नियामक:

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY): इसने डीपफेक और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए IT नियमों का उपयोग किया है। इसने “कृत्रिम रूप से उत्पन्न” सामग्री की परिभाषा और लेबलिंग को भी अनिवार्य किया है।
    • MeitY का दृष्टिकोण व्यापक रूप से प्रतिक्रियाशील रहा है, जो उभरते AI जोखिमों के भविष्योन्मुखी शासन को सीमित करता है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): RBI ने क्रेडिट (ऋण) में मॉडल जोखिम को नियंत्रित करने के लिए अपेक्षाएँ निर्धारित की हैं।
    • इसने वित्तीय सेवाओं में उत्तरदायी AI उपयोग का मार्गदर्शन करने के लिए FREE-AI फ्रेमवर्क विकसित किया है।
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI): SEBI ने विनियमित संस्थाओं द्वारा AI टूल के उपयोग के लिए स्पष्ट जवाबदेही पर बल दिया है, जिससे पूँजी बाजारों में AI-संचालित निर्णय लेने की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके।

आगे की राह:

  • अपस्ट्रीम क्षमता में सुधार: भारत को नवाचार को बाधित करने और विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता में वृद्धि से बचाने के लिए, अपस्ट्रीम क्षमता में कमी से बचना चाहिए। अपस्ट्रीम क्षमता में सुधार के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
    • कंप्यूट पहुँच: बेहतर कम्प्यूटेशनल संसाधन (GPUs) प्रदान करना।
    • कौशल विकास: AI विकास के लिए कार्यबल को प्रशिक्षित करना।
    • सार्वजनिक खरीद: सरकार को स्थानीय AI स्टार्टअप्स से खरीदारी करनी चाहिए।
    • अनुसंधान से उद्योग तक: लैब अनुसंधान को बाजार उत्पादों में बदलना।
  • डाउनस्ट्रीम विनियमन: भारत को निम्नलिखित प्रक्रियाओं के तहत डाउनस्ट्रीम को विनियमित करना चाहिए:
    • दृढ़ता से विनियमिन: विनियमन को सृजन के स्तर पर नवाचार को नहीं रोकना चाहिए, लेकिन प्रयोग के स्तर पर इसे कठोर और उत्तरदायी होना चाहिए।
    • उच्च-जोखिम युक्त संदर्भ: स्वास्थ्य और ऋण जैसे उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में AI का उपयोग किए जाने पर अतिरिक्त दायित्व आरोपित किए जाने चाहिए।
    • घटना रिपोर्टिंग: कंपनियों को मॉडल व्यवहार और प्रणालीगत विफलताओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आवश्यकता होनी चाहिए।
    • ड्यूटी ऑफ केयर: भावनाओं या हस्तक्षेप आधारित निगरानी का सहारा लिए बिना, कंपनियों को उपयोगकर्ता सुरक्षा हेतु जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

भारत को नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए ‘सॉवरेन AI’ (Sovereign AI) को आगे बढ़ाना चाहिए, तथा ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ के तहत मनोवैज्ञानिक हानि को कानूनी रूप से मान्यता देनी चाहिए। हस्तक्षेप आधारित ‘निगरानी-राज्य’ मॉडल से बचना चाहिए, जो गोपनीयता और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. भारत वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मुख्य रूप से मौजूदा IT, वित्तीय और डेटा संरक्षण कानूनों के माध्यम से नियंत्रित करता है। चर्चा कीजिए, कि यह भारत के AI पारितंत्र के लिए कौन-सी मुख्य चुनौतियाँ उत्पन्न करता है। अपस्ट्रीम क्षमता निर्माण और डाउनस्ट्रीम उपयोग-आधारित विनियमन का संयोजन भारत के AI शासन ढाँचे को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है?

(15 अंक, 250 शब्द)

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