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लोकतंत्र बनाम हेरफेर

Lokesh Pal March 04, 2026 05:00 18 0

संदर्भ

वर्ष 2023 में असम में हुए परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया की आलोचना गेरीमैंडरिंग (Gerrymandering) जैसी नीतियों के समान होने के लिए की गई।

परिसीमन के बारे में

  • परिभाषा: परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनः निर्धारित किया जाता है।
  • उद्देश्य:  चूँकि समय के साथ विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या की वृद्धि अलग-अलग होती है, इसलिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को समय-समय पर पुनः निर्धारित करना आवश्यक होता है, ताकि ऐसा न हो कि एक प्रतिनिधि बहुत अधिक लोगों की सेवा करे जबकि दूसरे की जिम्मेदारी कम लोगों तक सीमित हो।
  • मूल विचार: इसका लक्ष्य “एक वोट, एक मूल्य” (One Vote, One Value) के सिद्धांत को बनाए रखना है, ताकि प्रतिनिधित्व संतुलित रहे।
  • कानूनी ढाँचा: अनुच्छेद 82 के तहत, प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन किया जाना चाहिए।

गेरीमैंडरिंग: हेरफेर का उपकरण

  • अर्थ: गेरीमैंडरिंग  उस प्रक्रिया को कहा जाता है जिसमें किसी विशेष पार्टी या समूह के लिए राजनीतिक लाभ सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं में हेरफेर किया जाता है।
  • उत्पत्ति: यह शब्द ‘एलब्रिज गेरी मैसाचुसेट्स’ प्रशासन के नाम से ग्रहण किया गया है, जिसके प्रशासन ने वर्ष 1812 में नए राज्य सीनेटरियल ज़िलों को परिभाषित करते हुए एक कानून का निर्माण किया था।
  • हेरफेर की प्रकृति: यह सामान्यतः तटस्थ प्रक्रिया होने वाले निर्वाचन क्षेत्र सीमांकन को एक राजनीतिक उपकरण में बदल देता है, जिसका उद्देश्य चुनाव परिणामों को प्रभावित करना होता है।
  • लोकतांत्रिक चिंता: गेरीमैंडरिंग मतदाता वितरण को विकृत करके निष्पक्ष प्रतिनिधित्व को कमजोर करता है और चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करता है।

भारत में गेरीमैंडरिंग से बचने के पारंपरिक कारण

  • स्वतंत्र परिसीमन: सीमाओं को विधायकों द्वारा नहीं, बल्कि भारत की परिसीमन आयोग द्वारा तैयार किया जाता है।
  • अर्द्ध-न्यायिक प्रकृति: आमतौर पर इसका नेतृत्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किया जाता है तथा इसमें चुनाव आयोग द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
  • कानूनी ढाँचा: इसका निर्धारण जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन अधिनियम के तहत किया जाता है।

चुनाव परिणामों में हेरफेर के तरीके

  • पैकिंग (Packing): विपक्षी मतदाताओं को एक ही निर्वाचन क्षेत्र में केंद्रित कर देना, ताकि वे उस एक सीट को बहुत बड़े अंतर से जीत जाएँ, लेकिन आसपास की सभी सीटों पर उनका प्रभाव कम हो जाए।
  • क्रैकिंग (Cracking): किसी मजबूत विपक्षी मतदाता आधार को चार या पाँच अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में बाँट देना, ताकि उनमें से किसी भी क्षेत्र में उनके पास जीतने के लिए पर्याप्त संख्या न बचे तथा वे किसी भी सीट पर जीत न सकें।
  • स्टैकिंग (Stacking): सत्तारूढ़ दल के समर्थकों के छोटे-छोटे समूहों को एक ही निर्वाचन क्षेत्र में जोड़ देना, ताकि वह सीट उनके लिए “जीतने योग्य” बन जाए और अन्य क्षेत्रों में उनकी ताकत भी कम न हो।
  • पैडिंग (Padding): शासन दल के मजबूत क्षेत्रों में कुल सीटों की संख्या को बढ़ाना।
  • ट्रिमिंग (Trimming): उन क्षेत्रों में सीटों की संख्या कम कर देना जहाँ विपक्ष का प्रभुत्व होता है।
  • सीमा परिवर्तन (Boundary Reversal): परिसीमन आयोग के कार्य शुरू करने से पहले जिलों की सीमाओं में बदलाव कर देना, ताकि आधारभूत आँकड़ों को बदला जा सके।
  • रणनीतिक आरक्षण (Strategic Reservation): जानबूझकर उन सीटों को SC/ST उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर देना जहाँ आमतौर पर कोई विशेष समुदाय (जैसे मुसलमान) जीतता है, ताकि वह मूल समूह वहाँ से चुनाव न लड़ सके।

अनुचित परिसीमन के परिणाम

  • संघवाद के लिए खतरा:  इससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच अविश्वास उत्पन्न होता है, क्योंकि जिन राज्यों ने अपनी जनसंख्या को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है, उन्हें सीटें खोकर दंडित किए जाने जैसा महसूस होता है।
  • निर्वाचन निष्पक्षता की हानि: “एक मत, एक मूल्य” की मूलभूत अवधारणा से समझौता हो सकता है।
  • सामाजिक ध्रुवीकरण: धार्मिक या जातीय आधार पर सीमाओं का पुनर्निर्धारण सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देता है।
  • संस्थागत कमजोरियां: यह परिसीमन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास कम करता है।

निष्कर्ष

लोकतंत्र केवल बहुमत का शासन नहीं है। इसे एक समान अवसर का क्षेत्र, प्रतिस्पर्धा में निष्पक्षता और सभी राजनीतिक प्रतिभागियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि चुनावी परिणाम वास्तव में जनता की इच्छा को प्रतिबिंबित करें, न कि नियमों या संस्थानों की हेरफेरी को।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: “परिसीमन (Delimitation) का उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, लेकिन इसे राजनीतिक हेरफेर (Political Manipulation) के उपकरण के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।” भारत में गेरीमैंडरिंग (Gerrymandering) से संबंधित बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

(10 अंक, 150 शब्द)

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