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Lokesh Pal
January 09, 2026 05:00
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पर्यावरण शासन में विनियामक विफलताओं ने सर्वोच्च न्यायालय को परमादेश जारी रखने के लिए बाध्य कर दिया है, जिससे न्यायिक निरीक्षण का विस्तार अर्द्ध-प्रबंधकीय निर्देशों तक हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप विनियामक अनिश्चितता तथा संस्थागत अस्थिरता उत्पन्न हुई है।
| केस स्टडी | विवरण |
| केस स्टडी 1- पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) |
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| केस स्टडी 2 – दिल्ली-NCR में डीजल वाहन |
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| केस स्टडी 3 – पटाखों पर प्रतिबंध |
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एक संयमित और प्रक्रिया-केंद्रित न्यायपालिका विनियामक जवाबदेही को लागू करके, नीतिगत स्थिरता तथा उचित कानूनी चैनलों के माध्यम से पर्यावरणीय हानि को चुनौती देने के नागरिकों के अधिकार की रक्षा करके, पर्यावरण संरक्षण को मजबूत कर सकती है।
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