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भाभा, शीत युद्ध और भारत का AI भविष्य

Lokesh Pal February 17, 2026 05:30 7 0

संदर्भ:

जब भारत दिल्ली में AI शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तब वह वैश्विक AI सहयोग का समर्थन करने और अपनी तकनीकी संप्रभुता की रक्षा करने के बीच एक रणनीतिक दुविधा का सामना कर रहा है।

  • यह दुविधा भारत की परमाणु यात्रा के दौरान होमी जे. भाभा द्वारा अपनाए गए सहयोग और रणनीतिक स्वायत्तता के संतुलित दृष्टिकोण की याद दिलाता है।

AI का विरोधाभास: सार्वभौमिकता बनाम राष्ट्रीय हित

  • सार्वजनिक हित: वैश्विक मंच AI को मानवता के लिए एक सार्वभौमिक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जैसे वायु या जल, और इसे सहयोगात्मक शासन और साझा मानकों की आवश्यकता माना जाता है।
  • पर्दे के पीछे प्रतिस्पर्धा: सहयोग की बातें होने के बावजूद, प्रमुख शक्तियाँ कंप्यूट क्षमता, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, प्रतिभा और मूलभूत मॉडलों पर तीव्र शून्य-योग प्रतिस्पर्धा में लगी हुई हैं।
  • रणनीतिक शक्ति के रूप में AI: AI की परिवर्तनकारी आर्थिक क्षमता और द्वि-उपयोग (सैन्य) अनुप्रयोगों को देखते हुए, देश अपनी मूल तकनीकों को स्वतंत्र रूप से साझा करने में हिचकिचाते हैं।
  • टेक्नो-नेशनलिज़्म का उदय: AI को बढ़ते हुए भू-राजनीतिक शक्ति के साधन के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ तकनीकी श्रेष्ठता आर्थिक प्रभुत्व, सुरक्षा प्रभाव और रणनीतिक स्वायत्तता निर्धारित करती है।

ऐतिहासिक समानता: शीत युद्ध से सबक (1955)

  • परमाणु बनाम AI प्रतिद्वंद्विता: वर्त्तमान अमेरिका–चीन AI प्रतिस्पर्धा 1955 के परमाणु हथियारों की दौड़ जैसी प्रतीत होती है, जहाँ रणनीतिक तकनीक ने भू-राजनीतिक पदानुक्रम तय किया है।
  • भाभा का रणनीतिक तर्क: 1955 के जिनेवा सम्मेलन में, जो परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर आयोजित हुआ था, होमी जे. भाभा ने तर्क दिया कि विकासशील देशों को विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु तकनीक तक पहुँच प्राप्त करनी चाहिए, न कि केवल निष्क्रिय उपभोक्ता बने रहना चाहिए।
  • शक्ति, प्रभाव से पहले आती है: भाभा ने यह स्वीकार किया कि नियम बनाने की शक्ति आंतरिक क्षमता से उत्पन्न होती है। स्वदेशी शक्ति के बिना कोई राष्ट्र वैश्विक शासन ढाँचे को सार्थक रूप से आकार नहीं दे सकता।

“ब्रिज बिल्डर” दृष्टिकोण: क्षमता हेतु साझेदारी

  • बाह्य सहयोग: भाभा ने भारत की प्रारंभिक परमाणु अवसंरचना स्थापित करने के लिए अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा के वैज्ञानिकों के साथ साझेदारी का लाभ उठाया, जिससे रणनीतिक उदारता का प्रदर्शन हुआ।
  • आधुनिक तकनीकी एकीकरण: आज भारत का AI पारिस्थितिकी तंत्र सिलिकॉन वैली जैसे वैश्विक नवाचार केंद्रों के साथ गहराई से जुड़ा है, साथ ही बेंगलुरु और हैदराबाद में प्रमुख अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्रों के साथ भी।
  • साझेदारी-आधारित आंतरिक विकास: सुपरकंप्यूटर, उन्नत चिप्स और मूलभूत मॉडल जैसी महत्वपूर्ण AI परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए संतुलित वैश्विक साझेदारियों के साथ-साथ घरेलू क्षमता निर्माण आवश्यक है।

“लॉस्ट डिकेड्स” चेतावनी

  • 1960 के बाद की मंदी: जवाहरलाल नेहरू और होमी जे. भाभा के निधन के बाद भारत की परमाणु प्रगति धीमी पड़ गई, जिससे रणनीतिक अलगाव बढ़ा।
  • प्रतिस्पर्धियों की तेज प्रगति: चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देश, जिन्होंने बाद में शुरुआत की, तेजी से आगे बढ़े और उन्नत परमाणु तकनीक के निर्यातक बन गए।
  • AI में पुनरावृत्ति का जोखिम: नीतिगत अनिश्चय/हिचकिचाहट से वियतनाम और इंडोनेशिया जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएँ डिजिटल प्रतिस्पर्धा में भारत से आगे निकल सकती हैं।

आगे की राह

  • ठोस राष्ट्रीय परिसंपत्तियों का निर्माण: सरकार को उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डेटा केंद्र और कुशल मानव संसाधन सहित संप्रभु AI अवसंरचना को प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • नैतिक भाषण से नियम-निर्माण तक: केवल वैचारिक वक्तव्यों से आगे बढ़कर वैश्विक AI मानकों और शासन ढाँचों के निर्माण में सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
  • साझेदारियों में रणनीतिक यथार्थवाद: भारत को अमेरिका और पश्चिमी सहयोगियों के साथ तकनीकी सहयोग को गहरा करना चाहिए, अमेरिका–चीन प्रतिद्वंद्विता का रणनीतिक लाभ उठाते हुए अपनी स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए।
  • पहले क्षमता, फिर नेतृत्व: वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व करने की आकांक्षाएँ तभी विश्वसनीय होंगी जब भारत विश्व-स्तरीय AI प्रणालियाँ विकसित करे, ठीक उसी तरह जैसे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ाया।

निष्कर्ष

भारत की AI रणनीति को वैश्विक सहयोग और राष्ट्रीय शक्ति का संयोजन करना होगा साथ ही उदारता और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, नैतिक दृष्टि को वास्तविक तकनीकी क्षमता से जोड़ना होगा।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत जैसे ‘कैच-अप राज्य’ (विकास की दौड़ में आगे बढ़ने का प्रयास करने वाले देश) के लिए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक ओर विकास का अवसर प्रस्तुत करती है, तो दूसरी ओर यह एक रणनीतिक संवेदनशीलता भी उत्पन्न करती है। टिप्पणी कीजिए।

 (10 अंक, 150 शब्द)

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