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भारत की शिक्षा प्रणाली तथा नो डिटेन्शन पॉलिसी

Lokesh Pal March 21, 2025 05:00 37 0

संदर्भ:

वित्त मंत्री के विकसित भारत के लिए “100% अच्छी गुणवत्ता वाली स्कूली शिक्षा” के दृष्टिकोण के बावजूद, नवीनतम बजट में शिक्षा व्यवस्था के लिए कम धन आवंटित किया गया है, जो व्यवस्थागत कमियों को दूर करने में विफल रहा है।

भारत की शिक्षा प्रणाली संबंधी प्रमुख मुद्दे

  • अपर्याप्त व्यय: शिक्षा पर व्यय सकल घरेलू उत्पाद के 2.9% के साथ अपर्याप्त बना हुआ है, जो कोठारी आयोग द्वारा अनुशंसित 6% से बहुत कम है।
  • प्रणालीगत मुद्दे: प्रणालीगत मुद्दे बने हुए हैं, सरकारें दीर्घकालिक सुधारों की तुलना में त्वरित समाधान को तरजीह दे रही हैं।

नो डिटेंशन पॉलिसी

  • क्या है? : नो-डिटेंशन पॉलिसी (NDP) को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कक्षा-8 तक कोई भी बच्चा फेल या डिटेन न हो।
  • विधिक प्रावधान: RTE अधिनियम की धारा 16 के तहत, यह अनिवार्य किया गया था कि किसी भी विद्यार्थी  को तब तक स्कूल से रोका या निकाला नहीं जाएगा, जब तक कि वह प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा-8) पूरी न कर ले।
  • उद्देश्य: स्वचालित पदोन्नति की अनुमति देकर ड्रॉपआउट दरों (स्कूल छोड़ने की दर) को कम करना, परीक्षाओं के भय को समाप्त करना तथा तनाव मुक्त अधिगम परिदृश्य निर्मित करना।
  • आलोचना: कुछ राज्यों ने तर्क दिया, कि इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों में गंभीरता में कमी आई है। इस नीति को अधिगम स्तर में गिरावट के लिए दोषी ठहराया गया था, हालाँकि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई निर्णायक सबूत नहीं था।

डिटेंशन पॉलिसी को पुनः लागू करने के कारण

  • संशोधन- 2019 : निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने परीक्षा प्रदर्शन के आधार पर कक्षा-5 और कक्षा-8 में डिटेंशन की अनुमति दी।
  • विस्तार: केंद्र सरकार ने बाद में डिटेंशन पॉलिसी को सभी सरकारी स्कूलों में लागू कर दिया, जिससे पदोन्नति के लिए परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन अनिवार्य मानदंड बन गया।
  • अधिगम स्तर में गिरावट: स्पष्ट कारण सहित साक्ष्य की कमी के बावजूद, अधिगम स्तर में गिरावट के लिए NDP को दोषी ठहराया गया।
  • अधिगम परिणाम: राज्यों ने NDP को समाप्त करने को सही ठहराने के लिए ASER-2022 का हवाला दिया। हालाँकि, ASER-2024 में डिटेंशन और बेहतर अधिगम स्तर के बीच कोई स्पष्ट संबंध नहीं दिखाया गया है।
  • बदलता हुआ बोझ: शिक्षण गुणवत्ता और प्रणालीगत अंतराल को संबोधित करने की बजाय विद्यार्थियों और अभिभावकों पर बोझ डाला गया।

डिटेन्शन पॉलिसी का प्रभाव

  • भेदभाव और कलंक: वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को नुकसान पहुँचाता है, जो भेदभाव, कलंक और बहिष्कार के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • उच्च ड्रॉप आउट दर: ड्रॉप आउट दर (स्कूल छोड़ने की दर) को बढ़ाता है, जिससे बच्चे बाल श्रम के प्रति और सामाजिक-आर्थिक रूप से अस्थिरता  हो जाते हैं।
  • प्रतिकूल वातावरण: विद्यार्थियों को प्रतिकूल वातावरण में शिक्षा जारी रखने की दुविधा का सामना करना पड़ता है, परिणामस्वरूप कई विद्यार्थी अपमान से बचने के लिए पढ़ाई छोड़ देते हैं।

आगे की राह

  • सतत और व्यापक मूल्यांकन (CCE): केवल परीक्षाओं से परे नियमित और समग्र मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित करें। प्रगति को सुनिश्चित करने के लिए रचनात्मक और योगात्मक मूल्यांकन शामिल हैं।
  • बेहतर शिक्षक प्रशिक्षण: नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षण पद्धति और शिक्षण विधियों में सुधार करें। शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों तथा विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोणों से युक्त करें।
  • प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहन: शैक्षणिक उत्कृष्टता और निरंतर प्रयास के लिए विद्यार्थियों को पुरस्कृत करें। नवाचार और प्रभावी शिक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षक प्रोत्साहन प्रारंभ करें।
  • योजनाओं की सुदृढ़ता: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच में सुधार करके सुनिश्चित करें, कि बच्चे स्कूल में बने रहें। उपस्थिति और अधिगम स्तर को बढ़ाने के लिए पीएम पोषण (मिड-डे मील योजना) के माध्यम से पोषण संबंधी सहायता प्रदान करें।
    • बेहतर बुनियादी ढाँचे, डिजिटल शिक्षा और समावेशी शिक्षा को शामिल करने के लिए समग्र शिक्षा अभियान का विस्तार करना।
  • संतुलित दृष्टिकोण: बेहतर शिक्षण के लिए नो-डिटेंशन पॉलिसी (NDP) और डिटेंशन का सम्मिश्रण। शैक्षणिक जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए ड्रॉपआउट दर को रोकने के लिए NDP के लचीलेपन को बनाए रखें।
  • शिक्षण मूल्यांकन: शिक्षण मूल्यांकन को बेहतर बनाना, केवल अंतिम परीक्षाओं पर निर्भर रहने की बजाय निरंतर और योग्यता-आधारित मूल्यांकन लागू करें।
  • विफलताओं पर ध्यान देना: खराब प्रदर्शन के लिए विद्यार्थियों को दंडित करने की बजाय शिक्षक प्रशिक्षण और कक्षा शिक्षण में सुधार करें।
  • दीर्घकालिक शिक्षा सुधार: अल्पकालिक नीतिगत परिवर्तनों की बजाय स्थायी सुधारों पर ध्यान केंद्रित करें।

निष्कर्ष

समग्र शैक्षिक विकास के लिए सतत मूल्यांकन पद्धतियाँ, प्रणालीगत सुधार और दीर्घकालिक रणनीतियाँ आवश्यक हैं। इसलिए बेहतर शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उपर्युक्त सुझावों के साथ बेहतर नीतिगत प्रयास वंक्षनीय हैं|

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न 

भारत की शिक्षा प्रणाली में उन प्रणालीगत कमियों का विश्लेषण कीजिए, जिनके कारण विद्यार्थियों को संस्थागत विफलताओं का खामियाजा भुगतना पड़ता है। विद्यार्थियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर ऐसी कमियों के प्रभाव पर चर्चा कीजिए तथा परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रियाओं में निष्पक्षता बढ़ाने के लिए नीतिगत सुधारों का सुझाव दीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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