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RBI द्वारा डिजिटल घोटाला मुआवजा नियम में बदलाव

Lokesh Pal June 30, 2026 05:30 6 0

संदर्भ:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कुछ डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के पीड़ितों को सीमित मुआवजा देने के लिए एक पायलट प्रयास शुरू किया है। इसके तहत ग्राहक सुरक्षा का विस्तार केवल अनधिकृत लेनदेन से आगे बढ़ाकर निर्दिष्ट सोशल इंजीनियरिंग घोटालों (social engineering scams) को भी शामिल किया गया है।

डिजिटल घोटाला मुआवजा पायलट योजना के बारे में:

  • पायलट फ्रेमवर्क: यह नया फ्रेमवर्क 1 जनवरी, 2027 से प्रभावी होने वाला एक वर्षीय पायलट प्रोजेक्ट है। इसे इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक देयता पर जारी 2017 के RBI सर्कुलर में संशोधन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य उन ग्राहकों को एकमुश्त वित्तीय राहत प्रदान करना है, जो पात्र धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (EBT) में अपना धन खो देते हैं।
  • विस्तारित सुरक्षा: 2017 के फ्रेमवर्क के विपरीत, जिसमें केवल अनधिकृत लेनदेन शामिल थे, इस पायलट योजना में उन निर्दिष्ट घोटालों को भी शामिल किया गया है जहाँ ग्राहकों को भुगतान अधिकृत (authorize) करने के लिए धोखा दिया जाता है, बाध्य या हेरफेर किया जाता है।

धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन (EBT):

  • क्रेडेंशियल चोरी: धोखाधड़ी के तरीकों (जैसे- चोरी हुए ओटीपी) के माध्यम से प्राप्त ग्राहक क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके जालसाजों द्वारा निष्पादित किए गए लेनदेन।
  • जबरदस्ती या दबाव: जबरदस्ती, अत्यधिक दबाव या ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे घोटालों के तहत ग्राहकों द्वारा स्वीकृत किए गए लेनदेन।
  • अनधिकृत लेनदेन: ग्राहक की अनुमति के बिना होने वाले लेनदेन, जिसमें बैंक की लापरवाही या किसी तीसरे पक्ष के सुरक्षा उल्लंघन के परिणामस्वरूप होने वाले लेनदेन शामिल हैं।

पात्रता शर्तें:

  • समय पर रिपोर्टिंग: पीड़ितों को धोखाधड़ी की रिपोर्ट 5 कैलेंडर दिनों के भीतर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) पर करनी होगी।
  • मुआवजा सीमा: यह केवल 50,000 रुपये तक के नुकसान के लिए लागू है।
  • एकमुश्त लाभ: इस मुआवजे का दावा ग्राहक के जीवनकाल में केवल एक ही बार किया जा सकता है।
  • पात्र ग्राहक: यह योजना वर्तमान में केवल व्यक्तिगत ग्राहकों पर लागू होती है।

मुआवजा संरचना:

  • मुआवजा राशि: ग्राहक धोखाधड़ी की राशि के 85% प्रतिपूर्ति के पात्र हैं, जो अधिकतम 25,000 रुपये के अधीन है।
  • अधिकतम सीमा: लगभग 29,412 रुपये से ऊपर और 50,000 रुपये तक के नुकसान के लिए मुआवजा 25,000 रुपये पर सीमित (capped) है।
  • लागत साझाकरण: मुआवजे की राशि को RBI, ग्राहक के बैंक और लाभार्थी बैंक (जिसमें पैसा गया) के बीच साझा किया जाएगा, जिसमें RBI सबसे बड़ा हिस्सा वहन करेगा।

ग्राहक की जिम्मेदारियाँ:

  • धोखाधड़ी अलर्ट: ग्राहकों को सतर्क रहना चाहिए और यूपीआई पिन पुष्टिकरण अलर्ट जैसे धोखाधड़ी सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • अपडेटेड संपर्क विवरण: धोखाधड़ी के अलर्ट प्राप्त करने के लिए बैंक के साथ मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को अपडेट रखना अनिवार्य है।
  • त्वरित रिपोर्टिंग: बैंक को धोखाधड़ी की सूचना देने के बाद होने वाले किसी भी धोखाधड़ी वाले लेनदेन के लिए ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होगी।

2017 के फ्रेमवर्क से प्रमुख बदलाव:

  • व्यापक कवरेज: यह पायलट योजना शुद्ध अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन से आगे बढ़कर धोखे से जुड़े कुछ अधिकृत-लेकिन-धोखाधड़ी वाले लेनदेन तक सुरक्षा का विस्तार करती है।
  • विस्तारित रिपोर्टिंग अवधि: तीसरे पक्ष के उल्लंघन की रिपोर्ट करने की समय-सीमा को 3 कार्य दिवसों से बढ़ाकर 5 कैलेंडर दिन कर दिया गया है।
  • कार्यान्वयन समय-सीमा: प्रभावी होने की तिथि को ड्राफ्ट प्रस्ताव के 1 जुलाई, 2026 से बदलकर 1 जनवरी, 2027 कर दिया गया है।
  • शिकायत निवारण: बैंकों के पास घरेलू शिकायतों को सुलझाने के लिए 45 दिन और अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन के लिए 60 दिन का समय है।

सीमाएँ:

  • नुकसान की ऊपरी सीमा: 50,000 रुपये से अधिक की राशि वाले घोटाले वर्तमान में इस पायलट योजना के दायरे से बाहर हैं।
  • सीमित कवरेज: मुआवजा धोखाधड़ी वाले ईबीटी (EBT) की केवल निर्दिष्ट श्रेणियों तक ही सीमित है, और यह हर प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी को कवर नहीं करता है।
  • एकल दावा प्रतिबंध: भविष्य में होने वाली धोखाधड़ी की घटनाओं के बावजूद, पीड़ित अपने जीवनकाल में केवल एक ही बार मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।
  • लापरवाही खंड: यदि नुकसान ग्राहक की स्वयं की लापरवाही के कारण होता है (जैसे- सुरक्षा चेतावनियों को अनदेखा करना या संपर्क जानकारी अपडेट न करना), तो वे अपात्र हो सकते हैं।

महत्त्व:

  • उपभोक्ता संरक्षण: भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में सुरक्षा के प्रति विश्वास को सुदृढ़ करता है।
  • सोशल इंजीनियरिंग की पहचान: यह स्वीकार करता है, कि आधुनिक साइबर धोखाधड़ी तकनीकी हैकिंग की बजाय मनोवैज्ञानिक हेरफेर पर अधिक निर्भर करती है।
  • वित्तीय समावेशन: डिजिटल वित्तीय सेवाओं के नए और संवेदनशील उपयोगकर्ताओं के मध्य  विश्वास को बढ़ाता है।
  • संतुलित देयता: जिम्मेदारी को ग्राहकों, बैंकों और RBI के बीच साझा करता है, जो धोखाधड़ी की रोकथाम के मजबूत तंत्र को प्रोत्साहित करता है।

चुनौतियाँ:

  • सीमित वित्तीय कवरेज: बड़ा वित्तीय नुकसान झेलने वाले पीड़ितों के लिए मुआवजे की अधिकतम सीमा (25,000 रुपये) अपर्याप्त हो सकती है।
  • आजीवन प्रतिबंध: एकमुश्त मुआवजे की सीमा परिष्कृत घोटालों के बार-बार शिकार होने वाले लोगों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं कर सकती है।
  • जागरूकता का अभाव: कई ग्राहक अभी भी सख्त रिपोर्टिंग समय-सीमा और पात्रता शर्तों से अनजान रह सकते हैं।
  • परिचालन जटिलता: प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा RBI के बीच निर्बाध समन्वय की आवश्यकता होती है।

आगे की राह:

  • कवरेज का विस्तार: पायलट योजना के प्रदर्शन के आधार पर धीरे-धीरे उच्च मूल्य वाले घोटालों तक सुरक्षा का विस्तार करना।
  • सार्वजनिक जागरूकता : साइबर स्वच्छता (cyber hygiene), धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं और डिजिटल भुगतान सुरक्षा पर अभियानों को तीव्र करना।
  • धोखाधड़ी का पता लगाने में सुधार: एआई (AI) आधारित धोखाधड़ी निगरानी, वास्तविक समय के लेनदेन विश्लेषण तथा मजबूत प्रमाणीकरण प्रणालियों को बढ़ावा देना।
  • संवेदनशील उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा: वरिष्ठ नागरिकों, पहली बार डिजिटल उपयोग करने वालों और अन्य कमजोर ग्राहक समूहों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय प्रस्तुत करना।
  • आवधिक समीक्षा: धोखाधड़ी के रुझान, ग्राहकों की प्रतिक्रिया और कार्यान्वयन परिणामों के आधार पर नियमित रूप से पायलट योजना का मूल्यांकन तथा संशोधन करना।

निष्कर्ष

RBI का डिजिटल घोटाला मुआवजा पायलट प्रोजेक्ट सोशल इंजीनियरिंग घोटालों को मान्यता देकर, समय पर रिपोर्टिंग को बढ़ावा और ग्राहकों, बैंकों तथा RBI की जिम्मेदारियों को संतुलित करते हुए, भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. साइबर खतरों का ‘प्रणालीगत कमजोरियों’ से ‘मानवीय कमजोरियों’ में परिवर्तित होना, डिजिटल धोखाधड़ी में एक नए चरण को दर्शाता है। धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर RBI के हालिया दिशानिर्देशों के आलोक में, संवेदनशील ग्राहकों की सुरक्षा के संबंध में विनियामक फ्रेमवर्क की पर्याप्तता का विश्लेषण कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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