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गिग वर्कर्स की हड़ताल और प्लेटफ़ॉर्म पूँजीवाद

Lokesh Pal January 01, 2026 05:15 64 0

सन्दर्भ:

2025 का अंत डिलीवरी कर्मचारियों (गिग वर्कर्स) की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने उचित वेतन, पारदर्शी भुगतान प्रणाली और “10 मिनट की डिलीवरी” मॉडल पर प्रतिबंध लगाने की माँग की।

गिग वर्कर्स की हड़ताल

  • भागीदारी का पैमाना: पिछली हड़ताल में 40,000 से अधिक गिग वर्कर्स ने भाग लिया था, जिससे डिलीवरी सेक्टर के 50-60% कारोबार प्रभावित हुए थे।
  • उद्देश्य: इस हड़ताल का उद्देश्य ‘प्लेटफ़ॉर्म पूँजीपतियों’ को शोषणकारी व्यावसायिक प्रथाओं पर पुनर्विचार करने के लिए एक कठोर संदेश देना था।
    • नए वर्ष की पूर्व संध्या को रणनीतिक रूप से चुना गया था, हालाँकि यह श्रमिकों के लिए आय का मुख्य समय होता है।
  • डिजिटल समन्वय: व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने श्रमिकों को हड़ताल जारी रखने में मदद की।
  • जनता का बढ़ता समर्थन: ग्राहकों ने ऑनलाइन समर्थन संदेश पोस्ट करके एकजुटता व्यक्त की।

गिग वर्कर्स

  • परिभाषा: एक ऐसा श्रम बाजार, जिसमें स्थायी नौकरियों की बजाय अल्पकालिक अनुबंध या फ्रीलांस पर कार्य प्राप्त होता है।
    • नीति आयोग के आँकड़ों के अनुसार, भारत में गिग वर्कफोर्स की संख्या 2029-30 तक बढ़कर 2.35 करोड़ होने की उम्मीद है।
  • बदलाव: ग्राहक ’सुविधा’ के कारण स्थानीय विक्रेताओं से हटकर ऐप्स की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं।

प्लेटफ़ॉर्म पूँजीवाद

  • स्वामित्व की प्रकृति: आधुनिक पूँजीपति भौतिक संपत्तियों की बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म (मध्यस्थ) के मालिक होते हैं, और उपभोक्ताओं तथा प्रदाताओं दोनों से उच्च कमीशन वसूलते हैं।
  • नियंत्रण: प्लेटफ़ॉर्म कंपनियाँ प्रत्यक्ष रोजगार की बजाय डिजिटल मध्यस्थता के माध्यम से श्रम को नियंत्रित करती हैं।
  • ऐप-आधारित प्रणालियाँ: श्रमिकों की आजीविका उन प्रणालियों से जुड़ी होती है, जो कार्य और आय तक उनकी पहुँच निर्धारित करती हैं।

‘द ट्रैप’ – 10 मिनट में डिलीवरी

  • एल्गोरिदम आधारित श्रम प्रबंधन: प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए एल्गोरिदम नियंत्रण और ग्राहक रेटिंग प्रणाली का उपयोग करते हैं। 10 या 12 मिनट की डिलीवरी जैसे लक्ष्य अत्यधिक प्रदर्शन दबाव उत्पन्न करते हैं।
  • दंडात्मक प्रवर्तन तंत्र: समय-सीमा का पालन न करने पर श्रमिकों की प्लेटफ़ॉर्म आईडी को ब्लॉक करने सहित दंड का प्रावधान है।
    • अवरोध लगाने से श्रमिकों को रोजगार के अवसरों तक पहुँचने से पूरी तरह से वंचित कर दिया जाता है।
  • वेतन संरचना और बढ़ा हुआ जोखिम: श्रमिकों को प्रति घंटा या दैनिक आधार पर भुगतान करने की बजाय प्रति ऑर्डर (अस्थिरता) के आधार पर भुगतान किया जाता है।
    • इसलिए, गति सीधे तौर पर आय और नौकरी की स्थिरता को निर्धारित करती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं, चोटों, तनाव और मानसिक थकावट का खतरा बढ़ जाता है।

डिलीवरी पार्टनर ट्रैप

  • रोजगार वर्गीकरण: डिलीवरी कर्मचारियों को कर्मचारी की बजाय “डिलीवरी पार्टनर” के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यह वर्गीकरण उन्हें मूलभूत श्रम सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित करता है।
  • कार्य और आय की स्थितियाँ: डिलीवरी वर्कर स्व-रोजगार और स्व-शोषण का शिकार होते हैं।
    • उन्हें लंबे समय तक कम वेतन पर कार्य करना पड़ता है। 
    • ईंधन की लागत और वाहन की EMI से आय में और कमी आती है।
  • कमजोर सामूहिक सौदेबाजी: बिखरे हुए कार्यस्थल और अस्थिर कार्यबल श्रमिकों की एकजुटता को कमजोर करते हैं। ये स्थितियाँ प्रभावी सामूहिक सौदेबाजी और संघ निर्माण में बाधा डालती हैं।
  • गिग इकॉनमी स्ट्राइक्स में चुनौती: गिग वर्कर्स सड़कों और क्षेत्रों में बिखरे हुए हैं, जिससे सामूहिक कार्रवाई तथा एकता कठिन हो जाती है।

आगे की राह:

  • विनियामक ढाँचे को मजबूत करना: डिजिटल प्लेटफॉर्मों द्वारा गिग वर्कर्स पर किए जाने वाले एल्गोरिदम संबंधी दबाव को रोकने के लिए कानूनों को लागू करने तथा उन्हें प्रभावी ढंग से पालन करवाने की आवश्यकता है।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 का कार्यान्वयन: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को तेजी से लागू किया जाना चाहिए, ताकि गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्राप्त हो सके।
  • राजस्थान मॉडल का प्रतिरूपण (2023): राजस्थान प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स अधिनियम-2023, एक कल्याण बोर्ड और एक कल्याण कोष की स्थापना करके एक मॉडल प्रदान करता है। कल्याण कोष का वित्तपोषण प्लेटफॉर्म लेनदेन पर उपकर के माध्यम से किया जाता है
  • उचित वेतन सुनिश्चित करना: केवल प्रति वस्तु के आधार पर भुगतान प्रणाली से हटकर एक नई प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है।गिग वर्कर्स की आय में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

2025 की गिग वर्कर्स हड़ताल ने प्लेटफॉर्म आधारित कार्यों में अनिश्चितता, एल्गोरिदम नियंत्रण और शोषणकारी वेतन को उजागर किया। बढ़ते कार्यबल और जोखिमों के लिए विनियामक सुधार, सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन तथा राजस्थान राज्य के 2023 अधिनियम जैसे अनुकरणीय कल्याणकारी मॉडलों की आवश्यकता है

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: गिग-आधारित अर्थव्यवस्था में व्याप्त संकट को दर्शाते हुए प्लेटफॉर्म श्रमिकों द्वारा नव वर्ष की पूर्व संध्या पर की गई हड़ताल के संदर्भ में, भारत में प्लेटफॉर्म श्रमिकों द्वारा सामना की जा रही प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा कीजिए, तथा उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक विनियामक उपायों का सुझाव दीजिए।

(10 अंक, 150 शब्द)

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