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भारत में ‘मध्यम वर्ग’ की समस्याएँ तथा उनके विकास हेतु आवश्यक नीतियाँ एवं सुधार

Lokesh Pal March 31, 2025 05:30 17 0

संदर्भ:

हाल के दिनों में, सरकार ने मध्यम वर्ग के लिए महत्त्वपूर्ण कर राहत प्रस्तुत की है, कर-मुक्त आय सीमा को ₹7 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख कर दिया है। इसके अलावा, वेतनभोगी व्यक्ति अब ₹75,000 की मानक कटौती के हकदार हैं, जिससे प्रभावी लाभ ₹12.75 लाख तक हो जाता है। यह परिवर्तन मध्यम वर्ग के हाथों में अधिक मुद्रा डालता है, जो व्यय में वृद्धि में तब्दील होता है और बदले में, आर्थिक विकास को गति देता है।

मध्यम वर्ग 

  • मध्यम वर्ग कौन हैं?: मध्यम वर्ग को आमतौर पर उन लोगों के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो आर्थिक रूप से स्थिर होते हैं और जिनमें गरीबी का जोखिम कम होता है।
  • अन्य परिभाषा: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) जैसे संगठन मध्यम वर्ग को उन लोगों के रूप में परिभाषित करते हैं, जो प्रति दिन $10 से $100 (लगभग ₹830 से ₹8,300 तक) कमाते हैं। 
    • भारत में, पीपुल रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी (PRICE) के आँकड़ों के अनुसार, मध्यम वर्ग को ₹5 लाख से ₹30 लाख वार्षिक (2020-21 की कीमतें) तक की घरेलू आय वाला माना जाता है। 
  • विशेषताएँ: इस समूह के पास अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान देने के लिए पर्याप्त वित्तीय स्थिरता और प्रयोज्य आय है।
  • मध्यम वर्गीय वर्ग
    • निम्न मध्यम वर्ग: यह समूह अपनी आय का अधिकांश हिस्सा स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, वाहन और घरेलू उपकरणों जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर व्यय करता है।
    • उच्च मध्यम वर्ग: बुनियादी व्यय के अलावा, यह वर्ग विलासिता की वस्तुएँ, अवकाश, उच्च स्तरीय गैजेट और एयर कंडीशनर जैसे उपकरण खरीद सकता है।

भारत के मध्यम वर्ग का विकास

  • स्वतंत्रता-पूर्व: मध्यम वर्ग एक छोटा, कुलीन समूह था, जिसमें अधिकांशतः अंग्रेजी बोलने वाले, शिक्षित उच्च जाति के व्यक्ति शामिल थे।
  • 1990 के दशक के बाद का उदारीकरण: 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी) ने भारत के मध्यम वर्ग का व्यापक विस्तार किया। आईटी और सेवा क्षेत्रों के विकास ने रोज़गार सृजन किया तथा शहरी मध्यम वर्ग को विकसित होने में सक्षम बनाया।
  • 2021 और उसके बाद: 2021 तक भारत की 31% आबादी मध्यम वर्ग की होगी। PRICE (पीपुल रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकोनॉमी) के आँकड़ों के अनुसार 2031 तक यह संख्या बढ़कर 38% तथा 2047 तक मध्यम वर्ग की आबादी 60% हो जाने की उम्मीद है।

बढ़ते मध्यम वर्ग का आर्थिक प्रभाव

  • बढ़ता उपभोग और आर्थिक विकास: अनुमान है कि 2030-31 तक मध्यम और धनी वर्गों द्वारा उपभोग में $2.7 ट्रिलियन की अतिरिक्त वृद्धि होगी। 
    • लाभ: उपभोग में यह वृद्धि विभिन्न उद्योगों में उत्पादन को बढ़ावा देगी, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए कंपनियाँ अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करेंगी, जिससे अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा मिलेगा।
  • व्यवसायों के लिए प्रमुख बाज़ार: शहरी मध्यम वर्ग वैश्विक और स्थानीय दोनों प्रकार के व्यवसायों के लिए एक महत्त्वपूर्ण बाज़ार बन गया है। यह उपभोक्ता आधार स्टार्टअप, उद्यमशीलता और आर्थिक गतिशीलता का समर्थन करता है, मुख्य रूप से शिक्षा, खुदरा व्यापर और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में।

शहरीकरण पर प्रभाव

  • बुनियादी ढाँचे की माँग: जैसे-जैसे मध्यम वर्ग बढ़ता है, वैसे-वैसे बेहतर बुनियादी ढाँचे की माँग भी बढ़ती है। टियर II और III शहर (जैसे- जयपुर, लखनऊ और देहरादून) तेजी से विकसित हो रहे हैं तथा  विकास को आकर्षित कर रहे हैं, जो मध्यम वर्ग के बढ़ते व्यय से प्रेरित है।
  • शहरी परिदृश्य में परिवर्तन: शहरी परिदृश्य में भी उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जहाँ अधिक मॉल, मनोरंजन केंद्र और गेटेड समुदायों जैसे बेहतर आवास विकल्प मौजूद हैं।

सामाजिक प्रभाव

  • संस्थाओं और शासन को सुदृढ़ बनाना: बढ़ता मध्यम वर्ग प्रायः बेहतर सामाजिक परिणामों से जुड़ा होता है, जिसमें बेहतर शासन और संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण शामिल है। 
    • यह जनसांख्यिकी शिक्षा, मुक्त भाषण और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अधिक बल देती है, जबकि धार्मिक विचारों को कम महत्त्व देती है।
  • पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता: जैसे-जैसे मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है, पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है तथा अधिकाधिक व्यक्ति- स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।

मध्यम वर्ग के समक्ष चुनौतियाँ

मध्यम वर्ग के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, विभिन्न चुनौतियाँ बनी हुई हैं:

  • मुद्रास्फीति: बढ़ती मुद्रास्फीति स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं को अधिक महँगा बना देती है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इन्हें वहन करना कठिन हो जाता है।
  • बेरोज़गारी और अल्परोज़गार: ये मुद्दे वित्तीय असुरक्षा में योगदान करते हैं, क्योंकि कई व्यक्तियों को रोज़गार में अस्थिरता का सामना करना पड़ता है या उनके पास पूर्णकालिक रोज़गार का अभाव होता है।
  • स्थिर वेतन: वेतन अर्थव्यवस्था के अनुपात में नहीं बढ़ रहा है, जिससे क्रय शक्ति सीमित हो रही है और वित्तीय तनाव बढ़ रहा है।
  • स्वचालन खतरे: बैंकिंग, आईटी और विनिर्माण जैसे उद्योगों में स्वचालन से नौकरी छूटने का खतरा उत्पन्न होता है, जिससे आर्थिक असुरक्षा बढ़ती है।
  • उच्च कर भार: उचित आय अर्जित करने के बावजूद, मध्यम वर्ग को उच्च कर भार का सामना करना पड़ता है, तथा उन्हें बहुत कम प्रोत्साहन या सहायता उपाय मिलते हैं।
  • बढ़ता ऋण: वित्त वर्ष 2022-2023 में ऋण बोझ, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 38% होने के कारण, मध्यम वर्ग को बढ़ती आकांक्षाओं और सीमित संसाधनों के कारण वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
  • लैंगिक बाधाएँ: विशेष रूप से महिलाओं को पितृसत्तात्मक सामाजिक मानदंडों के कारण करियर विकास और उन्नति में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

मध्यम वर्ग प्रायः उपेक्षित क्यों?

भारत में मध्यम वर्ग को नीति निर्माताओं द्वारा कई कारणों से प्रायः नजरअंदाज कर दिया जाता है:

  • अनुमानित आत्मनिर्भरता: यह माना जाता है कि मध्यम वर्ग आत्मनिर्भर है, लेकिन उन्हें उच्च करों और मुद्रास्फीति जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए सरकारी समर्थन आवश्यक है।
  • विविधता: मध्यम वर्ग में बहुत विविधता है, जिसमें वेतनभोगी कर्मचारी, गिग वर्कर, सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी और छोटे व्यवसाय के मालिक शामिल हैं। ऐसे विविध समूहों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाली नीतियाँ बनाना कठिन है।
  • निम्न मतदान प्रतिशत: मध्यम वर्ग में मतदान प्रतिशत कम होता है, जिसका अर्थ है कि उनका अन्य समूहों की तुलना में कम राजनीतिक प्रभाव होता है।
  • नीति का ध्यान व्यापार और ग्रामीण हितों पर केन्द्रित: नीतिगत मंचों पर अक्सर व्यापार और ग्रामीण हितों को महत्त्व दिया जाता है, जिससे मध्यम वर्ग की आवश्यकताएँ कहीं दबी रह जाती हैं।

आगे की राह

  • कर लाभ और प्रोत्साहन: कर राहत का विस्तार करने और मध्यम वर्ग के लिए अधिक प्रोत्साहन प्रदान करने से प्रयोज्य आय बढ़ाने और उपभोक्ता व्यय को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।
  • किफायती आवास: आवास को अधिक किफायती बनाने की योजनाएँ शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आवास की बढ़ती माँग को पूरा करने में मदद करेंगी।
  • मजबूत श्रम बाजार नीतियाँ: ऐसी नीतियाँ बनाना, जो बेरोज़गारी को कम करें और रोज़गार में स्थिरता प्रदान करें, मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देगा।
  • वित्तीय सुरक्षा उपाय: सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मज़बूत करने और वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने से व्यक्तियों को अपने वित्त का बेहतर प्रबंधन करने तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद मिल सकती है।
  • लैंगिक समानता को प्रोत्साहित करना: करियर विकास में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं का समाधान करने से कार्यबल की पूरी क्षमता का दोहन हो सकेगा।

निष्कर्ष

मध्यम वर्ग में निवेश करके भारत महत्त्वपूर्ण आर्थिक संभावनाओं को विकसित कर सकता है, अपनी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर सकता है तथा दीर्घकालिक समृद्धि को बढ़ावा दे सकता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न

भारत के शहरी मध्यम वर्ग पर केंद्रीय बजट-2025 के व्यक्तिगत आयकर कटौती के प्रभाव और उपभोग प्रतिरूप तथा आर्थिक विकास पर उनके संभावित प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

(250 शब्द, 15 अंक)

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