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Lokesh Pal
March 25, 2026 05:00
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हाल ही में केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति ने घोषणा की कि मंदिर में प्रवेश के लिए गैर-हिंदुओं को एक शपथपत्र देना होगा, जिसमें वे सनातन धर्म में अपनी आस्था व्यक्त करें।
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आदि शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत गैर-द्वैतवाद का प्रतिपादन करता है, जिसमें कहा गया है कि केवल ब्रह्म (परम सत्य) ही वास्तविक है, जबकि यह संसार माया (भ्रम) द्वारा निर्मित एक अभिव्यक्ति है, और व्यक्तिगत आत्मा (आत्मा) ब्रह्म के समान ही है। |
आस्था और आध्यात्मिकता अत्यंत व्यक्तिगत विषय हैं, जिन्हें शपथपत्र जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्नप्रश्न: भारतीय संदर्भ में धर्मनिरपेक्षता पर होने वाली बहसें पश्चिमी देशों की बहसों से किस प्रकार भिन्न हैं? (10 अंक, 150 शब्द) |
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