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Lokesh Pal
March 05, 2026 05:00
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हाल ही में नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था के बाहर की फसलों की ओर विविधीकरण करने का आग्रह किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि धान और गेहूँ की खेती के लगातार बढ़ते विस्तार को कम करने और अधिक स्थायी फसल प्रणाली को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
अंततः उद्देश्य यह होना चाहिए कि किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे, साथ ही धान और गेहूँ पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकटों का समाधान किया जा सके।
मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:प्रश्न: भारतीय कृषि में “धान–गेहूँ पर अत्यधिक निर्भरता (Paddy-Wheat Fixation)” हरित क्रांति के वरदान से बदलकर एक राजकोषीय और पारिस्थितिकीय बोझ बन गई है। इस फसल प्रणाली के सामाजिक-आर्थिक तथा पर्यावरणीय प्रभावों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और प्रभावी फसल विविधीकरण के लिए नीतिगत उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) |
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