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भारत का आगामी विकास चरण

Lokesh Pal January 30, 2026 05:00 10 0

संदर्भ:

वर्ष 2025 भारत में सुर्खियों वाली घोषणाओं की बजाय शांत, संचयी सुधारों (रिफॉर्म एक्सप्रेस, 2025) के चरण के रूप में चिह्नित रहा।

समष्टि अर्थशास्त्र – प्रदर्शन और वैश्विक स्थिति

  • आर्थिक आकार और विकास: भारत $4.1 ट्रिलियन की नाममात्र जीडीपी को पार कर गया है, तथा जापान (जो कमजोर येन और घटती व सिकुड़ती आबादी से प्रभावित है) को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।
    • यह वृद्धि भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश पर टिकी है, जो उपभोग और उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।
    • नाममात्र जीडीपी: एक वर्ष में देश के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य, जिसे वर्तमान बाजार कीमतों पर मापा जाता है।
  • सॉवरेन रेटिंग: स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P) ने 18 वर्षों के बाद भारत की सॉवरेन रेटिंग को बढ़ाकर BBB कर दिया है।
    • इस अपग्रेड ने भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों में स्थायित्व तथा अनुकूलन का संकेत दिया।

व्यापार प्रदर्शन और डिजिटल सुविधा:

  • निर्यात वृद्धि: 2024-25 में भारत का कुल निर्यात $825.25 बिलियन तक पहुँच गया, जिसमें 6% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।
  • डिजिटल व्यापार अवसंरचना: ‘ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म’ को निर्यातकों के लिए एकल डिजिटल विंडो के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसे निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और लेनदेन लागत में कमी हेतु डिज़ाइन किया गया है।
  • व्यापार खुफिया और विश्लेषण पोर्टल: व्यापार खुफिया और विश्लेषण (TIA) पोर्टल ने वास्तविक समय में बाजार डेटा प्रदान किया, जिससे निर्यातक सूचित निर्णय लेने तथा वैश्विक माँग के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हुए।

द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार समझौते:

  • भारत-यूके CETA (व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता): इसने भारतीय निर्यातकों के लिए शुल्क मुक्त पहुँच बनाई तथा सेवाओं, व्यापार और कुशल गतिशीलता के लिए स्पष्ट मार्ग भी प्रदान किए।
  • भारत-ओमान CEPA (व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता): इसने वस्तुओं, सेवाओं और निवेश के लिए एक रणनीतिक गलियारे को मजबूत किया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में भारत की आर्थिक भागीदारी बढ़ी।
  • भारत-न्यूजीलैंड FTA (मुक्त व्यापार समझौता): भारत ने न्यूजीलैंड के साथ एक FTA वार्ता संपन्न की, जिससे उच्च-मूल्य वाले बाजारों तक पहुँच बढ़ी तथा अनुशासित व्यापार वार्ताओं के लिए एक टेम्पलेट तैयार हुआ।

स्टार्टअप पारितंत्र और डिजिटल बाजार:

  • स्टार्टअप का पैमाना: भारत का स्टार्टअप पारितंत्र 2 लाख से अधिक सरकारी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स तक विस्तारित हुआ।
    • इन स्टार्टअप्स ने सामूहिक रूप से 21 लाख से अधिक रोजगार सृजित किए।
    • भारत ने वैश्विक नवाचार सूचकांक (GII) में भी अपनी स्थिति में सुधार किया, तथा 139 अर्थव्यवस्थाओं में 38वें स्थान पर पहुँच गया।
  • ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC): ONDC ने 326 मिलियन से अधिक ऑर्डर संसाधित किए, जिसमें औसतन 5.9 लाख दैनिक लेनदेन हुए।
    • इसने डिजिटल वाणिज्य में प्रतिस्पर्धा और समावेशिता को मजबूत किया। ONDC ई-कॉमर्स को लोकतांत्रिक बनाने के लिए भारत सरकार की एक पहल है, जो एक खुला, इंटरऑपरेबल नेटवर्क बनाता है, जहाँ खरीदार और विक्रेता केवल अमेज़न या फ्लिपकार्ट जैसे बड़े मार्केटप्लेस पर ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्लेटफार्मों पर लेनदेन कर सकते हैं।
  • गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM): GeM प्लेटफॉर्म ने संचयी लेनदेन मूल्य में ₹16.41 लाख करोड़ को पार किया।
    • 11 लाख से अधिक सूक्ष्म और लघु उद्यमों को ₹7.35 लाख करोड़ के ऑर्डर मिले।

विधिक प्रावधान:

  • अनुपालन में कमी: विभिन्न क्षेत्रों में 47,000 से अधिक अनुपालन मुद्दों को कम किया गया। इसके अतिरिक्त, 4,458 विधिक प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया।
  • निरसन और संशोधन विधेयक, 2025: 71 पुराने कानूनों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया, जिससे कानूनी अव्यवस्था और अनुपालन बोझ कम हुआ।
  • राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली: नवंबर के अंत तक, प्रणाली ने 8.29 लाख से अधिक अनुमति संसाधित कीं, जिससे पूर्वानुमान में सुधार हुआ और मंजूरी की समय-सीमा कम हुई।
  • जिला स्तरीय व्यापार सुगमता: ‘डिस्ट्रिक्ट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान-2025’ फ्रेमवर्क का उद्देश्य स्थानीय प्रशासन स्तर पर जवाबदेही और प्रतिक्रियाशीलता में सुधार करना था। यह व्यापार सुगमता को उद्यमियों के करीब ले आया।

श्रम बाजार सुधार:

  • श्रम कानूनों का समेकन: चार श्रम संहिताएँ, जो 21 नवंबर, 2025 को लागू हुईं, ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को सरल ढाँचे में समेकित किया।
  • कवरेज क्षेत्र: चार श्रम संहिताएँ इस प्रकार हैं:
    1. मजदूरी संहिता (सार्वभौमिक न्यूनतम मजदूरी)
    2. औद्योगिक संबंध संहिता (विवाद/यूनियन)
    3. सामाजिक सुरक्षा संहिता (पीएफ/पेंशन/बीमा)
    4. व्यावसायिक सुरक्षा संहिता (स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ)

वित्तीय बाजार सुधार:

  • प्रतिभूति बाजार कोड विधेयक: यह विधेयक प्रतिभूति कानून को आधुनिक बनाने और सेबी (SEBI) की जाँच तथा प्रवर्तन क्षमता को मजबूत करने हेतु प्रस्तुत किया गया था, जिसमें विशेष बाजार न्यायालयों, विनियामकों के साथ सुदृढ़ सूचना साझाकरण एवं समयबद्ध शिकायत निवारण प्रस्ताव शामिल थे।

लॉजिस्टिक्स और समुद्री सुधार:

  • शिपिंग पर व्यापार निर्भरता: मात्रा के अनुसार भारत का लगभग 95% और मूल्य के अनुसार 70% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
    • भारत की लॉजिस्टिक लागत जीडीपी का लगभग 13-14%, जबकि वैश्विक मानक जीडीपी का 8% है।
  • भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने औपनिवेशिक युग के ढाँचे को बदल दिया और आधुनिक शासन उपकरण, विवाद समाधान तंत्र और मजबूत सुरक्षा एवं पर्यावरणीय मानदंड पेश किए।
  • मर्चेंट शिपिंग अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने शिपिंग नियमों को आधुनिक बनाया और समकालीन वाणिज्य के साथ देनदारियों और विवाद ढाँचे को संरेखित किया।
  • समुद्र द्वारा माल ढुलाई अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने समुद्री माल परिवहन को नियंत्रित करने वाले विधिक नियमों को अपडेट किया और वाणिज्यिक शिपिंग कार्यों में स्पष्टता बढ़ाई।

जहाज निर्माण और औद्योगिक नीति:

  • जहाज निर्माण सहायता पैकेज: कैबिनेट ने जहाज निर्माण के लिए ₹69,725 करोड़ की मंजूरी दी। इसमें ₹25,000 करोड़ का समुद्री विकास कोष शामिल था।
    • इस पैकेज का उद्देश्य निर्भरता में कमी, घरेलू माल ढुलाई मूल्य को बनाए रखना तथा औद्योगिक सुविधाओं का निर्माण था।

ऊर्जा क्षेत्र सुधार:

  • तेल क्षेत्र (नियामक और विकास) संशोधन अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने तेल क्षेत्र की लीज के दौरान संविदात्मक शर्तों की स्थिरता पर बल दिया, जिससे निवेशक जोखिम और अनिश्चितता में कमी आई।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025: इन नियमों ने परियोजना चरणों में एकल पेट्रोलियम पट्टे की शुरुआत की, तथा स्पष्ट मंजूरी समय-सीमा भी स्थापित की।
  • ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP): OALP ने अन्वेषण मानचित्र का विस्तार जारी रखा, जिसमें राउंड X के तहत लगभग 0.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर में 25 ब्लॉकों की पेशकश की गई, जिसमें मुख्य रूप से अपतटीय, गहरे पानी और अल्ट्रा-डीपवाटर अवसर शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय गहरे जल अन्वेषण मिशन: इस मिशन ने घरेलू संसाधनों, प्रौद्योगिकी और क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया। इसने भारत की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया।

परमाणु ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी:

  • परमाणु ऊर्जा मिशन: 2025 के बजट में परमाणु ऊर्जा विकास के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए, जो 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता तक पहुँचने के राष्ट्रीय उद्देश्य के अनुरूप है।
  • स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs): भारत ने 2033 तक पाँच स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए परिचालन SMRs का लक्ष्य रखा है।
  • SHANTI विधेयक: भारत को बदलने के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत उपयोग और विकास (SHANTI) विधेयक ने नागरिक परमाणु शासन को आधुनिक बनाया। इसने विनियमित निजी भागीदारी के लिए नवीन मार्ग खोले।
    • परमाणु ऊर्जा ग्रिड में निम्न कार्बन युक्त विद्युत शामिल करती है, तथा उन्नत विनिर्माण, डेटा बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा-गहन उद्योग निर्माण की भारत की क्षमता को सुदृढ़ करती है।

निष्कर्ष

रिफॉर्म एक्सप्रेस-2025 ने उन सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्होंने सामूहिक रूप से संघर्ष, अनिश्चितता और उद्यमियों पर भार को कम किया। इसने उत्पादकता विस्तार को सक्षम बनाया तथा विकास के अगले चरण की नींव रखी।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

प्रश्न. “रिफॉर्म एक्सप्रेस-2025 नीतिगत घोषणाओं की बजाय निरंतर संस्थागत सुधार की ओर भारत के परिवर्तन को दर्शाता है।” परीक्षण कीजिए, कि कानून और व्यापार सुगमीकरण में सुधारों ने भारत के निवेश परिदृश्य तथा विकास संभावनाओं को किस प्रकार सुदृढ़ किया है। दीर्घकालिक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए उनके महत्त्व पर चर्चा कीजिए।

(15 अंक, 250 शब्द)

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