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Lokesh Pal
October 05, 2024 05:15
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जेलों में जाति-आधारित भेदभाव पर रोक लगाने वाला सर्वोच्च न्यायालय का हालिया फैसला एक ऐतिहासिक निर्णय है, जो भारतीय दंड व्यवस्था में प्रणालीगत असमानताओं को संबोधित करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 17, 21 और 23 का उल्लंघन करता है, जो मौलिक अधिकारों की गारंटी देते हैं।
जेलों में जाति-आधारित भेदभाव के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला भारतीय दंड व्यवस्था के भीतर न्याय और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जाति-आधारित नियमों को असंवैधानिक घोषित करके और जेल नियमों में संशोधन को अनिवार्य बनाकर, न्यायालय का उद्देश्य सभी कैदियों की गरिमा और अधिकारों को बनाए रखना है, तथा व्यवस्थागत भेदभाव को समाप्त कर समानता सुनिश्चित करना है।
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