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Lokesh Pal
January 31, 2026 05:30
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भारत COP30 के लिए अपने राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) को संशोधित कर रहा है, जिससे इस्पात क्षेत्र अर्थव्यवस्था-संबंधी डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।
इस्पात का डीकार्बोनाइजेशन भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और जलवायु लचीलापन के लिए रणनीतिक रूप से अनिवार्य है। निर्णायक कॉर्पोरेट कार्रवाई को मजबूत कार्बन-प्राइसिंग तंत्र और सार्वजनिक खरीद प्रावधानों के साथ समन्वित करके, भारत ग्लोबल साउथ का नेतृत्व कर सकता है और कार्बनयुक्त विकास से हरित औद्योगिक शक्ति बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: भारतीय इस्पात क्षेत्र क्षमता विस्तार और जलवायु प्रतिबद्धताओं के बीच एक चौराहे पर खड़ा है। इस संदर्भ में ‘कार्बन लॉक-इन’ (Carbon Lock-in) की अवधारणा पर चर्चा कीजिए। साथ ही, यह बताइए कि ‘ग्रीन स्टील’ की ओर संक्रमण भारत को कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म(CBAM) जैसे वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए अपने डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में कैसे मदद कर सकता है। (15 अंक, 250 शब्द) |
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