100% तक छात्रवृत्ति जीतें

रजिस्टर करें

भारत की वृद्धि का वित्तपोषण: 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर यात्रा

Lokesh Pal January 15, 2026 05:00 90 0

संदर्भ:

भारत का लक्ष्य 2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, लेकिन मुख्य चुनौती यह नहीं है कि कितना पूंजी जुटाई जा सकती है, बल्कि यह है कि वृद्धि का वित्तपोषण सतत, स्थिर और कुशल तरीके से कैसे किया जाए।

  • वर्तमान में अल्पकालिक पूंजी पर निर्भरता और कमज़ोर परियोजना निष्पादन जोखिम उत्पन्न करते हैं और सतत विकास को सीमित करते हैं।

वित्तीय प्रणाली को सुधारने की रणनीतिक प्राथमिकताएँ

  • दीर्घकालिक घरेलू बचत का पुनर्निर्माण
    • घरेलू बचत का महत्व: सरकारी बैलेंस शीट अनिश्चित काल तक नहीं बढ़ सकतीं और विदेशी पूंजी स्वभावतः अस्थिर होती है; इसलिए दीर्घकालिक वित्तपोषण का सबसे भरोसेमंद स्रोत घरेलू बचत है।
    • भारत में बचत की वास्तविकता: घरेलू बचत अर्थव्यवस्था में वित्तीय संसाधनों का सबसे बड़ा स्रोत हैं; अतः यहाँ कोई भी संरचनात्मक कमजोरी सीधे निवेश क्षमता को सीमित करती है।
    • आँकड़े: शुद्ध घरेलू वित्तीय बचत घटकर GDP के 3% पर आ गई है, जो धैर्यशील पूंजी (दीर्घकालिक, जोखिम-सहनशील निवेश) की उपलब्धता में कमी को दर्शाती है।
    • ‘खराब’ वित्तीयकरण की समस्या: बचत घटने के बावजूद घरेलू ऋण 40% से अधिक हो गया है अर्थात वित्तीय स्थिरता बचत के बजाय उधारी से आ रही है।
    • उधार धन का उपयोग: उधारी का बड़ा हिस्सा उपभोग (जैसे फोन, यात्रा) में जाता है, न कि परिसंपत्ति निर्माण में; इससे भविष्य की आय या पूंजी निर्माण मजबूत नहीं होता।
    • वर्तमान निवेश रुझान: घरेलू धन तेजी से बाज़ार-आधारित म्यूचुअल फंड और इक्विटी में जा रहा है।
    • लुप्त कड़ी: पेंशन और बीमा के माध्यम से स्थिर, दीर्घकालिक बचत का पर्याप्त संकलन कम है, जबकि यही अर्थव्यवस्था में दीर्घ-गर्भावधि निवेशों के लिए आवश्यक है।
  • बैंकों से बाज़ारों की ओर संक्रमण
    • बैंकों की स्थिति: भारतीय बैंक फिलहाल मज़बूत हैं (कम NPA), लेकिन दीर्घकालिक निवेश समर्थन में संरचनात्मक सीमाएँ हैं।
    • एसेट–लायबिलिटी मिसमैच (ALM): बैंक मुख्य रूप से 1–3 वर्ष की अल्पकालिक जमाओं पर निर्भर होते हैं, जबकि अवसंरचना जैसे क्षेत्रों को 20–25 वर्ष की दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता होती है, जिससे स्थायी परिपक्वता असंतुलन उत्पन्न होता है।
    • बैंकों की भूमिका: बैंक कार्यशील पूंजी, खुदरा ऋण तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के वित्तपोषण के लिए सबसे उपयुक्त हैं, न कि दीर्घ-गर्भावधि अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए।
    • बॉन्ड बाज़ार की आवश्यकता: दीर्घकालिक वित्तपोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए कॉरपोरेट बॉन्डों के माध्यम से बाज़ार-आधारित वित्तपोषण की ओर स्थानांतरण आवश्यक है।
    • बॉन्ड बाज़ार की समस्याएँ: भारत का बॉन्ड बाज़ार उथला है (GDP की तुलना में आकार छोटा), अत्यधिक संकेंद्रित है (मुख्यतः AAA-रेटेड कंपनियों तक सीमित), और अल्प-तरल है (द्वितीयक बाज़ार में कम लेन-देन), जिसके कारण वित्तपोषण के साधन के रूप में इसकी प्रभावशीलता सीमित रहती है।
    • समाधान: दीर्घकालिक और स्थिर निवेशकों, जैसे कि बीमा कोष और पेंशन कोष, को बॉन्ड में निवेश करके लंबी अवधि वाली परियोजनाओं के लिए अनुकूल धैर्यशील पूंजी प्रदान करने में बड़ा भूमिका निभानी चाहिए।
  • पूंजी दक्षता (ICOR) में सुधार
    • ICOR के बारे में: ICOR का पूरा नाम इंक्रीमेंटल कैपिटल आउटपुट रेशियो (Incremental Capital Output Ratio) है, जो यह मापता है कि एक अतिरिक्त इकाई GDP उत्पन्न करने के लिए कितनी अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता है
    • भारत का ICOR स्तर: भारत का ICOR 4 से 5.5 के बीच है, जिसे अंतरराष्ट्रीय और ऐतिहासिक मानकों के अनुसार उच्च माना जाता है।
    • उच्च ICOR का अर्थ: उच्च ICOR यह दर्शाता है कि भारत विकास प्राप्त करने के लिए बहुत अधिक पूंजी खर्च कर रहा है, और यह निवेश को उत्पादन में परिवर्तित करने में अप्रभावशीलता को दर्शाता है।
    • दक्षता कैसे सुधारें: पूंजी की दक्षता में सबसे बड़े लाभ केवल निवेश की मात्रा बढ़ाने के बजाय परियोजनाओं के बेहतर निष्पादन में निहित हैं।
    • हटाए जाने वाले बाधक: प्रमुख अवरोधों में धीमी अनुमोदन प्रक्रिया, अस्पष्ट अनुबंध, अप्रत्याशित नियम, और धीमी न्यायालयीन विवाद निवारण प्रक्रिया शामिल हैं, जो सभी परियोजनाओं में देरी और लागत बढ़ाते हैं।
    • यदि समाधान न किया गया तो प्रभाव: यदि ये बाधाएँ बनी रहती हैं, तो अधिक निवेश के बावजूद लाभ कम होंगे, और पूंजी खर्च बढ़ने के बावजूद विकास सीमित रहेगा।
  • स्टार्ट-अप्स और डीप-टेक का उपयोग
    • स्टार्टअप केवल उपभोक्ता ऐप्स तक सीमित नहीं हैं: स्टार्टअप्स को केवल खाद्य वितरण जैसी सेवाओं के प्लेटफॉर्म के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें संपूर्ण अर्थव्यवस्था में तकनीकी और उत्पादकता परिवर्तन के प्रेरक के रूप में देखा जाना चाहिए।
    • स्टार्टअप्स विकास को कैसे बढ़ावा देते हैं: तकनीक-संचालित कंपनियाँ कम पूंजी से अधिक उत्पादन करके पूंजी–उत्पादन वक्र को मोड़ सकती हैं, जिससे पूंजी की दक्षता में सुधार होता है।
    • उत्पादकता पर प्रभाव: नवाचार और डिजिटल प्रक्रियाओं का उपयोग करके, तकनीकी कंपनियाँ कुल उत्पादकता बढ़ाती हैं, जिससे निवेश में अनुपातिक वृद्धि किए बिना तेज़ विकास संभव होता है।
    • प्रभाव के लिए प्रमुख क्षेत्र: स्टार्टअप्स और डीप-टेक उद्यम लॉजिस्टिक्स, निर्माण, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जहाँ दक्षता में सुधार से लागत में उल्लेखनीय कमी और सेवा वितरण में सुधार संभव हो सकता है।

निष्कर्ष

भारत का 2047 तक $10 ट्रिलियन का लक्ष्य तब हासिल किया जा सकता है, जब विकास की दिशा मात्रा से गुणवत्ता की ओर बढ़े, जिसके लिए आवश्यक हैं: उच्च घरेलू बचत, बाजार-आधारित दीर्घकालिक वित्तपोषण, कुशल परियोजना निष्पादन (कम ICOR), और स्टार्टअप-नेतृत्व वाली नवाचार गतिविधियाँ।

  • ये चार स्तंभ आपस में परस्पर सुदृढ़ हैं और मिलकर 2047 तक एक सतत विकास की राह को परिभाषित करते हैं।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: भारत ने आगामी दशक में 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक प्रमुख संरचनात्मक सुधारों एवं विकास के प्रमुख प्रेरक तत्वों की चर्चा कीजिए। साथ ही, इस दिशा में आने वाली आर्थिक, सामाजिक तथा संस्थागत चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने हेतु उपयुक्त रणनीतियाँ सुझाइए।

(10 अंक, 150 शब्द)

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

THE MOST
LEARNING PLATFORM

Learn From India's Best Faculty

      

Final Result – CIVIL SERVICES EXAMINATION, 2023. PWOnlyIAS is NOW at three new locations Mukherjee Nagar ,Lucknow and Patna , Explore all centers Download UPSC Mains 2023 Question Papers PDF Free Initiative links -1) Download Prahaar 3.0 for Mains Current Affairs PDF both in English and Hindi 2) Daily Main Answer Writing , 3) Daily Current Affairs , Editorial Analysis and quiz , 4) PDF Downloads UPSC Prelims 2023 Trend Analysis cut-off and answer key

<div class="new-fform">







    </div>

    Subscribe our Newsletter
    Sign up now for our exclusive newsletter and be the first to know about our latest Initiatives, Quality Content, and much more.
    *Promise! We won't spam you.
    Yes! I want to Subscribe.