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पूर्वोत्तर भारतीयों के विरुद्ध नस्लवाद

Lokesh Pal January 03, 2026 05:15 17 0

संदर्भ:

दिल्ली विश्वविद्यालय में एक वरिष्ठ प्रोफेसर को एक छात्र द्वारा नस्लीय गाली देकर परेशान करने की घटना इस बात को उजागर करती है कि कैसे नस्लवाद को “हास्यजनक” या “कूल” के रूप में सामान्य बना गया है

नस्लवाद के बारे में

  • परिभाषा: अनौपचारिक नस्लवाद से आशय नस्लीय या जातीय समूहों के प्रति रोज़मर्रा की, सूक्ष्म और अक्सर अनजाने में की गई पूर्वाग्रहपूर्ण या रूढ़िबद्ध अभिव्यक्तियों से है।
  • अभिव्यक्ति: यह चुटकुलों, टिप्पणियों, हास्य, सोशल मीडिया पोस्ट, “हानिरहित” टिप्पणियों या नियमित व्यवहारों में दिखाई देता है जो असमानता को सामान्य बनाते हैं या किसी समूह को नीचा दिखाते हैं।
  • वास्तविकता: आकस्मिक नस्लवाद एक प्रकार की मानसिक हिंसा है जो पूर्वाग्रह को सामान्य बनाकर सत्ता के असंतुलन और भेदभाव को बढ़ावा देती है।
    • इसका आंतरिक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे लक्षित समूहों के बीच आत्मसम्मान और अपनेपन की भावना प्रभावित हो सकती है (पीड़ितों को भारत का हिस्सा होने के बजाय “अन्य” जैसा महसूस हो सकता है)।

पूर्वोत्तर के भारतीयों के विरुद्ध नस्लवाद के कारण

  • व्यवस्थागत विफलता: शिक्षित, शहरी मध्यमवर्गीय छात्र भी इस तरह के व्यवहार में संलग्न होते हैं, जो यह दर्शाता है कि शिक्षा प्रणाली डिग्री तो प्रदान करती है लेकिन मूल्यों को स्थापित करने में विफल रहती है।
  • घातक परिणाम: उदाहरणों में दिल्ली का निडो तानिया मामला (2014) और देहरादून में हाल ही में एंजेल चकमा मामला शामिल हैं, जहाँ एक नस्लीय मौखिक दुर्व्यवहार घातक शारीरिक हिंसा में तब्दील हो गया।
  • सामाजिक सुरक्षा जाल में विद्यमान अंतर: महानगरों में रहने वाले उत्तर पूर्वी छात्रों के पास सहायता प्रणाली का अभाव है और उन्हें आवास, परिवहन और बाजारों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
  • संस्थागत विफलता: एंजेल चकमा मामले में एक पुलिस अधिकारी ने नस्लीय अपशब्दों को उत्साह में किए गए “हास्यजनक/मज़ाक” बताकर तुच्छ बना दिया, जिससे अपराधियों में क़ानून का भय समाप्त होता है।

बेजबरूआ समिति की सिफारिशें (2014)

  • समिति का उद्देश्य: इसका समिति का गठन निडो तानिया मामले (2014) के बाद भारत के अन्य हिस्सों में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों द्वारा सामना किए जाने वाले नस्लीय भेदभाव, हिंसा और उत्पीड़न को संबोधित करने के लिए किया गया था।
  • कुछ प्रमुख सिफारिशें इस प्रकार हैं:
    • मजबूत कानूनी ढाँचा: नस्लवाद से संबंधित IPC (अब भारतीय न्याय संहिता (BNS)) की धारा 153A को मजबूत करना।
    • सुधार: नस्लवाद को संज्ञेय अपराध बनाया जाए (बिना वारंट के गिरफ्तारी)।
    • निगरानी तंत्र: कॉलेजों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करना तथा उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए विशेष पुलिस इकाइयों का गठन करना।
    • SPUNER (पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशेष पुलिस इकाई): दिल्ली में स्थापित एक समर्पित पुलिस इकाई, जिसका उद्देश्य शहर में रहने वाले पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की शिकायतों, सुरक्षा और संरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान करना हो।
    • प्रतिनिधित्व: NCERT की पाठ्यपुस्तकों में उत्तर पूर्वी संस्कृति को शामिल करना।

आगे की राह

  • अनिवार्य संवेदीकरण: विविधता, पूर्वाग्रह और सम्मानजनक आचरण के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए नियमित कार्यशालाओं को संस्थागत रूप प्रदान करना।
  • शून्य-सहिष्णुता ढाँचा: परिसरों में रोकथाम और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, रैगिंग विरोधी कानूनों की तर्ज पर नस्लीय अपमान और उत्पीड़न के विरुद्ध सख्त कार्रवाई को लागू करना।
  • व्यवहार में संवैधानिक मूल्य: अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) और अनुच्छेद 19(1)(e) (कहीं भी निवास करने और बसने का अधिकार) के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए, ताकि संवैधानिक गारंटियाँ लोगों के वास्तविक जीवन का हिस्सा बन सकें।
  • विविधता में एकता को मजबूत करना: छात्र विनिमय कार्यक्रमों, सांस्कृतिक अनुभव और पूर्वोत्तर के अकादमिक अनुभव के माध्यम से “एक भारत श्रेष्ठ भारत” जैसी पहलों को बढ़ावा देना, साथ ही सहानुभूति और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष

भारत का “विविधता में एकता” का आदर्श वास्तविक जीवन में भी परिलक्षित होना चाहिए। यदि नागरिक असुरक्षित या भेदभावग्रस्त महसूस करेगें, तो हमारा राष्ट्र निर्माण का कार्य अधूरा रह जाता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न:

प्रश्न: शैक्षणिक संस्थानों में ‘अनौपचारिक नस्लवाद’ का सामान्यीकरण केवल व्यवहार संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि संस्थागत नैतिकता की विफलता है। बेजबरुआ समिति की सिफारिशों के आलोक में, चर्चा कीजिए कि शैक्षणिक संस्थान और नागरिक समाज पूर्वोत्तर के साथ भावनात्मक एकीकरण की खाई को कैसे कम कर सकते हैं।

(15 अंक, 250 शब्द)

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