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Lokesh Pal
November 18, 2024 05:30
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हाल ही में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने इस बात पर बल दिया कि सहकारी संघवाद, जो भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है, के लिए राज्यों को संघ की नीतियों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता नहीं है | उन्होंने इस सिद्धांत को पुष्ट करने के लिए वर्ष 1977 के सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला दिया।
सहकारी संघवाद उन स्थितियों में कार्य करता है, जहाँ सभी संबंधित पक्षों को लाभ मिलता है तथा केंद्र और राज्य लोगों के कल्याण के लिए कार्य करते हैं।
भारतीय संघवाद का भविष्य “सहकारी संघवाद” से आगे बढ़कर सहयोग और प्रतिस्पर्द्धा दोनों को शामिल करना होना चाहिए। इस गतिशील मॉडल को अपनाने से भारत को विविध और विकसित होते राजनीतिक परिदृश्य में शासन की जटिल चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी और एक बेहतर भारतीय संघवाद विकसित हो सकेगा ।
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