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Lokesh Pal
March 17, 2026 05:00
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आयात पर निर्भरता, सब्सिडी का बढ़ता बोझ और मृदा का क्षरण भारत को जैव उर्वरकों और एक सतत जैव-पथ (बायो-पाथवे) की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
जैव उर्वरक तत्काल रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण विकल्प नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ चलेंगे।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट ने भारत के उर्वरक क्षेत्र की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया है। भारत की कृषि सुरक्षा के संदर्भ में इसके कारणों और प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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